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सभी EVM के वोटों की VVPAT से मिलान की मांग:SC ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा; फिलहाल 5 EVM का ही मिलान होता है

चुनाव में EVM के सभी वोटों की गिनती वीवीपैट मशीन की पर्चियों से कराने की मांग वाली याचिका पर सोमवार (1 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर अब 17 मई को सुनवाई होगी।

दरअसल, एक्टिविस्ट अरुण कुमार अग्रवाल की ओर से अगस्त 2023 में लगाई गई याचिका में मांग की गई थी कि EVM में पड़े सभी वोटों का मिलान वीवीपैट की पर्चियों से करना चाहिए। फिलहाल निर्वाचन क्षेत्र के रैंडम 5 EVM का ही VVPAT से मिलान होता है।

साथ ही याचिका में कहा गया है कि वोटर्स को VVPAT की पर्ची फिजिकली वेरिफाई करने का मौका दिया जाना चाहिए। वोटर्स को खुद बैलेट बॉक्स में पर्ची डालने की सुविधा मिलनी चाहिए। इससे चुनाव में गड़बड़ी की आशंका खत्म हो जाएगी।

याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने लगभग 24 लाख वीवीपैट खरीदने के लिए 5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन केवल 20,000 वीवीपैट की पर्चियों का ही वेरिफिकेशन होता है।

एक साथ वेरिफिकेशन की भी मांग
याचिका में कहा गया है कि फिलहाल हर निर्वाचन क्षेत्र में एक के बाद 5 EVM का वीवीपैट से मिलान होता है। इन पाचों EVM का मिलान एक साथ नहीं किया जाता, जिससे रिजल्ट घोषित करने में अतिरिक्त समय लगता है। हर क्षेत्र में वोटों के मिलान के लिए अधिकारियों की तैनाती बढ़ानी चाहिए, जिससे 5-6 घंटे में पूरा वेरिफिकेशन हो जाए।

क्या होती है VVPAT मशीन?
वोटर वेरिफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी VVPAT एक मशीन होती है, वोटिंग के समय बताती है कि वोटर ने किसे वोट दिया है। इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (EVM) से कनेक्ट किया जाता है। EVM में वोटर जिस भी पार्टी का बटन दबाता है, उसी पार्टी के चिह्न की पर्ची वोटर को वीवीपैट मशीन में दिखती है। इससे वोटर कंफर्म कर पाता है कि उसने EVM में बटन दबाकर जिस प्रत्याशी को वोट दिया है, असल में वोट उसे ही गया है।

वीवीपैट से निकलने वाली पर्ची सिर्फ वोटर को ही दिखती है। वह 7 सेकेंड तक ही इसे देखकर अपना वोट वेरिफाई कर सकता है। यदि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका होती है तो चुनाव आयोग पर्ची का मिलान करता है।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट में कई बार उठा है मुद्दा
2019 के लोकसभा चुनावों से पहले, 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सभी EVM में से कम से कम 50 प्रतिशत VVPAT मशीनों की पर्चियों से वोटों के मिलान करने की मांग की थी। उस समय, चुनाव आयोग हर निर्वाचन क्षेत्र में सिर्फ एक EVM का VVPAT मशीन से मिलान करता था। 8 अप्रैल, 2019 को सुप्रीम कोर्ट मिलान के लिए EVM की संख्या 1 से बढ़ाकर 5 कर दी थी।

इसके बाद मई 2019 कुछ टेक्नोक्रेट्स ने सभी EVM के VVPAT से वेरिफाई करने की मांग की याचिका लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

इसके अलावा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने भी जुलाई 2023 में वोटों के मिलान की याचिका लगाई थी। इसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- कभी-कभी हम चुनाव निष्पक्षता पर ज्यादा ही संदेह करने लगते है।

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