राजस्थान में 26 जनवरी से पहले 9500kg विस्फोटक पकड़ा:अमोनियम नाइट्रेट खेत में रखा था, 1 अरेस्ट; दिल्ली ब्लास्ट में इसी का इस्तेमाल हुआ था
राजस्थान के नागौर में पुलिस ने 26 जनवरी से पहले एक खेत से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया है। थांवला थाना इलाके के हरसौर गांव में शनिवार रात पुलिस ने दबिश दी। यहां 187 कट्टों (बोरियों) में 9,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट रखा मिला।
नागौर एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया कि मौके से सुलेमान खान (50) को गिरफ्तार किया गया है। वह हरसौर का रहने वाला है और उस पर पहले से 3 केस दर्ज हैं।
दरअसल अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में भी किया गया था। इससे एक दिन पहले, 9 नवंबर को आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी छापेमारी में करीब 3 हजार किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया था।
केंद्रीय एजेंसियां भी करेगी पूछताछ एसपी ने बताया कि अभी तक की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी वैध-अवैध माइनिंग करने वालों को विस्फोटक बेचता था। हालांकि विस्फोटक मिलने की सूचना केंद्रीय एजेंसियों को भी दी गई है। वे भी सुलेमान से आकर पूछताछ करेंगी।
डेटोनेटर और फ्यूज वायर भी मिले एसपी ने बताया मौके से करीब 9550 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया है, जिसे 187 कट्टों में भरकर रखा गया था। बरामद किए गए सामान में अमोनियम नाइट्रेट के अलावा भारी मात्रा में डेटोनेटर और फ्यूज वायर भी शामिल है।
पुलिस ने मौके से 9 कार्टून डेटोनेटर, 12 कार्टून और 15 बंडल नीली बत्ती वायर, 12 कार्टून और 5 बंडल लाल बत्ती वायर जब्त किए हैं। फिलहाल पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
दिल्ली में भी अमोनियम नाइट्रेट से धमाका किया गया था
दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए बम धमाके में अमोनियम नाइट्रेट से बने बम का इस्तेमाल किया गया था। इसमें 15 लोगों की मौत हुई थी।
इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद के धौज गांव में 9 नवंबर को पुलवामा के रहने वाले डॉ. मुज्जमिल शकील के घर छापा मारा। उसके कमरे से 360 किलो विस्फोटक और एक असॉल्ट राइफल मिली थी। यहां से 4 किमी दूर फतेहपुर तगा गांव से एक मौलाना के घर से 2,563 किलो संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया था।
अमोनियम नाइट्रेट से खतरनाक बम बनाए जाते हैं
अमोनियम नाइट्रेट यानी AN का केमिकल फॉर्मूला NH4NO3 है। ये एक गंधहीन, सफेद दानेदार केमिकल होता है। जर्मन केमिस्ट जोहन रुडॉल्फ ग्लॉबर ने 17वीं सदी में इसे सबसे पहले तैयार किया था।
सिंथेटिक अमोनियम नाइट्रेट बनाने के लिए अमोनिया और नाइट्रिक एसिड का रिएक्शन करवाया जाता है। 20वीं सदी में इसका औद्योगिक स्तर पर उत्पादन होने लगा। आज दुनियाभर के कई देशों में इंडस्ट्रियल यूज के लिए इसे बनाया जाता है।
चोट वगैरह लगने पर सिंकाई के काम में आने वाले इंस्टेंट आइस पैक, केमिकल इंडस्ट्री और सबसे ज्यादा फर्टिलाइजर यानी खाद बनाने में इसका यूज होता है। दुनिया भर में नाइट्रेट बेस्ड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल सबसे आम है।
AN खुद में कोई विस्फोटक नहीं है, लेकिन अगर इसे डीजल या किसी दूसरे फ्यूल से मिला दिया जाए, तो ये खतरनाक बम में बदल जाता है।
अमोनियम नाइट्रेट से बना बम तबाही मचा सकता है
अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट से बड़ा गड्ढा हो जाता है। विस्फोट की स्पीड 14 हजार किमी प्रति घंटा तक होती है। इससे जो वेव्स पैदा होती हैं, वो साउंड वेव से करीब 5 गुना ज्यादा तेज होती हैं। इससे कान और फेफड़े तुरंत खराब हो सकते हैं।
साथ ही ये विस्फोट शीशे, लोहे और ईंटें टुकड़ों में उड़कर लोगों को चीर-फाड़ सकता है। विस्फोट के बाद आग, इमारतों का टूटना और जहरीली गैसें भी हवा में फैल सकती हैं। अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट और आग से नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और अमोनिया जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जो सांस की तकलीफ और जलन पैदा कर सकती हैं।
1 किलो ANFO को 0.8 किलो TNT के बराबर विस्फोटक क्षमता का माना जाता है। इससे 5-7 मीटर व्यास का गड्ढा हो सकता है। विस्फोट का दायरा करीब 30 मीटर तक होता है। अगर भीड़ के बीच धमाका हो, तो दर्जनों लोगों की जान जा सकती है। सिर्फ 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट 1 किलोमीटर तक असर कर सकता है। ये धमाका इतना तेज होता है कि 50-70 मीटर तक सब कुछ तबाह हो जाता है।
विस्फोटक की मात्रा और जहां धमाका हुआ, वहां मौजूद लोगों की संख्या के अनुसार तबाही बढ़ सकती है।
उदाहरण के लिए 1995 में अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में करीब 1800 किलो यानी 1 टन के ANFO विस्फोटक से धमाका हुआ, इसमें बिल्डिंग में मौजूद 168 लोगों की मौत हो गई। लगभग 3000 किलो अमोनियम नाइट्रेट का धमाका एक पूरी बड़ी इमारत या पूरा मोहल्ला उड़ा सकता है। 50–70 मीटर के अंदर सब कुछ समतल हो जाएगा। 500–600 मीटर तक खिड़कियां चकनाचूर हो सकती हैं। लोग 200–300 मीटर दूर तक उड़ते कांच और मलबे से घायल या मारे जा सकते हैं। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी जाएगी।
