लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति का बेटा गिरफ्तार:VIDEO बनाने पर भड़का; पिता की बचाने की कोशिशें नाकाम, नकली ड्राइवर तक पेश किया
कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाले अरबपति कारोबारी का बेटा आखिरकार गिरफ्तार हो गया। DCP अतुल श्रीवास्तव ने कहा, “ लेम्बोर्गिनी केस में आरोपी शिवम मिश्रा को गुरुवार सुबह घर के सामने से गिरफ्तार किया गया।”
पुलिस ने उसका मेडिकल कराया और AJCM कोर्ट लेकर पहुंचीं। कोर्ट के बाहर वीडियो बनाने पर शिवम मीडियाकर्मी पर भड़क गया। इशारों में कहा- वीडियो क्यों बना रहे हो। दरोगा दिनेश कुमार ने कोर्ट में बताया- शिवम ने जांच में सहयोग नहीं किया। गुरुवार को सूचना मिली कि आरोपी एंबुलेंस से भाग रहा। खुद को छिपाए रखने के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है।
कोर्ट में पेशी के दौरान शिवम बीमार नजर आया। हाथ में वीगो लगी है। पुलिसवाले और रिश्तेदार उसे सहारा देते नजर आए। शिवम के साथ दिल्ली के एक फैमिली डॉक्टर भी हैं। कोर्ट के बाहर वीडियो बनाने पर शिवम मीडियाकर्मी पर भड़क गया। इशारों में कहा- वीडियो क्यों बना रहे हो।
तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे को बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नाकाम रहे। 8 फरवरी को हादसे के तुरंत बाद पहले घटनास्थल से बेटे को हटवाया। फिर मीडिया से बातचीत में दावा किया- मेरा बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था।
यही नहीं, मामले ने जब तूल पकड़ा तो सीएम योगी ने अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल सामने आए। कहा- गाड़ी कारोबारी का बेटा शिवम ही चला रहा था। जांच में इसकी पुष्टि हुई। कमिश्नर के इस बयान पर कारोबारी भड़क गए। कहा- कानपुर कमिश्नर झूठ बोल रहे हैं।
फिर कल बुधवार को कानपुर कोर्ट में मोहन नाम का शख्स सरेंडर करने पहुंचा। उसने दावा किया कि हादसे के वक्त लेम्बोर्गिनी कार वह खुद चला रहा था। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी और उसे लेम्बोर्गिनी केस में आरोपी नहीं माना।
5 पॉइंट में अब तक का पूरा मामला पढ़िए…
1- हादसे के बाद पुलिस ने अज्ञात के नाम दर्ज की FIR कानपुर में वीआईपी रोड इलाके पर 8 फरवरी को करीब 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को टक्कर मार दी थी। कार आर्यनगर में रहने वाले कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। हादसे के बाद पुलिस कार को थाने ले आई। कवर से ढक दिया।
पहले तो पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। मामला सुर्खियों में आया तो 6 घंटे बाद रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात ड्राइवर के खिलाफ FIR दर्ज की। बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस मामले को तूल दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले में कार्रवाई के आदेश दिए। पुलिस ने 24 घंटे बाद शिवम का नाम FIR में जोड़ा।
2- कमिश्नर के दावे पर कारोबारी ने कहा- झूठ बोल रहे हैं 10 फरवरी को कारोबारी केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे। दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई।
3- FIR कराने वाले से समझौते की खबर आई, पुलिस ने नकारा 11 फरवरी को इस केस में बड़ा यू-टर्न हुआ। हादसे में घायल और FIR कराने वाले मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया। कारोबारी के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया, उसमें तौसीफ की ओर से कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया। वह पूरी तरह संतुष्ट है और कोई कार्रवाई नहीं चाहता।
पीड़ित ने यह भी दावा किया कि हादसे के वक्त गाड़ी मोहन ही चला रहा था। हालांकि, DCP अतुल कुमार ने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं मिला है।
4- अचानक ड्राइवर बनकर युवक कोर्ट पहुंचा, बोला- कार मैं ही चला रहा था 11 फरवरी की ही दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की ओर से ड्राइवर मोहन अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। मोहन ने कहा- शिवम मिश्रा की गाड़ी वही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। तभी हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो कार से निकल गया था।
5- कोर्ट ने ड्राइवर की याचिका खारिज की, आरोपी नहीं माना हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर की अर्जी खारिज कर दी। उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा- पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कोर्ट में जब मोहन से मीडिया ने पूछा कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने बताया कि 9 गियर होते हैं। जबकि एक्सपर्ट से बात करने पर सामने आया कि कार में 7 गियर और एक बैक गियर, यानी कुल 8 गियर होते हैं।
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लाइव अपडेट्स
पुलिस बोली- शिवम मिश्रा एंबुलेंस से भाग रहा था, तभी अरेस्ट किया
लेम्बोर्गिनी केस की जांच कर रहे दिनेश कुमार ने कोर्ट में बताया- 11 फरवरी को पुलिस आरोपी शिवम मिश्रा को पूछताछ के लिए नोटिस देने गई थी, लेकिन उसने और उसके परिजनों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। जांच में सहयोग नहीं किया। उनका कहना था कि घटना से उनका कोई संबंध नहीं है, जिसके बाद पुलिस लौट आई।
गुरुवार को सूचना मिली कि आरोपी शिवम मिश्रा एंबुलेंस से भाग रहा था। जांच में सहयोग न करने और लगातार खुद को छिपाए रखने के आधार पर गुरुवार सुबह 8:50 बजे उसे बरगलिया चौराहे से गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में 14 दिन की कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल की है। आरोपी शिवम के वकील नरेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया- कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। अब आदेश का इंतजार है।
डमी ड्राइवर से भड़की पुलिस
पुलिस सूत्रों की मानें तो शिवम की ओर से 11 फरवरी को कोर्ट में मोहन नाम के डमी ड्राइवर को पेश किया गया था। मोहन ने बताया कि वह हादसे के दौरान खुद गाड़ी चला रहा था। इस बात से पुलिस भड़क गई और अगले ही दिन यानी आज घर के पास से शिवम को अरेस्ट कर लिया।
एक्सपर्ट बोले- जमानतीय धारा लगी, कोर्ट से छूट सकता है शिवम
कानूनी जानकारों की मानें तो जमानतीय धारा होने के चलते कोर्ट रिमांड को मना कर सकती है। अगर रिमांड मना हुई तो आरोपी शिवम को कोर्ट से ही छोड़ दिया जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ अगर रिमांड स्वीकार होती है तो बेल एप्लिकेशन पर सुनवाई के बाद कोर्ट से जमानत दी जा सकती है। फिलहाल अब कोर्ट के फैसले का इंतजार है।
सुनवाई पर बार अध्यक्ष ने नाराजगी जताई, अपडेट दे रहे रिपोर्टर दिलीप सिंह
आरोपी को VIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा- कानपुर बार एसोसिएशन अध्यक्ष
कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष इंदीवर बाजपेयी ने कहा- आरोपी को कोर्ट में VIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। उसे कोर्ट में कुर्सी पर बैठाया गया। हड़ताल के चलते कानपुर की सभी कोर्ट में जब सुनवाई टल गई है, तो इस हाईप्रोफाइल केस में कैसे होगी।
कानपुर कोर्ट से अपडेट दे रहे हैं रिपोर्टर दिलीप सिंह
वीडियो बनाने पर भड़का आरोपी शिवम, देखें VIDEO
कोर्ट परिसर में आरोपी कुर्सी पर बैठा था, तभी मीडियाकर्मी उसका वीडियो बनाने लगे। यह देखकर वह भड़क गया। इशारों में कहा कि वीडियो मत बनाओ।
DCP बोले- आरोपी को कोर्ट में पेश किया
DCP सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया- सूचना मिली थी कि शिवम किसी काम से कानपुर आया है। सूचना पर पुलिस एक्टिव हुई और उसे गिरफ्तार कर लिया। शिवम की तलाश में 5 टीमें लगी थीं। शिवम को कोर्ट में पेश किया गया। आगे की कार्रवाई की जा रही है।
वकील ने कहा- पुलिस ने गलत तरीके से गिरफ्तार किया
शिवम मिश्रा के वकील नरेंद्र कुमार यादव ने कहा- पुलिस ने उसे (शिवम मिश्रा) गलत तरीके से गिरफ्तार किया है। वह कार नहीं चला रहे थे।”
पुलिस बोली- आरोपी को घर के सामने से अरेस्ट किया
आरोपी शिवम को आर्यनगर में घर के सामने स्थित परशुराम वाटिका पार्क से ग्वालटोली थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसका मेडिकल कराने के बाद AJCM कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान आरोपी बीमार नजर आया। पुलिसवाले उसे सहारा देते नजर आए।
किन सबूतों और गवाहों के आधार पर ड्राइवर की याचिका खारिज हुई
1. हादसा का वीडियो पुलिस ने अपनी जांच में हादसे के बाद का एक वीडियो शामिल किया। इसमें हादसे के बाद लेम्बोर्गिनी के पीछे चल रही दूसरी कार से बाउंसर निकलते हैं। ईंट से लेम्बोर्गिनी का शीशा तोड़कर गेट खोलते हैं। फिर लेम्बोर्गिनी की ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकालते हैं और उसे दूसरी गाड़ी से लेकर अस्पताल चले जाते हैं।
पुलिस का दावा किया था कि शिवम को ड्राइविंग सीट से निकालते साफ देखा जा सकता है। वीडियो देखने से साफ होता है कि गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति था ही नहीं। इस वजह से ईंट से शीशा तोड़ना पड़ा। तब कार का दरवाजा खोलकर शिवम को बाहर निकाला जा सका था।
2. 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पुलिस की जांच रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा सबूत प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं। जांच कर रहे दरोगा दिनेश सिंह ने 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। इन सबने बताया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था।
हादसे के बाद शिवम को बाउंसर कार से निकालकर ले गए। ड्राइवर के गाड़ी चलाने या कार में किसी दूसरे व्यक्ति के मौजूद होने की बात को सभी प्रत्यक्षदर्शियों ने खारिज कर दी थी। पुलिस ने इन सभी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अपनी जांच रिपोर्ट में दर्ज किए।
3. शिवम की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर मिली पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में बतौर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिवम की मोबाइल लोकेशन को भी शामिल किया। हादसे के दौरान शिवम की मोबाइल लोकेशन भी VIP रोड पर हादसे वाली जगह पर ही थी।
4. CCTV में कैद हुई है पूरी घटना पुलिस ने जांच रिपोर्ट में CCTV फुटेज भी शामिल किया। नगर निगम से मिले CCTV में पूरा हादसा कैद हुआ था। इस फुटेज से भी साफ है कि गाड़ी में कोई ड्राइवर नहीं था, सिर्फ एक व्यक्ति ही मौजूद था।
5. वादी ने शिवम को पहचाना था पुलिस ने हादसे की FIR दर्ज कराने वाले चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक के बयान दर्ज किए थे। उसने बताया था कि लेम्बोर्गिनी में सिर्फ एक ही व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर था। वीडियो देखकर तस्दीक किया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। वादी का बयान भी किसी केस में सबसे अहम माना जाता है।
