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बहराइच हिंसा में हत्यारे सरफराज को फांसी की सजा:हरा झंडा हटाकर भगवा फहराने पर गोली मारी थी; 9 को उम्रकैद

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बहराइच हिंसा में हत्यारे सरफराज को फांसी की सजा:हरा झंडा हटाकर भगवा फहराने पर गोली मारी थी; 9 को उम्रकैद

अनुराग पाठक | बहराइच3 मिनट पहले

यूपी के बहराइच में राम गोपाल मिश्रा हत्याकांड में गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। राम गोपाल को गोली मारने वाले मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा दी गई है। जबकि हत्या में साथ देने वाले पिता अब्दुल हमीद, दो भाइयों समेत 9 दोषियों को उम्रकैद सजा हुई है।

अपर सत्र न्यायाधीश (ADJ) की कोर्ट ने 13 महीने 28 दिन में फैसला दिया है। दो दिन पहले 9 दिसंबर को अदालत ने कुल 13 अभियुक्तों में से 10 को मॉब लिंचिंग समेत कई धाराओं में दोषी करार दिया था। जबकि तीन आरोपी खुर्शीद, शकील और अफजल बरी हुए थे।

इससे पहले कड़ी सुरक्षा में जेल से सभी दोषियों को कोर्ट लाया गया। अदालत ने एक-एक दोषियों को उनके खिलाफ सजा सुनाई। इस दौरान कोर्ट में काफी गहमा-गहमी रही।

बहराइच के महराजगंज बाजार में 13 अक्टूबर, 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हिंसा हुई थी। इसी दौरान राम गोपाल मिश्रा को पहले सीने पर गोली मारी गई, फिर पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी गई थी।

राम गोपाल मिश्रा की पत्नी रोली ने कहा-

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हम अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं। हमारे पति को गोली मारने वाले को फांसी हो गई।

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11 जनवरी को चार्जशीट, 12 ने गवाही दी पुलिस ने 11 जनवरी को सभी आरोपियों के खिलाफ ADJ की अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 18 फरवरी को आरोपों पर बहस हुई। मामले से जुड़े 12 गवाहों ने न्यायालय में अपनी गवाही दी। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को जज ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया।

9 दिसंबर 2025 को अब्दुल हमीद, उनके बेटे फहीम, सरफराज, तालिब के साथ इलाके के रहने वाले सैफ, जावेद, जिशान, ननकऊ, शोएब और मारुफ को दोषी ठहराया गया। वहीं तीन अन्य आरोपियों खुर्शीद, शकील और अफजल को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया गया।

शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया, धारा 103/2 के तहत मुख्य अभियुक्त को फांसी की सजा हुई है। धारा 103/2 मॉब लिंचिंग से संबंधित धारा है, जिसमें किसी समूह द्वारा जाति धर्म व नस्ल के नाम पर हत्या करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के दोष सिद्ध होने पर फांसी या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

अब हिंसा के दौरान की 4 तस्वीरें…

यह तस्वीर 13 अक्टूबर की हिंसा वाले दिन की है। रामगोपाल मिश्रा अब्दुल हमीद के घर की छत पर चढ़ गया और वहां पर भगवा झंडा फहराया था।
यह तस्वीर भी 13 अक्टूबर हिंसा वाले दिन की है। इसी छत पर रामगोपाल मिश्रा को पहले गोली मारी गई। फिर उसके शरीर पर धारदार हथियारों से भी हमला किया गया था।
यह तस्वीर रामगोपाल मिश्रा की है। गोली लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी।
लाल घेरे में सरफराज है, जिसने रामगोपाल को गोली मारी थी। उसे फांसी की सजा हुई है।

10 प्वाइंट में जानिए 13 अक्टूबर को क्या हुआ

  1. बहराइच से करीब 40 किमी दूर महराजगंज बाजार में 13 अक्टूबर को शाम 6 बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान महराजगंज कस्बे में मुस्लिम समाज के लोगों ने डीजे बंद करने को कहा। इस बात पर विवाद हो गया।
  2. जुलूस पर पत्थर फेंके गए। दोनों पक्षों में पथराव-आगजनी के साथ 20 राउंड से ज्यादा फायरिंग हुई। इसी दौरान रेहुवा मंसूर के रहने वाला रामगोपाल मिश्रा, अब्दुल हमीद के घर की छत पर चढ़ गया और वहां लगा झंडा उतार दिया। उसकी जगह पर उसने भगवा झंडा फराया।
  3. इस दौरान अब्दुल हमीद और उनके बेटे सरफराज और दूसरे आरोपियों ने रामगोपाल को घर के अंदर खींचकर बुरी तरह से पीटा। फिर गोली मार दी। रामगोपाल को लखनऊ ले जाते समय मौत हो गई। इसके बाद भीड़ हिंसक हो गई।
  4. ​रामगोपाल की मौत की खबर मिलते ही भीड़ भड़क गई और सड़क जाम कर मूर्ति विसर्जन रोक दिया। रातभर प्रदर्शन चला। रात में ही डीएम मोनिका रानी और एसपी वृंदा शुक्ला पहुंच गईं। कई थानों की फोर्स बुलाई गई। इसके बावजूद अगले दिन हिंसा भड़क गई।
  5. अगले दिन सुबह हिंसा में मारे गए युवक का शव लेकर भीड़ निकली तो पुलिस ने रास्ते में रोका। पुलिस ने समझाया तो परिवार शव लेकर घर चला गया। लेकिन, भीड़ आक्रोशित हो गई। उन्होंने महसी तहसील की मेन मार्केट में आगजनी की। इस दौरान लोगों ने बाइक शोरूम, प्राइवेट अस्पताल में आग लगा दी।
  6. मौके पर पांच थानों की पुलिस फोर्स, दो बटालियन पीएसी की तैनाती की गई। इस दौरान लगभग 5 से 6 हजार की भीड़ मौके पर जुट गई। लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। लाठी चार्ज में एक घायल भी हो गया है।
  7. लखनऊ से एसटीएफ चीफ और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश भी बहराइच पहुंच गए हैं। उन्होंने आगजनी कर रही भीड़ को पहले रोका, नहीं मानी तो हाथ में पिस्टल लेकर दौड़ा लिया। कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और हिंसा फैलाने वाले मुख्य आरोपी की तलाश शुरू की गई।
  8. पुलिस ने हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में FIR दर्ज की। मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ की पहचान CCTV फुटेज और स्थानीय गवाहों के आधार पर की गई।
  9. मामले की कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई। रामगोपाल मिश्रा की हत्या और हिंसा फैलाने के आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस को मामले की त्वरित जांच और सबूत जुटाने के निर्देश दिए। पुलिस ने मामले में कुल 13 लोगों को अभियुक्त बनाया।
  10. कोर्ट में मामले की सुनवाई लगभग एक वर्ष तक चलती रही। अदालत में रोजाना की सुनवाई के दौरान घटनाओं के गवाहों, पीड़ित परिवार और पुलिस अधिकारियों से बयान लिए गए। सुनवाई के दौरान आरोपियों ने अपने बचाव में कई दलीलें दीं, लेकिन पर्याप्त सबूतों के आधार पर अदालत ने 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराया
रामगोपाल मिश्रा के पिता ने फैसले के बाद न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। कहा- हमें न्याय की उम्मीद थी और आज अदालत ने उसका रास्ता दिखाया।

पिता ने कोर्ट का आभार जताया, पत्नी बोली- सभी को फांसी हो

रामगोपाल मिश्रा के परिवार ने फैसले के बाद न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। उनके पिता ने कहा- हमें न्याय की उम्मीद थी और आज अदालत ने उसका मार्ग दिखाया। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

30-90 दिन में अपील दायर करने का अधिकार दोषसिद्धि और सजा के फैसले के बाद, दोषी को अपील दायर करने का अधिकार होता है। अपील 30-90 दिनों के भीतर की जा सकती है, जिसमें सजा को कम करने, रद्द करने की मांग की जा सकती है। यदि फांसी की सजा हो तो पुष्टि आवश्यक है। पीड़ित पक्ष फांसी की मांग कर सकता है यदि आजीवन कारावास हो।

पढ़िए रामगोपाल के परिवार ने हत्या के दिन क्या कहा था

मृतक की माता और पत्नी ने दोषियों के खिलाफ मृत्युदंड की सख्त मांग की थी।

मौत से 85 दिन पहले हुई था शादी रामगोपाल की शादी उसकी हत्या से करीब 85 दिन पहले रोली से मंदिर में लव मैरिज थी। शादी में बहुत कम लोग थे। शादी के बाद दोनों पक्षों के लोगों ने इस रिश्ते को मान लिया था। राम गोपाल पहले लखनऊ में रहता था। रोली ने हिंसा के एक दिन बाद भास्कर से बातचीत में कहा था- उस दिन गांव में भंडारा था, वहीं पति खाना बना रहे थे। लौटे तो कहा कि मैं विसर्जन में जा रहा हूं।

रोली ने बताया- मैंने बाइक की चाभी छिपा दी थी। कह रही थी, मत जाइए। उन्होंने जिद की और चले गए। शाम को 5 बजे फोन आया कि उन्हें गोली लगी है। कहा गया कि पैर में लगी है, जान नहीं जाएगी। हम हॉस्पिटल पहुंचे। वहां जो देखा, वह बहुत भयानक था। मेरे पति को बेदर्दी से मारा गया। उनके गले पर चाकू के निशान थे। पैर के सारे नाखूनों को प्लास से खींच लिया गया था। हाथ और पेट में गोलियों के निशान थे। एकदम जानवरों की तरह मारा गया था।

मृतक की माता और पत्नी ने दोषियों के खिलाफ मृत्युदंड की सख्त मांग की।

तीनों भाइयों की 25 साल की उम्र में मौत राम गोपाल के 4 भाई और दो बहन थे। दो भाइयों की पहले ही मौत हो चुकी है। एक ने फांसी लगा ली थी, दूसरे भाई की डूबने से मौत हुई थी। मौत के समय दोनों की उम्र 25 साल से कम थी। अब राम गोपाल मिश्रा की भी 25 साल से कम उम्र में मौत हो गई। राम गोपाल की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह कहती हैं- मेरे बेटे का पूरा शरीर छलनी कर दिया। नाक पर मारा, गर्दन पर मारा, सिर पर मारा। हमारा पूरा घर बर्बाद कर दिया।

पिता ने कहा था- बेटा विसर्जन में न गया होता तो ठीक रहता

राम गोपाल मिश्रा के पिता कैलाश चंद्र मिश्रा सड़क पर बैठकर हर आने-जाने वालों को देख रहे थे। उन्हें कुछ समझ ही नहीं आ रहा। कहते हैं- बेटा मेरा सहारा था। मुझे कहीं जाना होता था, तो वहीं बाइक से लेकर जाता था। दूसरा बेटा बाइक चला ही नहीं पाता था। अब बहू को लेकर चिंता है। अब उसका क्या होगा? आखिर में वह कहते हैं, बेटा विसर्जन में न गया होता तो ठीक रहता। कम से कम उसकी जान तो बच जाती।

CM योगी से मां ने कहा था- हमारा सब कुछ छिन गया

सीएम योगी ने रामगोपाल के माता-पिता और पत्नी से मुलाकात की थी।

एक साल पहले रामगोपाल मिश्रा के घर वालों ने सीएम योगी से मुलाकात की थी। इस दौरान पिता कैलाश, मां और पत्नी रोली रोने लगी थीं। मां मुन्नी देवी ने कहा था- बेटे को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया। हमारा सब कुछ छिन गया।

पत्नी रोली भी घूंघट डाले सीएम के सामने बैठी थीं। उसने रोते हुए कहा था-दुनिया उजड़ गई मेरी। न्याय चाहिए। पिता भी 22 साल के जवान बेटे की हत्या की बात करते-करते रो पड़े। उन्होंने गमछे से अपने आंसू पोछे थे। कुछ देर के लिए सीएम ऑफिस में सन्नाटा छा गया था। सीएम सभी को देखते रहे थे। ढांढस बंधाते हुए कहा था- आपकी पूरी मदद की जाएगी।

योगी ने परिवार को 10 लाख रुपए, एक प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान कार्ड और पत्नी रोली को संविदा पर नौकरी देने की बात कही थी।

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