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बक्सर में किसान-पुलिस में झड़प, फायरिंग:चौसा थर्मल पावर प्लांट गेट पर प्रदर्शन, पुलिस ने घर में घुसकर लाठियों से पीटा; कई किसान-पुलिसकर्मी घायल

झड़प के बाद गांव में घुसकर पुलिस ने किसानों और महिलाओं को पीटा।

बक्सर के चौसा थर्मल पावर प्लांट के गेट पर किसान और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई। पुलिस की गाड़ी फूंक दी गई। पथराव और फायरिंग की गई। इसमें कई किसान घायल हुए हैं। डीएसपी धीरज कुमार, मुफस्सिल थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। डीएम-एसपी कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं।

इसके बाद पुलिस बनारपुर गांव में घुसी। घरों की छत पर चढ़कर पुरुष-महिलाओं को लाठियों से पीटा। इसका वीडियो भी सामने आया है।

किसान जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। इस पर किसानों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इधर, बक्सर डीएम अंशुल अग्रवाल ने कहा कि किसानों में घुसे उपद्रवियों ने कई राउंड फायरिंग की है।

इधर, प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि पिछले 11 दिनों से अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इसमें मुख्य मांग उचित मुआवजा शामिल हैं। बुधवार को जिला प्रशासन पुलिस बल के साथ पहुंचे और किसानों को जबरदस्ती गेट से हटाने का प्रयास किया। इससे प्रदर्शन कर रहे किसान आक्रोशित हो गए।

उपद्रव की तस्वीर देखिए..

ग्रामीणों ने पुलिस पर किया पथराव

पुलिस प्रशासन चौसा पावर प्लांट पहुंचे तो गांवों से ग्रामीण भी पहुंच गए। इस दौरान किसानों ने पुलिस को घेरने का प्रयास करने के साथ साथ पथराव भी किया। किसानों का आरोप है कि झड़प के बाद बनारपुर गांव में पहुंची पुलिस ने घर में तोड़फोड़ किया है। घर में जो मिला, उसकी पिटाई की।

11 दिनों से धरने दे रहे थे किसान

किसानों ने बताया कि 11 दिनों से धरना पर बैठे थे। इस दौरान कंपनी और जिला प्रशासन के साथ कई बार बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इससे किसान अपनी मांगों को लेकर गेट के पास अड़े गए। गेट जाम कर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जनवरी माह में भी प्रदर्शन किया था, तब जिला प्रशासन ने किसानों पर लाठीचार्ज किया था। उसे समय आक्रोशित किसानों ने प्लांट के अंदर आग लगा दी थी, जिसमें प्लांट को करीब 25 करोड़ का नुकसान हुआ था। बता दें कि कंपनी की शिकायत पर हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य बाधित नहीं हो। इसको लेकर किसानों के साथ समन्वय बनाए।

एक दर्जन गांव की ली गई है जमीन

बता दें कि चौसा थर्मल प्लांट से 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। इस प्लांट के लिए एक दर्जन से अधिक गांवों की 1058 एकड़ जमीन ली जा रही है। किसान उचित मुआवजे, परिवार के एक सदस्य की नौकरी, आरएनआर पॉलिसी लागू करने समेत 11 सूत्री मांग कर रहे हैं।

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बक्सर के चौसा थर्मल पावर प्लांट में काम बंद है। प्लांट के निर्माण कार्य में लगे मजदूर 21 सितंबर से अनिश्चीतकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। शनिवार को तीसरे दिन भी प्लांट परिसर में मजदूर काम ठप कर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि फरवरी में निर्माण कार्य पूरा कर ट्रायल शुरू करना है। बता दें कि साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पावर प्लांट की आधारशिला रखी थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

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