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बद्रीनाथ-केदारनाथ में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की तैयारी:उत्तराखंड के 48 और मंदिरों में भी नहीं जा सकेंगे; सिख-बौद्ध-जैन पर रोक नहीं

बद्रीनाथ-केदारनाथ में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की तैयारी:उत्तराखंड के 48 और मंदिरों में भी नहीं जा सकेंगे; सिख-बौद्ध-जैन पर रोक नहीं

चमोली4 घंटे पहले
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे खोले जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा महाशिवरात्रि पर की जाएगी।

उत्तराखंड के चारधाम बद्रीनाथ,केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत 50 मंदिरों में जल्द गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लग सकता है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC), गंगोत्री और यमुनोत्री धाम मंदिर समिति की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर सरकार में सहमति बन गई है। यह प्रतिबंध सिख, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों पर लागू नहीं होगा।

चारधाम के अलावा मंदिर समितियों के अधीन आने वाले 46 अन्य मंदिरों के लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। वहीं, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में तीर्थ पुरोहितों की आस्था को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की बात कही है।

BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने दैनिक भास्कर को बताया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ समेत मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इस बैठक में तीर्थ पुरोहित और धर्माधिकारी भी शामिल होंगे।

यमुनोत्री मंदिर समिति की बैठक में बनी सहमति

इससे पहले गंगोत्री मंदिर समिति ने रविवार को बैठक में सर्वसम्मति से गंगोत्री धाम में मंदिर और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर सहमति बनाई। मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि सिख धर्म के अनुयायी हिंदू धर्म की ही एक शाखा माने जाते हैं, इसलिए उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

वहीं, यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन को लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया है। मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि इसे जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि हिंदू धर्म की शाखाओं में आने वाले अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

गैर-हिंदू की परिभाषा क्या है?

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ किया कि गैर-हिंदू से मतलब उन लोगों से है, जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन परंपरा में विश्वास रखते हैं, उनके लिए केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम खुले रहेंगे।

सीएम बोले- पहले से बने कानूनों का अध्ययन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धामों के संचालन से जुड़े धार्मिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों और संत समाज की राय के आधार पर ही सरकार आगे फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि इन स्थलों के लिए पहले से बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

2025 में केदारनाथ और बद्रीनाथ में कितने श्रद्धालु पहुंचे?

केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी वजह से एंट्री बैन से जुड़ा कोई भी कदम सीधे यात्रियों पर असर डाल सकता है।

2025 के यात्रा सीजन में रिपोर्ट के मुताबिक केदारनाथ धाम में 16,56,539 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि बद्रीनाथ धाम में करीब 16.5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों धामों से जुड़ा कोई भी फैसला सिर्फ उत्तराखंड नहीं, पूरे देश के यात्रियों से जुड़ा मुद्दा बन जाता है।

केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति किस कानून के तहत बनी है?

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939 के तहत किया गया था। यह कानून मंदिरों के बेहतर प्रशासन और प्रबंधन के लिए बनाया गया था।

इस अधिनियम में समिति की संरचना, उसके अधिकार, मंदिर संचालन, व्यवस्था बनाए रखने और नियम बनाने से जुड़ी बातें तय की गई हैं। यानी समिति के पास मंदिरों के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर निर्णय लेने का अधिकार इसी कानून के तहत आता है।

क्या प्रस्ताव पास होते ही गैर-हिंदुओं की एंट्री तुरंत रोकी जा सकती है?

1939 के अधिनियम में समिति को बायलॉज बनाने का अधिकार दिया गया है, जिनके जरिए मंदिर के अंदर व्यवस्था, संचालन और प्रवेश से जुड़े नियम तय किए जा सकते हैं।

लेकिन इस अधिनियम में यह भी स्पष्ट है कि बायलॉज प्रभावी करने के लिए उन्हें निर्धारित तरीके से प्रकाशित करना और राज्य सरकार से पुष्टि जैसी प्रक्रिया अहम हो जाती है। इसलिए केवल प्रस्ताव पास होना ही आखिरी कदम नहीं माना जाएगा, बल्कि उसके बाद यह देखना होगा कि नियम किस प्रक्रिया से लागू किया जाता है।

देशभर से आने वाले यात्रियों के लिए इसका मतलब क्या है?

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बिहार समेत पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बहुत से लोग महीनेभर पहले ट्रेन-फ्लाइट टिकट, होटल और यात्रा की योजना बनाते हैं। ऐसे में गैर-हिंदू एंट्री बैन की बात सामने आने के बाद यात्रियों में असमंजस बढ़ना स्वाभाविक है।

फिलहाल स्थिति यही है कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव आना बाकी है। इसलिए यात्रियों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि प्रस्ताव पास होने के बाद इसे किस रूप में लागू किया जाता है और प्रशासनिक तौर पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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