हिसार के पर्वतारोही का वर्ल्ड रिकॉर्ड:यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर बिना ऑक्सीजन 24 घंटे बिताए, 8 साल की मेहनत
हरियाणा के पर्वतारोही ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे बिता दिए। हिसार के गांव मलापुर के रोहताश खिलेरी ने 18,510 फीट की ऊंचाई पर बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के लगातार 24 घंटे बिताने के बाद खुद वीडियो शूट किया।
रोहताश ने दावा किया कि यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है और वह ऐसा कारनामा करने वाले दुनिया के पहले इंसान हैं। वह 8 साल से पर्वतारोहण कर रहे हैं।
20 जनवरी को रोहताश जब माउंट एल्ब्रुस पर्वत पर थे, तब वहां का तापमान -40°C से -50°C तक था। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। बता दें कि रोहताश के पिता सुभाष चंद्र किसान हैं जबकि माता बंसी देवी गृहिणी हैं।
8 साल का कड़ा संघर्ष और 2 उंगलियों की कुर्बानी रोहताश ने सोशल मीडिया पर अपने एक्सप्रेशन शेयर करते हुए बताया कि यह जीत आसान नहीं थी। उनका यह सफर 2018 में शुरू हुआ था। 2020 में एक गाइड की जान बचाने के लिए उन्हें मिशन बीच में छोड़ना पड़ा और 2023 में खराब मौसम ने रास्ता रोका।
इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान रोहताश को फ्रॉस्ट बाइट का सामना करना पड़ा, जिसमें उन्होंने अपनी 2 उंगलियां गंवा दीं, लेकिन उनके हौसले नहीं डिगे। इससे पहले बाबू चिरी शेर्पा ने 1999 में माउंट एवरेस्ट के शिखर पर बिना ऑक्सीजन के 21 घंटे बिताए थे, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड बना।
मौत को मात देकर फहराया तिरंगा पर्वतारोही ने बताया कि शिखर पर स्थिति बेहद भयावह थी। तापमान -40°C से -50°C तक था। कोई भी साथी इतनी ठंड में साथ रुकने को तैयार नहीं था, रोहताश वहां अकेले डटे रहे। रोहताश ने अपनी इस कामयाबी को तिरंगे की शान और देशवासियों को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की ट्रेनिंग ने उन्हें इस जानलेवा ठंड में जीवित रहने और इतिहास रचने की ताकत दी।
इंडिया बुक में रिकॉर्ड दर्ज कर चुके पर्वतारोही रोहताश खिलेरी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ है। रोहताश को डाक के माध्यम से सर्टिफिकेट मिले। रोहताश ने वर्ष 2021 में 21 मार्च को अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर 24 घंटे रुककर तिरंगा लहराया था, जोकि 5,895 मीटर ऊंची है। इसके आधार पर खिलेरी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हुआ है।
इसलिए खास है रोहताश की उपलब्धि…
- कई पर्वतारोही कर चुके ऐसी कोशिश: माउंट एल्ब्रुस (18,510 फीट) पर 24 घंटे रुकने का प्रयास पहले भी पर्वतारोहियों द्वारा किया गया है, लेकिन वे परिस्थितियां अलग थीं। रोहताश खिलेरी खुद अपनी पोस्ट में बताया, उन्होंने 2020 में 24 घंटे रुकने की कोशिश की थी, लेकिन अपने गाइड की जान बचाने के लिए उन्हें नीचे आना पड़ा। फिर 2023 में खराब मौसम के कारण वे सिर्फ 4 घंटे ही रुक पाए थे।
- असंभव माना जा है 24 घंटे रुकना: रोहताश के अनुसार रूस और यूरोप के कई अनुभवी पर्वतारोहियों ने एल्ब्रस पर ‘विंटर समिट’ (सर्दियों में चढ़ाई) और ‘फास्टेस्ट एसेंट’ (सबसे तेज चढ़ाई) के रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन शिखर पर ऑक्सीजन के बिना पूरा एक दिन और रात (24 घंटे) गुजारना शारीरिक रूप से लगभग असंभव माना जाता है।
एल्ब्रुस पर सबसे ज्यादा चढ़ाई का रिकॉर्ड भी हरियाणवी के नाम
- रेवाड़ी के नरेंद्र यादव 3 बार कर चुके फतेह: 15 अगस्त 2025 को रेवाड़ी के गांव नेहरूगढ़ के रहने वाले नरेंद्र यादव ने एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराया था। चोटी पर पहुंचते ही जय श्रीराम और भारत माता का जयघोष किया। इस चोटी पर यह उनकी तीसरी चढ़ाई थी। वे सबसे ज्यादा बार चोटी फतेह करने वाले पहले भारतीय बने। यह उनके नाम 24वां वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा।
- माइनस 30 डिग्री टेंपरेचर और 50 किमी रफ्तार की बर्फीली झेली: 30 वर्षीय नरेंद्र ने 6 अगस्त को भारत से रूस रवाना हुए थे। उन्हें 7 देशों के पर्वतारोही दल को लीड करना था। इससे पहले नरेंद्र ने साल 2017 और 2023 में भी इस चोटी को फतह किया। इस बार उन्हें माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही बर्फीली हवा झेली थी।
- नरेंद्र भी फ्रॉस्टबाइट का शिकार हुए: नरेंद्र यादव के पैर पर्वतारोहण के कारण फ्रॉस्टबाइट के शिकार हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने फिर हार नहीं मानी। फ्रॉस्टबाइट के कारण 2 साल तक उनका इलाज चला था। अब उनके दोनों पैर की सभी अंगुलियां मुड़ती नहीं हैं, केवल सीधी ही रहती हैं। एक बार तो डॉक्टर ने उंगलियां काटने के लिए बोल दिया था। कुछ हद तक रिकवरी हुई लेकिन मूवमेंट नहीं हो सकी। फ्रॉस्टबाइट को शीतदंश भी कहते हैं। ये एक ऐसी स्थिति है जब स्किन और उसके नीचे के टिश्यू ज्यादा ठंड के कारण जम जाते हैं।
2 बार माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली संतोष यादव भी हरियाणवी हरियाणा की संतोष यादव ने 2 बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की है। संतोष यादव ने साल 1992 में पहली बार माउंट एवरेस्ट को फतह किया। इसके बाद उन्होंने साल 1993 में वह दोबारा एवरेस्ट को फतह करने गईं और सफल रहीं।
संतोष यादव ने दुनिया की पहली महिला होने का रिकॉर्ड कायम किया, जिन्होंने 8848 मीटर शिखर माउंट एवरेस्ट को 2 बार फतह किया हो। संतोष कांगशंग की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ने वाली दुनिया की पहली महिला भी हैं।
