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थरूर बोले-कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का विरोध नहीं किया:केवल ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर असहमति थी, इसके लिए माफी नहीं मांगूंगा

थरूर बोले-कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का विरोध नहीं किया:केवल ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर असहमति थी, इसके लिए माफी नहीं मांगूंगा

तिरुवनंतपुरम1 घंटे पहले
तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कोझिकोड के केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी बात रखी।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने पार्लियामेंट में कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का कभी भी विरोध नहीं किया। एकमात्र मुद्दा ऑपरेशन सिंदूर था, जिस पर सिद्धांत के आधार पर मेरा स्टैंड अलग था।

थरूर ने कहा- इस मामले पर मैंने बहुत मजबूत स्टैंड लिया था। मैं इसके लिए कोई माफी नहीं मांगूंगा। पहलगाम की घटना के बाद, मैंने खुद इंडियन एक्सप्रेस में एक कॉलम लिखा था। मैंने इसमें कहा था कि ऐसी घटना को बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता और इसका जवाब देना जरूरी है।

तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने यह बातें शनिवार को कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान कहीं। वह वहां दर्शकों के सवालों का जवाब दे रहे थे।

थरूर की स्पीच की 4 बड़ी बातें…

  • ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर कड़े रुख का कोई पछतावा नहीं है। भारत को विकास पर ध्यान देना चाहिए और पाकिस्तान के साथ लंबे संघर्ष में नहीं उलझना चाहिए।
  • किसी भी कार्रवाई को आतंकवादी शिविरों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। मुझे हैरानी हुई कि भारत सरकार ने वही किया, जैसा मैंने सुझाया था।
  • जवाहरलाल नेहरू ने कहा था अगर भारत मर जाता है, तो कौन जीवित रहेगा? उनका कहना था कि जब देश की सुरक्षा और दुनिया में उनकी स्थिति का सवाल हो, तो भारत सबसे पहले आता है।
  • राजनीतिक दलों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित में सिर्फ भारत को ही जीतना चाहिए।

पार्टी मीटिंग में नहीं जाने पर कहा- दिल्ली से कोझिकोड वापस आना आसान नहीं

शशि थरूर ने पार्टी मीटिंग में नहीं जाने पर मीडिया से कहा, ‘मैं जो कहना चाहता था, वह मैंने पार्टी लीडरशिप को बता दिया है। यह सही नहीं है कि मैं इस बारे में पब्लिक में बात करूं।’

उन्होंने कहा- मीडिया कई बातें कह सकता है, कुछ सही हो सकती हैं, कुछ गलत हो सकती हैं। मैंने पहले ही पार्टी लीडरशिप को बता दिया था कि मैं इसमें शामिल नहीं हो पाऊंगा। अब इसे कैंसिल करना मुमकिन नहीं है और दिल्ली से कोझिकोड वापस आना आसान नहीं है।

थरूर के पिछले 5 बयान जो चर्चा में रहे…

9 जनवरी: नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन हर समस्या के लिए उन्हें गलत ठहराना सही नहीं

केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में 9 जनवरी को शशि थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले दोषी ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है।

1 जनवरी: शशि थरूर बोले- मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका

केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में कहा कि मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका। मेरा सवाल है, किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ दी। जब मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की तो पार्टी और मैं एक ही लाइन पर खड़े थे।

27 दिसंबर- प्रधानमंत्री का हारना भारत के हारने जैसा

विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, भारत की होती है। अगर राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह भारत की हार की खुशी मना रहा होता है। भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

25 दिसंबर- अवैध प्रवासियों पर सरकार का एक्शन सही

देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों (अवैध प्रवासियों) के खिलाफ सरकार के एक्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को ठीक से संभालना सरकार की जिम्मेदारी है।

4 नवंबर- भारत में पॉलिटिक्स फैमिली बिजनेस

भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए एक लेख में कहा था- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सक

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