पंजाब सरकार का खालिस्तान समर्थक सांसद को पैरोल से इनकार:DC बोले- हालात बिगड़ने का खतरा; पिता बोले- सिखों की आवाज दबा रहे
खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल इस बार भी संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल नहीं हो पाएंगे। सरकार ने उन्हें अस्थायी पैरोल देने से मना कर दिया है। इस मामले में सरकार ने जिले के अधिकारियों की रिपोर्ट को आधार बनाया है।
अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि पैरोल मांगने का उद्देश्य सिर्फ इतना था कि उनका बेटा संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होकर पंजाब और सिख समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रख सके। उन्होंने दावा किया कि यह पैरोल कभी भी निजी काम या घर आने के लिए नहीं मांगी गई थी।
सांसद अमृतपाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होने के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह में फैसला लेने को कहा था। संसद का सेशन एक से 19 दिसंबर तक चलेगा।
डीसी और SSP रिपोर्ट पर फैसला इस मामले में सरकार ने जिला रिपोर्ट को आधार बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर और जिले के पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने कहा है कि अगर अमृतपाल सिंह को रिहाई दी गई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो सकता है।
अमृतपाल की तरफ से याचिका में NSA की धारा 15 का हवाला दिया गया था, इसके धारा में बंदी को विशेष परिस्थिति में पैरोल देने का अधिकार है। उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पास ट्रांसफर कर दिया था।
हाईकोर्ट ने 3 तर्क से सरकार को आदेश दिया…
- एडवोकेट ने बाढ़ के मुद्दे पर बोलने की बात कही: अमृतपाल की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस पेश हुए थे। इस दौरान अदालत ने उनसे सवाल किया था कि अमृतपाल संसद में किस विषय पर बोलेंगे या सिर्फ मूकदर्शक बने रहेंगे। आपने क्या रिसर्च किया है? इस पर अमृतपाल के एडवोकेट ने कहा कि वह शायद बाढ़ से राहत के मुद्दे पर बोलेंगे।
- जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन दिया: इस दौरान केंद्र की तरफ से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि राज्य की सक्षम अथॉरिटी ही सांसद को संसद के सत्र में शामिल होने की परमिशन दे सकती है। इस पर अमृतपाल के एडवोकेट बैंस ने कहा कि पैरोल को लेकर पंजाब सरकार और जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन दे दिया गया है।
- एक सप्ताह में फैसला लेने को कहा: पंजाब सरकार की तरफ से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल चंचल सिंह ने कहा था कि अमृतपाल की तरफ से केवल रिप्रेजेंटेशन दिया गया है। वह प्रॉपर एप्लिकेशन के फॉर्मेट में नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि इसे ही एप्लिकेशन के तौर पर माना जाना चाहिए। इसके बाद हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में फैसला लेने को कहा था।
पैरोल रद्द पर पिता ने क्या कहा, 2 पॉइंट में जानिए..
- पैरोल इसलिए मांगी थी, ताकि संसद में मुद्दे उठा सकें: अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि पैरोल मांगने का उद्देश्य सिर्फ इतना था कि उनका बेटा संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल होकर पंजाब और सिख समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रख सके। सरकार नहीं चाहती कि पंजाब की असली आवाज संसद में सुने, और इसी वजह से सिख तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के मुद्दों को दबाया जा रहा है।
- ला-एंड-ऑर्डर का बहाना बनावटी: तरसेम सिंह ने सरकार द्वारा दिए गए ला-एंड-ऑर्डर के तर्क को पूरी तरह बनावटी बताया। उनका कहना था कि एक चुने हुए सांसद को संसद में अपनी स्वतंत्र आवाज रखने से रोकना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पंजाब के वास्तविक मुद्दों- जैसे नशा, बेरोजगारी, पुलिसिया दबाव और विश्वविद्यालयों में तनाव को हल करने के बजाय राजनीतिक रूप से सांसद को दबाने में लगी है।
एक सप्ताह पहले दायर की थी याचिका सांसद अमृतपाल सिंह ने करीब एक सप्ताह पहले संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम बेल की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
वकील ईमान सिंह खारा के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया था, अप्रैल 2023 से प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने के बावजूद अमृतपाल सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब सीट से लगभग 4 लाख वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। वह 19 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की थी कि उन्हें पैरोल पर रिहा किया जाए या कम से कम संसद सत्र के दौरान उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
