दिल्ली की साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर द्वारा दायर 25 साल पुराने आपराधिक मानहानि मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना को बरी कर दिया। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। मामला 10 नवंबर 2000 को प्रकाशित एक विज्ञापन से जुड़ा था, जिसमें नर्मदा बचाओ आंदोलन की आलोचना और सरदार सरोवर परियोजना का समर्थन किया गया था।
दोनों के बीच यह आपसी कानूनी विवाद का मामला रहा है। 2006 में सक्सेना ने पाटकर पर टीवी कार्यक्रम से जुड़े बयान को लेकर मानहानि केस किया था, जिसमें पहले सजा हुई थी, लेकिन 24 जनवरी 2026 को साकेत कोर्ट ने सबूतों के अभाव में मेधा पाटकर को बरी कर दिया।
