हरियाणा BJP के अंदर UGC एक्ट का विरोध:झज्जर में नेता ने पार्टी छोड़ी, योगेश्वर-विजेंदर नाराज; यमुनानगर विधायक के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ी
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) के नए नियमों का हरियाणा में भी विरोध शुरू हो गया है। BJP नेता व ओलिंपियन रेसलर योगेश्वर दत्त ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से दो दिन में 3 पोस्ट कर इस एक्ट पर विरोध दर्ज कराया।
योगेश्वर ने लिखा- “भरी सभा में द्रौपदी चीरहरण के समय बड़े-बड़े योद्धाओं ने चुप्पी साधी। जिस सत्ता-कुर्सी के लालच में यह किया, न वह सत्ता रही, न कुर्सी। सभी का सर्वनाश हो गया।”
वहीं, ओलिंपियन बॉक्सर और भाजपा नेता विजेंदर सिंह ने X पर लिखा- “शिक्षा समान अवसर का माध्यम होनी चाहिए, न कि समाज को बांटने का।”
उधर, नए नियमों के विरोध में मंगलवार को झज्जर में छारा मंडल की महिला मोर्चे की अध्यक्ष मनीषा शर्मा ने इस्तीफा दे दिया। मनीषा शर्मा खरहर गांव में पंचायत में वार्ड 10 से मेंबर भी हैं।
बुधवार को यमुनानगर में सवर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। लोगों ने भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा के आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद उनके कार्यालय में जाकर ज्ञापन सौंपा।
अब जानिए योगेश्वर दत्त की तीनों पोस्ट में क्या…
- बच्चों के भविष्य की चिंता: योगेश्वर दत्त ने पहली पोस्ट में लिखा – “अगर आप अपने परिवार, अपने बच्चों के लिए लड़ नहीं सकते, उनके भविष्य के लिए चिंतित नहीं हो सकते, तो फिर आपके इस जीवन का कोई मायने नहीं है।”
- गलत दिशा में जाएगा देश: दूसरी पोस्ट में लिखा- “पूरे देश में सभी वर्ग, जाति और सामाजिक समानता को संविधान द्वारा सुरक्षा दी जाती है। मौलिक समानता का अधिकार हम सभी भारतवासियों का है। किशोरावस्था की शुरुआत में ही शिक्षा के स्तर पर भविष्य के नागरिकों का जीवन बिना सुनवाई और समानता के अंधकारमय कर देना इस देश को गर्त में ले जाएगा। पहले ही यह देश भूतकाल के कुछ गलत फैसलों की सजा भुगत रहा है, और वर्तमान में UGC द्वारा आपसी बंटवारे की खाई को और गहराता बिल संवेदनशील मुद्दों पर निश्चित ही हमारे देश को गलत दिशा में ले जाएगा।”
- अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का जिक्र: योगेश्वर ने अपनी तीसरी पोस्ट में लिखा – “विभीषण के अर्थ की बात करें तो इसका मतलब होता है जिसे कभी गुस्सा न आता हो। इन सबके बावजूद लोग अपने बच्चे का नाम विभीषण नहीं रखते, क्योंकि वह अपने जन्मकुल का द्रोही था। भरी सभा में द्रौपदी चीरहरण के समय बड़े-बड़े योद्धाओं ने चुप्पी साधी। जिस सत्ता-कुर्सी के लालच में यह किया, न वह सत्ता रही, न कुर्सी। सर्वनाश हो गया सभी का। एक दिन सभी को काल के गाल में जाना है। कोई अजर-अमर होकर नहीं आया। इसीलिए अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है। समय रहते नहीं संभले तो इतिहास में भी स्थान नहीं मिलेगा और कोई भविष्य ही नहीं होगा। सही समय पर क्रोध करना भी आवश्यक है।”
योगेश्वर दत्त की 2 पोस्ट…
योगेश्वर दत्त को एक्ट से 2 ऐतराज
- सुनवाई कमेटी में सवर्ण शामिल नहीं होना: योगेश्वर दत्त ने दैनिक भास्कर एप से बातचीत में कहा कि एक्ट में कहा गया है कि अगर किसी छात्र के खिलाफ शिकायत होती है तो उसकी सुनवाई के लिए बनी कमेटी में सवर्ण सदस्य नहीं होगा, जो कि गलत है। संबंधित वर्ग के जांच कमेटी सदस्यों से न्याय की उम्मीद नहीं हो सकती।
- झूठी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं: अगर किसी शिकायतकर्ता की शिकायत जांच में झूठी पाई जाती है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। दत्त के अनुसार ऐसे में इस एक्ट का दुरुपयोग बढ़ जाएगा। छात्रों में आपसी द्वेष बढ़ जाएगा। समाजों के बीच खाई बढ़ाने का काम ऐसे फैसले करेंगे। कॉलेज-यूनिवर्सिटियों में खिलाड़ी एक साथ खेलते हैं। वहां ऐसे झूठे मामले दर्ज करवा कर खिलाड़ियों का करियर खत्म किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर सपोर्ट के साथ ट्रोलिंग भी सोशल मीडिया पर योगेश्वर दत्त की पोस्ट को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। सवर्ण समुदाय से जुड़े यूजर भाजपा से होने के बावजूद UGC एक्ट के विरोध का सपोर्ट करने के लिए उनका बड़ा कदम बता रहे हैं। वहीं, किसान आंदोलन व पहलवान आंदोलन से जुड़े लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं।
योगेश्वर की पोस्टों पर ऐसे कमेंट्स आ रहे…
विजेंद्र सिंह बोले- जातिगत वर्गीकरण में मत बांटिए भिवानी के रहने वाले ओलिंपियन बॉक्सर विजेंदर सिंह ने अपनी X पोस्ट में लिखा – “शिक्षा समान अवसर का माध्यम है, जातिगत विभाजन का नहीं। UGC का छात्रों को वर्गों में बांटने वाला यह निर्णय देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है। कक्षा में बैठा युवा ही देश का भविष्य है, कृपया इसे जातिगत वर्गीकरण में मत बांटिए। शिक्षा का मूल उद्देश्य अवसर प्रदान करना है। UGC को फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेना चाहिए।”
शर्मा बोलीं- शैक्षणिक असमानता बढ़ेगी भाजपा की कार्यकर्ता मनीषा शर्मा ने यूजीसी एक्ट-2026 के विरोध में पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मनीषा हरियाणा में झज्जर के खरहर गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि इस नए यूजीसी एक्ट से शैक्षणिक असमानता बढ़ेगी और संविधान के अनुच्छेद 14 (समान नागरिकता का अधिकार) का उल्लंघन होगा, इसलिए उन्होंने संविधान और शिक्षा के हित में यह निर्णय लिया है। उनका यह कदम निजी कारणों से नहीं, बल्कि नीति और सिद्धांतों पर आधारित विरोध के रूप में है।
