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अल-फलाह ग्रुप पर ED का एक्शन:140 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की; चेयरमैन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

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अल-फलाह ग्रुप पर ED का एक्शन:140 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की; चेयरमैन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

फरीदाबाद5 मिनट पहले
अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ED ने 18 नवंबर को गिरफ्तार किया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की करीब 140 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। साथ ही ED ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।

ED द्वारा अटैच की गई संपत्तियों में फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित 54 एकड़ जमीन, यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग, विभिन्न स्कूलों और विभागों की बिल्डिंग्स तथा हॉस्टल शामिल हैं। ये सभी संपत्तियां अल फलाह ट्रस्ट के नाम पर हैं। ED ने इन्हें अपराध की आय की श्रेणी में रखा है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम उस समय भी सामने आया था, जब व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच चल रही थी। इस मामले में NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन सईद समेत 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर डॉ. उमर उन नबी ने 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास चलती हुई कार में धमाका किया था, जिसमें उमर उन नबी समेत 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद जांच एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी को आतंकी मॉड्यूल का केंद्र मानते हुए जांच तेज कर दी थी।

18 नवंबर को ED ने दिल्ली में अल-फलाह ग्रुप के ऑफिस पर रेड की थी। 12 घंटे चले सर्च के बाद चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था।

ED ने कहा था- झूठी मान्यता से आय अर्जित की ED ने 18 नवंबर को अल-फलाह ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर रेड की थी। 12 घंटे चले सर्च के बाद ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था। सिद्दीकी का रिमांड मांगते हुए ED ने कोर्ट में बताया था कि यूनिवर्सिटी और उसके नियंत्रण वाले ट्रस्ट ने झूठी मान्यता और पहचान के दावे कर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को धोखे में रखा और इस तरह कम से कम 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की।

9 शेल कंपनियां एक ही पते पर पाईं गईं ED को जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलीं, जिसमें 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड पाई गईं। कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर है। साथ ही एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। फिलहाल ईडी ED ने यह भी कहा था कि अगर कोर्ट अस्थायी जब्ती को सही ठहराता है, तो सरकार एक अधिकारी को यूनिवर्सिटी का कामकाज संभालने के लिए नियुक्त कर सकती है। इससे कानूनी कार्रवाई चलने के बावजूद स्टूडेंट्स की पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आएगी।

हरियाणा सरकार भी यूनिवर्सिटी पर कस सकती है शिकंजा अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर हरियाणा सरकार शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। 22 दिसंबर को विधानसभा में हरियाणा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2025 पास हो चुका है। बिल में सरकार ने की बदलाव किए हैं। इस बिल में कहा गया है कि अगर किसी भी यूनिवर्सिटी में नेशनल सिक्योरिटी, देश की अखंडता तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में चूक होती है, तो सरकार किसी भी यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

ऐसे किसी भी हालात के दौरान सरकार यूनिवर्सिटी के प्रशासन को भंग करके सरकार अपने प्रशासन को नियुक्त कर सकती है। इस दौरान सरकार उसका कामकाज पूरी तरह से अपने हाथ में ले सकती है। पिछले बिल में इस तरह का कोई प्रावधान नही था, इसलिए सुरक्षा को लेकर ये नए प्रावधान किए गए हैं।

हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…

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