उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन कोटा तय है, लेकिन दलालों ने भी दर्शन कराने का अपना अलग सिस्टम बना लिया है। दलाल 3000 से 5000 रुपए लेकर दर्शन करा रहे हैं। उनके इस नेटवर्क में ऑटो रिक्शा चलाने वाले, फूल बेचने वाले, सुरक्षाकर्मी और खुद को पंडित बताने वाले लोग शामिल हैं।
दैनिक भास्कर के 2 रिपोर्टर ने आम श्रद्धालु बनकर इनसे संपर्क किया तो भस्म आरती और शयन आरती के दर्शन के लिए 10000 रुपए देने पड़े। रुपए लेते हुए ये कैमरे में कैद हुए हैं।
धुलेंडी (25 मार्च) की सुबह भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में आग लगने की घटना के बाद मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। उस वक्त नंदी हॉल में कई श्रद्धालु अनधिकृत रूप से गुलाल लेकर पहुंच गए थे।
इसके बाद दैनिक भास्कर की टीम ने महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था की पड़ताल की। दो रिपोर्टर ने आम श्रद्धालु बनकर दर्शन करवाने वाले लोगों से संपर्क किया तो दर्शन के नाम पर रुपए वसूल करने का पूरा नेटवर्क सामने आया। रुपए दिए तो पिछले दरवाजे से मंदिर में एंट्री करा दी और फिर भस्म आरती और शयन आरती में सबसे आगे बैठा दिया।
अब जानते हैं दर्शन कराने के नाम पर हो रही वसूली की पूरी प्रोसेस को..
पहली कड़ी- ऑटो वाले, होटल संचालक और फूल वाले
ऑटो चलाने वाले ने नंबर देते हुए कहा- ये दर्शन करा देंगे
श्रद्धालु जैसे ही उज्जैन पहुंचते हैं, उनका सामना ऑटो चालकों से होता है। ये इस वसूली सिस्टम की पहली कड़ी है। 28 मार्च को दोपहर 1 बजे जब भास्कर की टीम उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड पर पहुंची तो चार-पांच ऑटो वालों ने घेर लिया।
एक ने कहा- चलिए पूरा उज्जैन दर्शन वाजिब दाम में करा दूंगा। दूसरा बीच में बोला- दर्शन तो कोई भी करवा देगा। मैं सस्ते में होटल भी दिला दूंगा। तभी तीसरे ने कहा- सब छोड़िए, बिना लाइन में लगे एकदम सामने से बाबा महाकाल के दर्शन करवा दूंगा। बिना देर किए भास्कर की टीम तीसरे ऑटो में सवार हो गई। ऑटो वाले ने अपना नाम आबिद बताया।
आबिद ने बताया – सामान्य दिनों तो दलाल प्रति व्यक्ति भस्म आरती के 2100-2100 रुपए लेते हैं। अभी होली वाले दिन गर्भगृह में आग लग गई थी तो सख्ती बढ़ गई है, हो सकता है रेट भी बढ़ गया हो। इसलिए मैं गारंटी के साथ रेट नहीं बता सकता। आबिद ने भास्कर टीम को मंदिर के सामने छोड़ा।
उसने पहले वर्धमान हर्ष नाम के एक व्यक्ति से बात की। जो खुद को महाकाल मंदिर का पंडित बताता है। इससे बात करने के बाद आबिद ने भास्कर की टीम को नंबर देकर कहा कि ये भस्म और शयन आरती में एंट्री दिला देगा।
दूसरी कड़ी- मंदिर परिसर में घूमने वाले दलाल
बोला- शयन आरती में सबसे आगे बैठा दूंगा
भास्कर की टीम ने रायपुर से आए श्रद्धालु बनकर वर्धमान हर्ष से बात की। हर्ष ने कहा कि भस्म आरती में तो हमारा कोटा पूरा हो गया है। सख्ती के कारण अभी ज्यादा लोगों को नहीं ले जा पा रहे हैं। लेकिन, आपकी शयन आरती की व्यवस्था करवा देता हूं। शयन आरती में सबसे आगे की लाइन में बैठा दूंगा। कोई वहां से हटाएगा भी नहीं। हर्ष ने रात 9.30 बजे मंदिर के बाहर मिलने के लिए कहा।
हर्ष के बताए समय पर भास्कर की टीम मंदिर के गेट नंबर-1 के पास पहुंच गई। हर्ष को कॉल किया तो उन्होंने कहा कि ‘मैं किसी को भेजता हूं जो आपको अंदर ले आएगा।’ कुछ देर बाद वहां मंदिर की सुरक्षा में तैनात एक सिपाही पहुंचा। सिपाही ने आकर दोनों का नाम पूछा और प्रोटोकॉल गेट से प्रोटोकॉल पर्ची न होने के बाद भी अंदर लेकर गया। प्रवचन हॉल में पहुंचकर वो बोला- यहां से आगे हर्ष ही लेकर जाएंगे।
बात 3100 रुपए की हुई, बाहर आकर लिए 4200 रुपए
आरती खत्म होने के बाद भास्कर टीम को हर्ष मंदिर के बाहर लेकर पहुंचा, उसने टीम से कहा कि आप दोनों 2100-2100 रुपए दे दो। टीम ने कहा कि बात तो 3100 की हुई तो उसने कहा, शयन आरती के लिए 500-500 रुपए की रसीद भी कटती है।
इस पर जब टीम ने कहा कि आरती तो हर भक्त के लिए नि:शुल्क है। इसके लिए तो कोई रसीद नहीं कटती। टीम की बात सुनकर वो सकपकाया। फिर, बात संभालते हुए बोला कि रसीद से मेरा मतलब उस पुलिसकर्मी से था। आप दोनों को प्रोटोकॉल गेट से लेकर जो सिपाही आया था, उसे भी 500-500 रुपए देना होते हैं।
उसके कमीशन का आप दोनों को अलग से भुगतान करना होगा। टीम ने कहा कि जब बात 3100 में फाइनल हुई तो अब हम क्यों अलग से भुगतान करें, इस पर वह धमकाने वाले अंदाज में बोला कि पैसे तो आपको देने ही पड़ेंगे। टीम के 4200 रुपए देने के बाद ही उसने हमें वहां से जाने दिया।
तीसरी कड़ी- मंदिर की व्यवस्था में लगे सुरक्षाकर्मी
मुझे तो प्रति भक्त दर्शन के 200 रुपए ही मिलते हैं
हर्ष के जाते ही वो पुलिसकर्मी भास्कर की टीम को दिखाई दिया जो अंदर ले गया था। टीम ने कहा कि अंदर ले जाने के लिए आप बहुत ज्यादा चार्ज करते हो, ये सुनते ही पहले तो वह सिपाही चौंक गया और पूछा कि आपसे किसने कहा, मुझे कोई पैसा नहीं मिलता। वो तो मेरे परिचित थे इसलिए मैं आपको अंदर लेकर आया।
टीम ने जब बताया कि हर्ष ने आपके नाम पर 500-500 रुपए लिए तो उसने सीधे हर्ष को फोन लगाया। उससे कहा- भक्तों को अंदर एंट्री कराने के लिए तो कॉल करते हो, लेकिन पैसे लेने के लिए हर बार मुझे ही कॉल करना पड़ता है। तुम मुझे प्रति भक्त 150-200 रु. ही देते हो, लेकिन मेरे नाम पर 500 रु. ले रहे हो।
चौथी कड़ी – मंदिर परिसर में हार-फूल, प्रसाद बेचने वाले
पांच मिनट रुको, हमारी एक पंडित से सेटिंग, वह व्यवस्था कर देगा
इसके बाद भास्कर की टीम प्रसाद खरीदने के बहाने फूल-प्रसाद की दुकानों पर पहुंची। मंदिर के बाहर दुकान लगाने वाले राकेश को जब टीम ने कहा कि भस्म आरती करना है, कुछ व्यवस्था हो सकती है क्या। इस पर राकेश बोला कि पांच मिनट रुको, हमारी एक पंडित से सेटिंग है। वह आपकी व्यवस्था कर देगा।
फोन करने के बाद वह बोला कि आज की भस्म आरती का कोटा फुल हो गया है। आपको VIP दर्शन करने हो या शयन आरती करना है तो 2100-2100 रुपए शुल्क लगेगा। अंदर जाकर आगे की पंक्ति में बैठकर दर्शन कर सकेंगे।
बातचीत में राकेश ने ये भी बताया कि VIP ट्रीटमेंट चाहिए तो पैसा खर्च करना पड़ता है। वो बोला- ऐसे जनरल दर्शन भी आप कर सकते हो, ये तो आपके ऊपर निर्भर करता है। आप जितने VIP दर्शन करोगे उतना पैसा आपको देना पड़ेगा। पंडित आएगा और आपको ले जाएगा। आपसे पैसे लेगा क्योंकि उसे भी आगे देना पड़ता है।
भस्म आरती में अन-ऑफिशियल एंट्री का सिस्टम …
भस्म आरती के लिए 2 लोगों से लिए 6 हजार रुपए
शयन आरती के बाद अब भास्कर की टीम ने भस्म आरती में प्रवेश के वसूली सिस्टम को समझने की कोशिश की। हमें बृजेश तिवारी नाम के शख्स का नंबर मिला। 28 मार्च को भास्कर की टीम ने भक्त बनकर शाम 6 बजे संपर्क किया।
तिवारी ने कहा कि 29 मार्च की भस्म आरती का स्लॉट भर चुका है, यदि उज्जैन में ही रुक रहे हैं तो 30 मार्च की भस्म आरती का ही स्लॉट बुक हो पाएगा। अगले दिन जब टीम ने उससे संपर्क किया तो तिवारी ने दोनों रिपोर्टर्स के आधार कार्ड की कॉपी मांगी और कहा कि वह दोपहर तक खुद संपर्क करेगा।
दोपहर में तिवारी ने बताया कि 30 तारीख का स्लॉट भी बुक हो चुका है। 31 मार्च को ही भस्म आरती में शामिल हो सकते हैं। रात साढ़े बारह बजे तिवारी ने मंदिर के गेट नंबर 1 पर बुलाया। जैसे ही भास्कर की टीम पहुंची, 10 मिनट के भीतर तिवारी वहां पहुंच गया। उसने 6 और लोगों के लिए भस्म आरती की बुकिंग की थी। भास्कर टीम समेत सभी आठ लोगों को वो मंदिर के चेकिंग गेट तक ले गया।
चेकिंग गेट पर अनुमति पत्र भास्कर टीम को देते हुए तिवारी ने कहा कि, होली पर मंदिर के गर्भ गृह में हुए हादसे के बाद प्रशासन की सख्ती है, इसलिए वह साथ अंदर नहीं जा सकता। पहले वे लोग भक्तों को साथ लेकर अंदर चले जाते थे और आगे की पंक्तियों में बैठा देते थे।
अभी कुछ दिन सख्ती और रहेगी, उसके बाद फिर सब पहले जैसा सामान्य हो जाएगा। अभी आपको अन्य भक्तों के साथ लाइन में लगकर आरती में बैठना होगा। आरती खत्म होने के बाद उसने नीलकंठेश्वर मंदिर के पास मिलने का कहा और यहां से चला गया।
सुबह 6 बजे आरती खत्म होने के बाद भास्कर की टीम नीलकंठेश्वर मंदिर के पास पहुंची। यहां केवल दो लोगों को देखकर उसने पूछा कि बाकी 6 लोग कहां है। उसने सभी लोगों को कॉल किया। वे सभी बाहर निकल गए थे। तिवारी ने भास्कर की टीम को वहीं रुकने का कहकर बाहर की तरफ दौड़ लगा दी।
कुछ देर बाद वह वापस हमारे पास पहुंचा। बोला- कई बार भक्त बिना पैसे देकर चले जाते हैं, थोड़ा रिस्क रहता है। हमारा पूरा काम विश्वास पर टिका है, हम किसी से आरती से पहले पैसे नहीं लेते। इसके बाद उसने भास्कर टीम से कहा, आरती में शामिल होने के लिए 3100-3100 रुपए शुल्क लगेगा।
टीम ने उससे पूछा कि मंदिर प्रशासन से तो 200-200 रुपए की पर्ची ही कटी है, फिर इतना ज्यादा शुल्क क्यों ले रहे हैं। उसने बताया कि यदि आप साधारण लाइन में लगते तो पूरी रात परेशान होते, हमने आपकी व्यवस्था कराई तो हमारी भी तो दक्षिणा बनती है। भास्कर की टीम ने उसे एक हजार रु. नकद दिए और 5200 रु. ऑनलाइन भुगतान किया।
वसूली का एक और उदाहरण..
आरती में बैठने के 3100, चलते-फिरते दर्शन के 2000 रुपए
भास्कर टीम ने मंदिर परिसर में अन्य श्रद्धालुओं से बात कर जाना कि उन्हें आरती में शामिल होने के लिए कितनी रकम खर्च करना पड़ी। रायपुर से आए भावेश कुमार और रांची के मोहित जोशी ने बताया कि उन्हें भस्म आरती का टिकट नहीं मिल पाया था तो रोहित गुरु से संपर्क किया।
रोहित रंग पंचमी के चलते बाहर था, लेकिन उसने सुबह 4 बजे अंवतिका द्वार पहुंचने को कहा था। हमने वहां जाकर निजी सुरक्षाकर्मियों से उसकी बात कराई तो हमें तुरंत VIP की तरह अंदर एंट्री मिल गई। चार बजे आने के बाद भी हमने पूरी भस्म आरती देखी।
भस्म आरती खत्म होने के बाद रोहित ने फोन लगाया और 2000-2000 हजार रुपए की मांग की। रोहित का कहना था कि भस्म आरती के लिए तो कम से कम 3100 रुपए चार्ज देना पड़ता है, लेकिन मैं आप लोगों से 2-2 हजार ही ले रहा हूं।
भास्कर ने देखा- महाकाल मंदिर में आरती के लिए आम लोगों को संघर्ष करना पड़ता है
दरअसल, भस्म आरती में सीमित लोगों को प्रवेश मिलता है। इसके लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन के अलावा VIP कोटा तय किया गया है। VIP कोटे से मंत्री, विधायक, सांसद या अन्य जनप्रतिनिधि अपनी सिफारिश पर 350 लोगों को एंट्री दिला सकते हैं। वहीं मंदिर के पंडित-पुजारी के कोटे से भी 350 लोगों को एंट्री मिल सकती है।
बात करें ऑफलाइन कोटे की तो इससे 300 लोगों को एंट्री मिलती है। इसके लिए मंदिर के गेट नंबर 1 के पास काउंटर बना है। यहां फॉर्म लेने के लिए लंबी लाइन लगती है। काउंटर तो सुबह सात बजे खुलता है, लेकिन लोग रात दस बजे से ही लाइन में खड़े हो जाते हैं। एक फॉर्म पर 5 लोगों को एंट्री मिलती है।
यदि मान लिया जाए कि लाइन में खड़ा हर शख्स 5 लोगों के लिए ही फॉर्म खरीद रहा है तो इस हिसाब से लाइन में खड़े 60 लोगों को फॉर्म देने के बाद बुकिंग फुल हो जाती है। इसके बाद जो बचे हुए लोग होते हैं वो किसी न किसी तरह से भस्म आरती में प्रवेश की कोशिश करते हैं।
महाकाल मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि VIP और पुजारी कोटे में यदि जगह खाली होती है तो दलाल इसी का इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं की एंट्री करवाते हैं। दलालों को इसकी जानकारी कैसे मिलती है? भास्कर ने मंदिर प्रशासक मृणाल मीणा से बात की तो वे बोले- ‘मंदिर में दर्शन करने के लिए तय कोटे की जानकारी गोपनीय है, इसे मीडिया से शेयर नहीं कर सकते। पुलिस, प्रशासन समेत बाकी VIP और पंडित-पुरोहित का कोटा कितना है मैं ये नहीं बता सकता।’
