Headlines

पार्टी में मतभेदों के बीच थरूर खड़गे-राहुल से मिले:कहा- सब साथ मिलकर काम कर रहे, केरल चुनाव की मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे

पार्टी में मतभेदों के बीच थरूर खड़गे-राहुल से मिले:कहा- सब साथ मिलकर काम कर रहे, केरल चुनाव की मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे

नई दिल्ली6 घंटे पहले
खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शशि थरूर ने ये तस्वीर शेयर की है।

कांग्रेस में पार्टी हाईकमान से मतभेद की खबरों के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की। तीनों के बीच बैठक संसद में खड़गे के कार्यालय में हुई।

मुलाकात के बाद थरूर ने कहा कि मेरी पार्टी के दोनों नेताओं से बातचीत हुई। सब ठीक है। हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच कुछ मतभेद सामने आए थे। हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर AICC की एक बैठक हुई थी, जिसमें थरूर शामिल नहीं हुए थे।

वहीं केरल का CM बनने के सवाल पर थरूर ने कहा कि मेरी इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।

राहुल ने कोच्चि में थरूर को नजरअंदाज किया था

पीटीआई के अनुसार 19 जनवरी को कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कई वरिष्ठ नेताओं का नाम लिया, लेकिन शशि थरूर को नजरअंदाज कर दिया था।

थरूर के करीबी सूत्रों के मुताबिक यह घटना उनके लिए टिपिंग पॉइंट साबित हुई। इससे पहले भी राज्य के कुछ नेता उन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश कर चुके हैं, जिससे वह असहज महसूस कर रहे थे।

थरूर के पिछले 6 बयान जो चर्चा में रहे…

24 जनवरी: थरूर बोले-कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का विरोध नहीं किया:केवल ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर असहमति थी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने पार्लियामेंट में कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का कभी भी विरोध नहीं किया। एकमात्र मुद्दा ऑपरेशन सिंदूर था, जिस पर सिद्धांत के आधार पर मेरा स्टैंड अलग था।

9 जनवरी: नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए उन्हें गलत ठहराना सही नहीं

केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में 9 जनवरी को शशि थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले दोषी ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है।

1 जनवरी: शशि थरूर बोले- मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका

केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में कहा कि मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका। मेरा सवाल है, किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ दी। जब मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की तो पार्टी और मैं एक ही लाइन पर खड़े थे।

27 दिसंबर- प्रधानमंत्री का हारना भारत के हारने जैसा

विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, भारत की होती है। अगर राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह भारत की हार की खुशी मना रहा होता है। भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए

25 दिसंबर- अवैध प्रवासियों पर सरकार का एक्शन सही

देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों (अवैध प्रवासियों) के खिलाफ सरकार के एक्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को ठीक से संभालना सरकार की

4 नवंबर- भारत में पॉलिटिक्स फैमिली बिजनेस

भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए एक लेख में कहा था- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Budget 2024