संसद के शीतकालीन सत्र में गहमागहमी के बीच बुधवार को PM मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नए चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति को लेकर मीटिंग की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में यह मीटिंग करीब डेढ़ घंटे चली यह बैठक हुई।
इसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, राहुल ने कुछ हफ्ते पहले सरकार से आवेदकों और चुने गए उम्मीदवारों की जाति (Caste) की जानकारी मांगी थी। सरकार ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष से इसकी जानकारी साझा की। सूत्रों के मुताबिक, आवेदकों की लिस्ट में सिर्फ 7% लोग पिछड़े समुदाय से थे।
वहीं, चयनित उम्मीदवारों में सिर्फ एक नाम पिछड़े समुदाय से था। राहुल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सभी नियुक्तियों के मानदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखित में अपना असहमति पत्र सौंपा और चयनित उम्मीदवारों से जुड़ी और जानकारी मांगी।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने एक RTI के जवाब में बताया था कि 21 मई को जारी विज्ञापन के बाद CIC के पद के लिए 83 आवेदन मिले। वहीं 14 अगस्त 2024 को इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स के पदों के लिए जारी विज्ञापन पर 161 आवेदन मिले थे।
राहुल CIC चुनने वाले 3 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी के सदस्य
केन्द्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission) एक वैधानिक संस्था है। यह सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत नागरिकों को सरकारी जानकारी दिलाने में मदद करती है। आयोग में एक चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर और अधिकतम 10 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स होते हैं।
CIC और 10 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति तीन सदस्यीय समिति करता है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। समिति के दो अन्य सदस्यों में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री की ओर से नामित एक केंद्रीय मंत्री भी शामिल होते हैं। समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रपति अधिकारियों को नियुक्ति करते हैं।
ये अधिकारी उन शिकायतों और अपीलों की सुनवाई करते हैं जो आवेदक सरकारी विभागों से असंतोषजनक जवाब मिलने पर दायर करते हैं। CIC की वेबसाइट के मुताबिक, आयोग के पास 30,838 मामले लंबित हैं।
तीन महीने से चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर का पद खाली
चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर का पद पिछले 3 महीने से खाली है। पूर्व CIC हीरालाल सामरिया 13 सितंबर, 2025 में 65 साल की उम्र में इस पद से रिटायर हुए। 2014 के बाद यह सातवां मौका है जब आयोग का प्रमुख पद करीब तीन महीने से खाली है।
CIC पद पहली बार अगस्त 2014 में उस समय खाली हुआ था जब तत्कालीन CIC राजीव माथुर रिटायर हुए थे। इसके अलावा, आयोग में 10 में से 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स के पद खाली हैं। अभी केवल दो इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स- अनंदी रामलिंगम और विनोद कुमार तिवारी ही कार्यरत हैं।
पूर्व CIC की नियुक्ति पर भी विपक्ष ने असहमति जताई थी
यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने CIC की नियुक्ति को लेकर सरकार से असहमति जताई है। 2023 में सामरिया की नियुक्ति के समय भी विवाद हुआ था। तब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति में विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने नियुक्ति को लेकर न तो उनसे कोई सलाह ली और न ही उन्हें जानकारी दी।
2020 में भी चयन पैनल की बैठक में चौधरी ने पूर्व IFS अधिकारी और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर यशवर्धन कुमार सिन्हा को चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स और पत्रकार उदय महूरकर को इन्फॉर्मेशन कमिश्नर बनाए जाने का विरोध किया था। चौधरी की असहमति दर्ज होने के बावजूद सिन्हा और महूरकर की नियुक्ति कर दी गई थी।
