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3 बार के CM मोदी PM तो ममता क्यों नहीं:शत्रुघ्न सिन्हा बोले- लोकसभा चुनाव में बड़ी गेम चेंजर होंगी बंगाल की मुख्यमंत्री

VIP इंटरव्यू

पटना27 मिनट पहले

आसनसोल से बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा को TMC टिकट देती है। BJP नेता उनकी पुरानी फिल्म की क्लिप शेयर कर संदेशखाली के आरोपी TMC नेता शाहजहां शेख से तुलना करते हैं। कहते हैं- TMC रील और रियल लाइफ के बलात्कारियों से भरी पड़ी है।

शत्रुघ्न सिन्हा जवाब देते हैं कि ये लोग खिसियाई बिल्ली खम्भा नोंचे मुहावरे को सार्थक कर रहे थे। शॉटगन ने संदेशखाली में आरोपियों पर देर से कार्रवाई का बचाव भी किया।

उन्होंने इंडिया ब्लॉक में ममता बनर्जी की भूमिका पर कहा कि वो बड़ी गेम चेंजर साबित होंगी। इस दौरान उन्होंने पीएम पद के लिए ममता की सभी खूबियां गिनाईं। क्या वे बिहार लौटेंगे?, नीतीश और तेजस्वी से जुड़े भास्कर के सवालों का भी जवाब दिया। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

2019 में पटना साहिब लोकसभा सीट से शत्रुघ्न सिन्हा ‌BJP के रविशंकर प्रसाद से चुनाव हार गए थे। 2022 में वेस्ट बंगाल की आसनसोल सीट उपचुनाव में TMC के टिकट से सांसद चुने गए।

सवाल- आपको बिहारी बाबू कहा जाए या बंगाली बाबू?
जवाब- बिहारी बाबू हों या बंगाली बाबू हों, सही मायनों में तो मैं हिंदुस्तानी बाबू हूं। भारत मां की संतान हूं। बिहार से कई बार चुनाव जीतने के बाद बंगाल से चुनाव जीता, ये तो जगजाहिर है। इसलिए आपको तो खुशी होनी चाहिए ये जानकर कि बिहारी बाबू जो है, वो बंगाली बाबू भी है।

सवाल- आप दूसरी बार बंगाल के आसनसोल से TMC के उम्मीदवार हैं, इस चुनाव में आपको कितनी चुनौती दिख रही है?
जवाब- हर चुनाव चुनौती होता है, चाहे प्रतिद्वंदी और दूसरे दल कितने ही मजबूत या कमजोर हों। किसी चुनाव को चुनौती समझ कर ही लेना चाहिए, हलके में नहीं लेना चाहिए। पिछली बार मैं आसनसोल, बंगाल से रिकॉर्ड मतों से जीता था।

सवाल- आपके सामने ‌BJP ने भोजपुरी स्टार को टिकट दिया, लेकिन टिकट मिलने के साथ ही उनके कुछ पुराने गाने जिनमें अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया था, उनकी चर्चा होने लगी। किसी कलाकार की पुरानी चीजों को लेकर मौजूदा स्थिति में सवाल खड़े करना कितना जायज है? क्या TMC इसे बंगाली अस्मिता के साथ जोड़कर चुनाव में मुद्दा बनाएगी?
जवाब- मैं तो उनको जानता नहीं हूं, सुना है अच्छे इंसान हैं, वो अच्छे लोगों में से आते हैं। एक अच्छे कलाकार हैं, गायक हैं। वो चुनाव से विथड्रॉ कर गए थे या कराया गया, ये उनका और उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है, इसलिए मैं इस पर तथाकथित राजनीतिक विशेषज्ञ बनकर ज्यादा कुछ नहीं कह सकता हूं।

सवाल- आपको टिकट मिलने पर ‌BJP नेताओं ने आपकी पुरानी फिल्म की क्लिप शेयर करते हुए आपकी तुलना संदेशखाली के आरोपी TMC नेता शाहजहां शेख से करते हुए कहा कि TMC रील और रियल लाइफ के बलात्कारियों से भरी पड़ी है, इसे कैसे देखते हैं आप?
जवाब- वो लोग खिसियाई बिल्ली खम्भा नोंचे मुहावरे को सार्थक कर रहे थे। जब कुछ नहीं मिला तो 30-40 साल पहले की फिल्म का सीन निकाल दिया। फिल्मों में जब हम किरदार अदा करते हैं, समाज का दर्पण बनकर सामने आते हैं, तो कई बार हम ऐसा काम करते हैं।

आज मैं देश-विदेश में एंटी टोबैको कैम्पेन करता हूं, कैंसर से निजात दिलाने के लिए भरपूर कोशिश करता हूं, जागृति पैदा करता हूं। इसका मतलब ये तो नहीं कि किसी फिल्म में मैंने सिगरेट पी लिया तो मैंने अपनी बातों का अपमान कर दिया।

सवाल- क्या आपकी इच्छा है बिहार वापस आने की, अगर मौका मिला तो बिहार से चुनाव लड़ेंगे?
जवाब- बिहार मेरी कमजोरी है, बिहार मेरी शक्ति है। बिहार से मुझे बहुत लगाव है। मैं आज बिहार से चुनाव नहीं भी लड़ रहा हूं, पिछली बार यहां जिन कारणों से जैसे-तैसे करके हारा या हराया गया, उसके बावजूद मेरा महीने में औसतन 1-2 बार पटना आना होता ही है। लेकिन अभी मैं जहां हूं, जिस दिशा में हूं, मुझे बहुत खुशी है कि देश की सबसे कद्दावर, सबसे ज्यादा जानदार और सक्सेजफुल लीडर ममता बनर्जी के साथ हूं। उनका मुझ पर इतना विश्वास है कि उन्होंने पिछली बार बिना मुझसे बात किए मेरे नाम की घोषणा कर दी थी। ये उनका बड़प्पन था।

सवाल- प्रधानमंत्री मोदी लगातार 400+ का नारा दे रहे हैं, क्या आपको लगता है कि BJP इस ऐतिहासिक आंकड़े को छू पाएगी?
जवाब- मुझे लगता है कि काडर का मनोबल बहुत गिरा हुआ है, बहुत सारी बातें हुई हैं जिसका PM मोदी जवाब नहीं दे पा रहे हैं और उन सवालों से भाग रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी, रुपए-पेट्रोल की कीमतें, किसानों की दयनीय हालत और उनकी आय दोगुनी करने के वादे जैसे ज्वलंत मुद्दों को अवॉएड कर रहे हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड का घोटाला आईसिंग ऑन द केक हो गया।

दुनिया देख रही है कि कैसे सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करके दिवालिया हो चुकी कंपनियों से 500-1000 करोड़ चंदा उगाहा गया है।

सवाल- लेकिन ‌BJP के बाद TMC को ही इलेक्टोरल बॉन्ड से सबसे ज्यादा चंदा मिला है?
जवाब- जब आपने विंडो खोल दिया, इसको कानूनी जामा पहना दिया, तो फिर बाकी लोग क्यों नहीं आएंगे? हालांकि, उनके मुकाबले बहुत कम है। उनके पास 10 हजार करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड और उसके बाद भी क्या-क्या घपले हुए हैं, अब दुनिया को पता है। उनका सीज करो, हमारा सीज करो, ये नहीं कि इनकम टैक्स से कांग्रेस पार्टी का फंड सीज कराते हो और अपना फंड खुला रखते हो।

क्या दूसरी पार्टियों के पास ये अधिकार था कि वो उगाही कर सकें? क्या रेड करवाने की शक्ति थी इनके पास? क्या उस तरह से सेंट्रल प्रोजेक्ट में कांट्रैक्ट दिया और उसके बदले में भरपूर चंदा लिया? विपक्षी दलों ने उगाही का काम नहीं किया। चंदे का धंधा तो BJP और NDA गठबंधन के हमारे दोस्तों ने किया।

सवाल- लेकिन TMC समेत दूसरी पार्टियां भी तो राज्य सरकार चला रहीं जिन्हें चंदा मिला है। यानी इस घोटाले में सब शामिल हैं?
जवाब- उन्होंने तो हजारों करोड़ का चंदा लिया, दूसरे लोगों ने 1600-1700 करोड़ का लिया, जो उनके मुकाबले कुछ भी नहीं। विंडो उन्होंने खोली, तो अगर इन लोगों को पता चला तो कहा कि ठीक है आने दो चंदा। राजनीतिक दल फंड पर चलते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन बात ये है कि उस कंपनी को चंदा देने के बदले में इन्होंने कोई धंधा दिया क्या? कुछ काम करवाया क्या? क्या ED, CBIई या इनकम टैक्स के जरिए तथाकथित तौर पर डराया-धमकाया, दबाव डाला और क्या उगाही की?

सवाल- इंडिया गठबंधन की नींव रखने वाले नीतीश कुमार खुद ही चले गए, तेजस्वी यादव सत्ता से बेदखल हो गए, इस पूरे घटनाक्रम को आप कैसे देखते हैं?
जवाब- तेजस्वी का भविष्य मुझे बहुत उज्ज्वल दिखाई पड़ता है। तेजस्वी के प्रति लोगों की बहुत सहानुभूति है, लोकप्रियता बढ़ी हुई है। लोग उनकी तरफ देख रहे हैं। उन्होंने अपने कमिटमेंट के आधार पर कुछ काम किया। उन्होंने जो कहा, वो किया, इससे तेजस्वी की क्रेडिबिलिटी बढ़ी है।

जहां तक क्रेडिबिलिटी का सवाल है, मैं अपने दूसरे दोस्त (नीतीश कुमार) के बारे में नहीं कह सकता, जो उन्होंने किया या उनसे करवाया गया या जो हरकतें हुईं। मेरे दोस्त हैं, मैं कभी उन पर टीका-टिप्पणी नहीं करता, आज भी नहीं करूंगा।

नेताओं की विश्वसनीयता वैसे भी बहुत गई हुई है और ये तो नीम पर करेला वाली क्रेडिबिलिटी हो गई। नेताओं को लेकर आम जनता में कंटेम्प्ट है ये लोग सिर्फ कहते हैं, कुछ करते नहीं हैं।

अलटू-पलटू, यहां से वहां, वही डायलॉग यहां भी कहना कि अब मैं इनके साथ आ गया हूं, अब कहीं नहीं जाऊंगा। वही डायलॉग कितनी बार पहले बोल चुके, अब फिर वही कह रहे कि नहीं जाऊंगा। क्या-क्या हरकतें आप कर रहे हैं, आपसे हो जा रहा है या जिन कारणों से हो रहा हो।

ये लोग बिहार की तरफ बहुत नजर लगाकर देख रहे थे, लेकिन इन कारणों की वजह से अब दूसरी दृष्टि से देख रहे हैं। क्या ये बिहार की 40 सीटों में से 10 सीट भी ले पाएंगे?

ये तस्वीर तब की है, जब बिहारी बाबू भाजपा में थे। शत्रुघ्न सिन्हा की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दोस्ती रही है।

सवाल- तेजस्वी यादव कह रहे हैं कि बिहार के नतीजे चौंकाने वाले होंगे, क्या आपको लगता है कि लालू यादव के नेतृत्व में महागठबंधन इतना अच्छा प्रदर्शन कर पाएगा?
जवाब- बहुत चौंकाने वाले नतीजे होंगे। जहां तक मेरा अनुभव है, तेजस्वी की बातों में बहुत सत्य और तथ्य है।

सवाल- इंडिया गठबंधन में खींचतान बहुत दिख रही थी, आप लोग अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कॉम्बिनेशन पर चुनाव लड़ रहे हैं, क्या इसका फायदा ‌BJP को हो सकता है? या खेला होबे का नारा देने वाली ममता बनर्जी क्या कोई खेल कर पाएंगी?
जवाब- ममता जी के खेला के बारे में समझने के लिए अच्छे-अच्छों को अभी दम चाहिए। BJP को इसका बहुत घाटा होगा। अलग-अलग कहां लड़ रहे हैं ये लोग, आज इंडिया के जितने मजबूत नेता और पार्टियां हैं, उन्हें सताया जा रहा, प्रताड़ित करने की कोशिश की जा रही है, इनको जेल भेजा जा रहा है। जिन पर केसेज ठोके जा रहे, उनमें 95 फीसदी से ज्यादा विपक्षी नेता हैं।

अपनी वॉशिंग मशीन को ऐसा कर दिया है कि जो लोग सत्ताधारी पार्टी के पास जा रहे हैं, उनको धुलकर बेदाग सामने पेश करने की कोशिश हो रही है। दो सिटिंग CM गिरफ्तार हुए, उन्हें जिस तरह से गिरफ्तार किया गया, जनता सहमत नहीं है। जनता को ये लग रहा हे कि ये राजनीतिक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है। इससे लोगों में विपक्ष के प्रति सहानुभूति है, इससे विपक्ष में बहुत मजबूती आ रही है।

सवाल- क्या इस मजबूती को और फायदा मिलता अगर विपक्ष कोई चेहरा पेश करता? क्या ममता बनर्जी PM मटेरियल हैं?
जवाब- झश बनने के लिए आपको किसी कॉम्पिटिशन में जाना पड़ता है क्या? UP के एग्जाम की तरह जहां पर्चा लीक हो जाता है? 60 हजार पोस्ट के लिए 48 लाख लोग अप्लाय करते हैं और कॉम्पिटिशन में आते हैं या कोई IAS-IPS कॉम्पिटिशन है क्या? एक दिन आप भी बन सकते हैं, अगर किसी दिन आपके पास संख्या बल हो गया।

प्रधानमंत्री मोदी के पास कोई बहुत बड़ी डिग्री है क्या? इनके पास एंटायर पॉलिटिकल साइंस हो सकता है, लेकिन उसके आलावा तो और कुछ नहीं है न। तीन बार के चीफ मिनिस्टर हैं, इनके पास संख्या बल था, हम लोग साथ थे और साथ मिलकर चाहा कि ये हो जाएं।

हम तो ये भी चाहते थे कि आडवाणी जी हो जाएं। ऐसा नहीं हुआ, कारण आप लोगों को पता है। जितने भी प्रधानमंत्री बने हैं, संख्या बल के आधार पर ही बने हैं न। 400 से ज्यादा सीटें लेकर स्वर्गीय राजीव गांधी आए थे, इतने लोगों ने साथ दिया था।

400 पार का नारा देकर कहीं हमें 2004 की याद तो नहीं दिला रहे। तब हम भी ‌BJP में थे, इतनी अच्छी-अच्छी बातें की थीं, फील गुड फैक्टर कहा था। हमने अति उत्साह में 7 महीने पहले चुनाव की घोषणा कर दी थी। रिजल्ट क्या आया, अटल बिहारी वाजपेयी इतना अच्छा कर रहे थे। फिर एक शक्ल आई सामने डॉक्टर मनमोहन सिंह की, विद्वान और बढ़िया इंसान। 2004 में BJP के परखच्चे उड़ गए, किसी ने नहीं सोचा था कि हम उस वक्त हारेंगे, लेकिन हुआ, जनता का वर्डिक्ट कुछ और था।

सवाल- संदेशखाली में TMC नेताओं पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न के आरोप लगे, हाईकोर्ट की फटकार के बाद कार्रवाई हुई। ममता बनर्जी पर बहुत दिनों तक चुप्पी साधे रखने का आरोप लगा। बतौर बंगाल से TMC सांसद आपकी प्रतिक्रिया?
जवाब- मुझे लगता है कि सारे मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हर बार नई-नई कहानी गढ़ी जाती है और सामने लेकर आया जाता है। मिसाल के तौर पर, राम मंदिर के मामले में जितना सरकारीकरण हुआ, शायद उसका इम्पैक्ट और होता। तो उसमें एक वजह ये भी थी कि आपने इमीडियटली आदिवासी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर लिया, लोगों का ध्यान उधर गया। उसके बाद तुरंत बिहार में उलट-पलट, जो भी ड्रामा हुआ यहां पर, इस पर ध्यान गया। उसके बाद केजरीवाल पर ध्यान गया। केजरीवाल के बाद संदेशखाली पहुंचते हैं तो संदेशखाली।

मैं महिलाओं का बहुत सम्मान करता हूं। मैं अपनी भाषा की मर्यादा और शब्दों का चयन बहुत ठीक से करता हूं, लेकिन साथ-साथ ये भी कह दूं कि कहीं भी महिलाओं के साथ जुल्म-अत्याचार होता है, हम उसकी निंदा करते हैं। अगर संदेशखाली की घटना सत्य है तो बहुत जघन्य, निंदनीय, शर्मनाक और दर्दनाक है। मामला अभी कोर्ट में है, इन्क्वायरी चल रही है।

आपको लगता है देरी हुई लेकिन एक्शन में हाईकोर्ट और CBI की तरफ से कुछ कन्फ्यूजन पैदा हुआ, उसकी वजह से देर हुई, लेकिन अंधेर नहीं हुआ। जो लोग हैं, उन पर एक्शन हुआ, लेकिन प्रधानमंत्री को इतनी कड़ी भाषा नहीं बोलनी चाहिए।

एक बार ममता दीदी का अपमान करने की कोशिश की थी, जब कहते थे ‘दीदी ओ दीदी’, क्या आग लगी थी बंगाल में, लोगों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। अभी आप कह रहे हैं कि दीदी को शर्म नहीं आ रही।

माननीय प्रधानमंत्री जी, किसी महिला और खासतौर महिला मुख्यमंत्री के बारे में ऐसी अपमानजनक बात की जाएगी, तो फिर कोई आपसे भी तो सवाल कर सकता है कि आपको शर्म नहीं आती जो कठुआ और हाथरस में अत्याचार होता है। सरकारी अफसरों पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता, रातों-रात कन्या को जला भी दिया गया।

आज भी जो हालत हो रही है वहां पर, उस पर शर्म नहीं आती? देश की जनता ये देख रही है, इनका भी मुंहतोड़ जवाब देगी। देश की जनता ममता जी या किसी भी नेता का ऐसा अपमान या अत्याचार अब बर्दाश्त नहीं करेगी।

सवाल- इस लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की सीटे आएंगी?
जवाब- इन्होंने पिछली बार बंगाल में ‘अबकी बार 200 पार’ कहा था, तो मुश्किल से जैसे-तैसे करके करीब 75 सीटें आ गई थीं। इन्होंने कर्नाटक में 200 पार कहा था, 66 सीटें आ गई थीं।

‌BJP ने दिल्ली में कहा था कि हम दो तिहाई मतों से जीतेंगे, 2-3 सीटें आ गई थीं, स्कूटर पार्टी बन गई थी। उस हिसाब से इनकी करीब 150-175 सीटें आ जाएंगी, तो इन्हें अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझना चाहिए।

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