पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (पूर्व CJI) बीआर गवई ने शनिवार को कहा कि उन्होंने जब शेड्यूल कास्ट (SC) आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की बात कही, तो उन्हें अपने ही समुदाय के लोगों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।
पूर्व CJI गवई मुंबई यूनिवर्सिटी में आयोजित एक लेक्चर में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा,
अंबेडकर की नजर में आरक्षण ऐसा था जैसे किसी पीछे छूटे व्यक्ति को साइकिल देना, ताकि वह बाकी लोगों के बराबर पहुंच सके।

पूर्व CJI ने आगे कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वह व्यक्ति हमेशा साइकिल पर चलता रहे और नए लोगों के लिए रास्ता ही बंद हो जाए। क्या CJI या चीफ सेक्रेटरी के बेटे और ग्राम पंचायत स्कूल में पढ़ने वाले मजदूर के बेटे को एक ही पैमाने से मापा जा सकता है?
‘हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट जज की नियुक्ति में आरक्षण नहीं’
पूर्व CJI बीआर गवई ने बताया कि इंद्रा साहनी केस में क्रीमी लेयर सिद्धांत तय हुआ था और एक फैसले में उन्होंने खुद कहा था कि यह सिद्धांत SC वर्ग पर भी लागू होना चाहिए।
गवई ने कहा- इस पर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वे खुद आरक्षण का लाभ लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और अब क्रीमी लेयर की बात कर रहे हैं। लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जज की नियुक्ति में आरक्षण नहीं होता, इसलिए यह आरोप तथ्यहीन है।
1 नवंबर- पूर्व CJI बोले- हिंदू विरोधी होने के आरोप गलत
इससे पहले पूर्व CJI बीआर गवई ने 1 नवंबर को कहा था कि अदालत में हुई जूता फेंकने की कोशिश वाली घटना का उन पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्हें हिंदू-विरोधी बताए जाने के आरोप पूरी तरह गलत हैं।
एक न्यूज चैनल से बातचीत में गवई ने कहा कि जिस शख्स ने उन पर जूता फेंका, उसे उन्होंने उसी समय माफ कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह प्रतिक्रिया उनकी परवरिश और परिवार से सीखे मूल्यों का परिणाम है। कानून की शान सजा में नहीं, बल्कि माफ करने में है।
23 नवंबर को रिटायर हुए थे CJI गवई
देश के 52 वें CJI बीआर गवई का कार्यकाल 14 मई 2025 को शुरू हुआ था और 23 नवंबर 2025 को खत्म हुआ। वे करीब साढ़े छह महीने तक देश के मुख्य न्यायाधीश रहे। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए और न्यायपालिका में सुधारों पर जोर दिया। उनके बाद 24 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें CJI बने।
