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पोप फ्रांसिस ने 12 महिला कैदियों के पैर धोए-चूमे:व्हीलचेयर पर बैठकर ईस्टर से पहले की रस्मअदायगी; सांस की बीमारी से परेशान थे, अब स्वस्थ

पोप फ्रांसिस ने रोम की रेबिबिया जेल में महिला कैदियों के पैर धोए और चूमे।

कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने रोम की जेल में बंद 12 महिला कैदियों के पैर धोए और चूमे। पोप ने व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ईस्टर से पहले होने वाली इस रस्म को पूरा किया।

रेबिबिया जेल में महिलाएं एक ऊंचे मंच पर स्टूल पर बैठी थीं, ताकि पोप व्हीलचेयर से आसानी से रस्म को पूरा कर सकें। जब फ्रांसिस ने महिलाओं के पैर धोए तो वे रो पड़ीं। पोप ने उनके पैर पर धीरे से पानी डाला और फिर एक छोटे तौलिये से पोछा। उन्होंने महिलाओं के दोनों पैरों को चूमकर रस्म को पूरा किया।

पोप फ्रांसिस ने ‘पवित्र बृहस्पतिवार’ की प्रार्थना के बाद महिला कैदियों के पैर धोए।

सांस से जुड़ी बीमारी से परेशान थे
रस्म के दौरान पोप ने महिलाओं की ओर मुस्कुराकर देखा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, वो स्वस्थ दिखाई दिए। पिछले कुछ दिनों से वो सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने सेंट पीटर्स बेसिलिका में पवित्र बृहस्पतिवार (Holy Thursday) की प्रार्थना भी करवाई। इसके बाद उन्होंने जेल का दौरा किया और महिला कैदियों के पैर धोए।

दरअसल, गुड फ्राइडे (29 मार्च) से लेकर ईस्टर (31 मार्च) तक पोप का काफी व्यस्त कार्यक्रम है। इस दौरान आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों की शुरुआत गुरुवार (बृहस्पतिवार) को ही हो जाती है।

पोप मे महिला कैदियों के पैर पर पानी डाला, उसे तौलिये से सुखाया फिर पैरों को चूमकर रस्म को पूरा किया।

पोप ने कहा- पाखंड से दूर रहें सभी पादरी
पोप फ्रांसिस ने लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने अपने संबोधन में पादरियों से पाखंड से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने पादरियों से कहा कि वे आम लोगों को जो भी उपदेश देते हैं, उसका पालन उन्हें खुद भी अपने आध्यात्मिक जीवन में करना चाहिए।

पोप फ्रांसिस कार में रोम की रेबिबिया जेल पहुंचे थे। वो काफी खुश स्वस्थ नजर आए।

ईसा मसीह के दोबारा जीवित होने की खुशी में मनाते हैं ईस्टर
ईस्टर ईसाई धर्म के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने की खुशी में ईस्टर पर्व मनाया जाता है। ईसाई धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर चढ़ाया गया था। इसके तीसरे दिन (ईस्टर के दिन) ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, जिसे ईसाई धर्म के लोग ईस्टर संडे के नाम से मनाते हैं।

माना जाता है कि पुनर्जन्म के बाद ईसा मसीह करीब 40 दिन तक अपने शिष्यों के साथ रहे थे। इसके बाद वे हमेशा के लिए स्वर्ग चले गए थे।

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