DMK सांसद ए राजा ने भारत को एक देश मानने से इनकार किया है। 5 मार्च को उन्होंने कहा कि भारत कभी देश था ही नहीं। एक देश का मतलब होता है, एक भाषा, एक संस्कृति और एक परंपरा। तब उसे देश कहा जाता है। ए राजा ने 3 मार्च को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बर्थडे पर कोयम्बटूर में हुई एक सभा में ये बयान दिया।
राजा की स्पीच की 4 बातें, विवाद संभव
1. भारत देश नहीं है
ए राजा ने कहा, “भारत एक उपमहाद्वीप है। कारण क्या है? यहां कई परंपराएं और संस्कृतियां हैं। तमिलनाडु में एक भाषा-एक संस्कृति हैं। यह एक देश है। मलयालम एक भाषा है, उनका एक राष्ट्र है। ओडिशा एक देश है, वहां एक भाषा है। केरल में अलग, दिल्ली में अलग भाषा और संस्कृति है। ये सारे देश मिलकर भारत को बनाते हैं। इसलिए भारत एक देश नहीं, बल्कि एक उपमहाद्वीप है।”
2. मणिपुर में डॉग मीट खाया जाता है
राजा ने कहा, “मणिपुर में डॉग मीट खाया जाता है, क्यों। हां, वो खाते हैं। ये कल्चर है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ये सब हमारे दिमाग में है। कश्मीर में अलग कल्चर है। इसे आपको मानना होगा। अगर कोई समुदाय बीफ खाता है तो आपको क्या समस्या है? उसने आपको खाने को कहा क्या? अनेकता में एकता है। हम सब अलग हैं। इसे मान लीजिए।”
3. बंदर से की भगवान हनुमान की तुलना
DMK नेता ए राजा वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं कि अगर आप कहेंगे कि ये आपके ईश्वर हैं और भारत माता की जय तो हम उस ईश्वर और भारत माता को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। कह दो इनको, हम सब राम के शत्रु हैं। मुझे रामायण और भगवान राम पर विश्वास नहीं है। राजा ने भगवान हनुमान की तुलना बंदर से करते हुए ‘जय श्री राम’ के नारे को घृणास्पद बताया।
4. वाटर टैंक एक, पर टॉयलेट का पानी किचन में इस्तेमाल नहीं करते
DMK सांसद ने कहा, “वाटर टैंक से पानी किचन में भी आता है और टॉयलेट में भी। किचन में हम वो पानी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन टॉयलेट से लाकर वो पानी किचन में इस्तेमाल नहीं करते। क्या वजह है? हमें मनोवैज्ञानिक समस्या है। पानी एक ही है, पर अंतर पैदा कर देता है, ये बात कि ये कहां से आ रही है। हम जानते हैं कि ये किचन है और ये टॉयलेट है।”
BJP बोली- क्या DMK किसी और धर्म का अपमान कर सकती है?
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि DMK नेता बोलते हैं कि हम ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इससे सहमत हैं? क्या DMK अन्य धर्मों के देवताओं के खिलाफ ऐसी अपमानजनक टिप्पणियों का इस्तेमाल करेगी?
