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भारतीय नौसेना में स्वदेशी युद्धपोत INS माहे शामिल:समुद्र में दुश्मन पनडुब्बियों को तलाशेगा; जानें क्यों कहा जाता है ‘साइलेंट हंटर’

भारतीय नौसेना में स्वदेशी युद्धपोत INS माहे शामिल:समुद्र में दुश्मन पनडुब्बियों को तलाशेगा; जानें क्यों कहा जाता है ‘साइलेंट हंटर’

मुंबई3 घंटे पहले
INS माहे उथले पानी में चलने वाला युद्धपोत (ASW-SWC) है। मुंबई में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे।

स्वदेशी युद्धपोत INS माहे सोमवार को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया। यह माहे-क्लास का पहला पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) और उथले पानी (जहां पानी की गहराई कम हो) में चलने वाला युद्धपोत है, जो तटीय इलाकों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है।

मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। द्विवेदी ने तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति सिनर्जी है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन, तटीय इलाकों में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। ये काम बिना शोर के करने की काबिलियत के चलते इसे ‘साइलेंट हंटर’ नाम दिया गया है।

INS माहे के कमीशंड समारोह की 6 फोटो

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने INS माहे पर चढ़कर नौसेना अफसरों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं।
INS माहे गहरे पानी में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मनों की तलाश करने में अहम होगा।
मुंबई में नौसेना डॉकयार्ड में कमीशनिंग समारोह के दौरान INS माहे के अगले हिस्से की तस्वीर।
INS माहे से उतरते आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी।
INS माहे के कमीशनिंग समारोह के दौरान नौसेना का एक जवान ने दूसरे जवान की टोपी ठीक की।
आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कमीशनिंग के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।

INS माहे का 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना

INS माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, जो नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक मजबूत कदम माना जा रहा है। नौसेना ने इसे “नए दौर का तेज, फुर्तीला और आधुनिक भारतीय युद्धपोत” कहा है।

INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। यह शैलो वॉटर यानी कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च सटीकता (हाई-प्रिसिजन) के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है।

यह एक मल्टी-रोल वॉरशिप है, जो कोस्टल डिफेंस, अंडरवॉटर सर्विलांस और सर्च-एंड-रेस्क्यू जैसे कई महत्वपूर्ण मिशन में तैनात किया जा सकता है। इसमें माइन ले-ड्रॉपिंग की क्षमता भी है, जिससे यह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है।

पुडुचेरी के माहे शहर के नाम पर

INS माहे का नाम पुडुचेरी के माहे शहर से लिया गया है, जो केरल के मालाबार तट पर स्थित है। यह शहर समुद्री इतिहास, व्यापार और तटीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। नौसेना ने इसका नाम इसलिए चुना क्योंकि माहे समुद्री परंपरा और भारत के तटीय सामरिक महत्व का प्रतीक है।

जहाज के चिन्ह (क्रेस्ट) में ‘उरूमी’ नाम की लचीली तलवार भी दिखाई देती है, जो केरल की कलारीपयट्टू मार्शल आर्ट से जुड़ी है। यह तलवार फुर्ती, लचीलापन और सटीक वार का प्रतीक है। इस तरह माहे शहर का इतिहास और समुद्री पहचान, दोनों मिलकर जहाज के नाम का सही अर्थ बताते हैं।

क्यों कहा जाता है इसे ‘साइलेंट हंटर’

INS माहे स्टेल्थ सक्षम पोत है, जो दुश्मन की निगरानी प्रणाली से छुपकर, चुपचाप ऑपरेशन कर सकता हैं। यह लो-नॉइज ऑपरेशन यानि बेहद कम शोर में काम करता है, जिससे दुश्मन को बिना पता चले पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम होता है। स्टेल्थ डिजाइन और शांत इंजन के कारण इसे साइलेंट हंटर भी कहा जाता ह

INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है।

सेना प्रमुख बोले- सेना तेजी से बदलाव कर रही

समारोह के अंत में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने INS माहे और उसके क्रू को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा- जब यह जहाज आज अपना ध्वज फहराता है, तो यह केवल नौसेना ही नहीं, पूरे देश का विश्वास साथ लेकर चलता है। इसके हर मिशन में सफलता मिले और इसके नाविक राष्ट्र सेवा में सदैव तत्पर रहें।

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