सुप्रीम कोर्ट से इलेक्टोरल बॉन्ड अवैध घोषित होने के बाद चुनावी फंडिंग के तौर-तरीकों को लेकर सरकार के भीतर मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड जैसी नई स्कीम लाने की योजना बनाई है।
वित्त मंत्रालय में इसके इनोवेटिव मॉडल पर दो बैठकें हो चुकी हैं। इसमें चर्चा हुई कि वह कौन सा तरीका हो, जो संविधान के मानकों पर खरा उतरे और सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा की कसौटी की बाधा पार कर सके।
इलेक्टोरल बॉन्ड के नए अवतार वाली स्कीम को कानूनी कसौटी पर खरा रखने के लिए विधि आयोग और कानूनी विशेषज्ञों की समिति बनाई जाएगी। चुनाव आयोग से भी व्यापक परामर्श किया जाएगा।
नया मॉडल ऐसा होगा, जो मानक पर खरा उतरे
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि कोई व्यक्ति ‘ए’ यह बॉन्ड बैंक से खरीदता है, तो उसका पूर्ण विवरण रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है। लेकिन यदि ‘बी’ यह इलेक्टोरल बॉन्ड सर्टिफिकेट ‘ए’ को कुछ अतिरिक्त नकद राशि देकर हासिल कर ले और किसी राजनीतिक पार्टी ‘सी’ को दे तो ‘बी’ का नाम कहीं से भी रिकॉर्ड में नहीं आता है। ऐसे अंदेशों के लिए भी नए इलेक्टोरल बॉन्ड में व्यवस्था करने की तैयारी है।
पुरानी व्यवस्था कैसे जारी रहने दे सकते हैं
वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने दैनिक भास्कर से कहा कि चुनावी फंडिंग के इनोवेटिव मॉडल पर मंथन चल रहा है। पहले बोरों में भरकर नोट इधर से उधर होते थे। इसे कैसे जारी रख सकते हैं?
पीएम ने कहा था- व्यवस्था में कुछ खामी हो सकती है, पैसा आने-जाने का पता तो चल रहा था
सरकार के भीतर यह मंथन इस बात को देखते हुए अहम है कि पीएम मोदी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि चुनावी बॉन्ड व्यवस्था में खामियां हो सकती हैं, लेकिन पैसे के आने-जाने के स्रोत का पता तो चल रहा था। 2014 से पहले पैसा तो खर्च हो रहा था, पर किसे पता होता था कि वह कहां से आया, किसके पास गया।
PM मोदी ने ये बातें तमिलनाडु के न्यूज चैनल थांथी टीवी को दिए एक घंटे के इंटरव्यू में कही थीं। प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा पब्लिक होने से पार्टी को झटका लगा है? 31 मार्च को भाजपा ने यूट्यूब चैनल पर इस इंटरव्यू को जारी किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी ने इलेक्टोरल बॉन्ड की स्कीम बनाई तो पता चल पा रहा है कि कौन-सा पैसा किसने कब और किसको दिया। जो लोग डेटा पब्लिक होने को लेकर हल्ला मचा रहे हैं, उन्हें बाद में अफसोस होगा।” पढ़ें पूरी खबर…
इलेक्टोरल बॉन्ड केस- सुप्रीम कोर्ट में कब, क्या हुआ…
- 18 मार्च 2024 : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मार्च) को SBI से कहा कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी हर जानकारी 21 मार्च तक दे। सुप्रीम कोर्ट ने नए आदेश में उन यूनीक बॉन्ड नंबर्स के खुलासे का भी आदेश दिया। कोर्ट ने कहा- 21 मार्च की शाम 5 बजे तक SBI के चेयरमैन एक एफिडेविट भी दाखिल करें कि उन्होंने सारी जानकारी दे दी है। पूरी खबर पढ़ें…
- 15 मार्च 2024 : सुप्रीम कोर्ट ने SBI को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि 11 मार्च के फैसले में कहा गया था कि बॉन्ड की पूरी डिटेल दी जाए, लेकिन SBI ने यूनीक अल्फा न्यूमेरिक नंबर्स का खुलासा नहीं किया। बेंच ने कहा था कि SBI 18 मार्च तक नंबर की जानकारी नहीं दिए जाने का जवाब दे। पूरी खबर पढ़ें …
- 11 मार्च 2024 : इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने से जुड़े केस में SBI की याचिका पर 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की थी। SBI ने कोर्ट से कहा था- बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने में हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए कुछ समय चाहिए। इस पर CJI ने पूछा था- पिछली सुनवाई (15 फरवरी) से अब तक 26 दिनों में आपने क्या किया? पूरी खबर पढ़ें…
- 4 मार्च 2024 : SBI ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी देने के लिए 30 जून तक का वक्त मांगा था। इसके अलावा कोर्ट ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की उस याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें 6 मार्च तक जानकारी नहीं देने पर SBI के खिलाफ अवमानना का केस चलाने की मांग की गई थी।
- 15 फरवरी 2024 : सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक फंडिंग के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- यह स्कीम असंवैधानिक है। बॉन्ड की गोपनीयता बनाए रखना असंवैधानिक है। यह स्कीम सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। पढ़ें पूरी खबर…
- 2 नवंबर 2023: सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम केस में फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, अगली सुनवाई की तारीख नहीं बताई गई। कोर्ट ने पार्टियों को मिली फंडिंग का डेटा नहीं रखने पर चुनाव आयोग से नाराजगी जताई। साथ ही आयोग से राजनीतिक दलों को 30 सितंबर तक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिली रकम की जानकारी जल्द से जल्द देने का निर्देश दिया है। पढ़ें पूरी खबर…
- 1 नवंबर 2023: सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड से राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता आई है। चंदा देने वाले नहीं चाहते कि उनके दान देने के बारे में दूसरी पार्टी को पता चले। इससे उनके प्रति दूसरी पार्टी की नाराजगी नहीं बढ़ेगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी बात है तो फिर सत्ताधारी दल विपक्षियों के चंदे की जानकारी क्यों लेता है? विपक्ष क्यों नहीं ले सकता चंदे की जानकारी? पूरी खबर पढ़ें …
- 31 अक्टूबर 2023: प्रशांत भूषण ने दलीलें रखी थीं। उन्होंने कहा था कि ये बॉन्ड केवल रिश्वत हैं, जो सरकारी फैसलों को प्रभावित करते हैं। अगर किसी नागरिक को उम्मीदवारों, उनकी संपत्ति, उनके आपराधिक इतिहास के बारे में जानने का अधिकार है, तो उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि राजनीतिक दलों को कौन फंडिंग कर रहा है? पूरी खबर पढ़ें…
ये खबर भी पढ़ें…
इलेक्टोरल बॉन्ड की बैलेंस शीट- देश की 771 कंपनियों ने 11,484 करोड़ के बॉन्ड खरीदे, 22 कंपनियों ने ही 50% चंदा दिया
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 21 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा पूरा डेटा इलेक्शन कमीशन को सौंपा, जिसके बाद आयोग ने इसे पब्लिक किया। SBI के डेटा के मुताबिक, कुल 1263 खरीददार थे। इन्होंने 12,155 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। इनमें 771 कंपनियों ने 11,484 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। इसमें आधी रकम शीर्ष 22 कंपनियों से आई हैं।
इनके कारोबार ट्रेडिंग, खनन, धातु, रियल एस्टेट, निर्माण, ऊर्जा और दूरसंचार से लेकर फार्मास्युटिकल्स तक फैले हैं। ट्रेडिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने सबसे ज्यादा 2955 करोड़ रुपए सियासी दलों को दिए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 963 करोड़ रुपए भाजपा को मिले हैं। पढ़ें पूरी खबर…
