लखनऊ में भागवत बोले- धर्म के लिए लड़ना होगा:योगी बोले- RSS सामाजिक समर्थन से चलता है, विदेशी फंडिंग से नहीं
लखनऊ में RSS प्रमुख मोहन भागवत और सीएम योगी ने रविवार को दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव में मंच साझा किया। मोहन भागवत ने कहा- हमारा भारत पूरी दुनिया का विश्वगुरु था। दुनिया के लिए एक बड़ा सहारा था। कभी चक्रवर्ती सम्राट भी होते थे। हजारों साल तक आक्रमणकारियों के पैरों तले रौंदा गया। हमें गुलामी में जीना पड़ा। उन्होंने कहा-
धार्मिक स्थलों को नष्ट किया गया। जबरदस्ती धर्मांतरण हुए, लेकिन तब भी भारत था। वह वैभव के दिन नहीं रहे, लेकिन आक्रमण के दिन भी चले गए। अब हम राममंदिर पर झंडा फहराने वाले हैं। हमें धर्म रक्षा के लिए लड़ना है। विश्व में शांति की स्थापना गीता के माध्यम से ही की जा सकती है।

सीएम योगी ने कहा- विदेशी नेता और डिप्लोमेट अक्सर पूछते हैं कि संघ कैसे काम करता है। मैं उन्हें बताता हूं कि RSS सामाजिक सहयोग से चलने वाला संगठन है। यह विदेशी फंडिंग से नहीं चलता। उन्होंने कहा-
अपने धर्म में मरना अच्छा है। हमें लालच में दूसरा धर्म नहीं अपनाना चाहिए। यह महापाप है। हमने भारत की पूरी धरती को धर्मक्षेत्र माना। इसलिए युद्ध का मैदान भी हमारे लिए धर्मक्षेत्र है, क्योंकि धर्मक्षेत्र में जो युद्ध भी लड़ा जा रहा, वो अपने कर्तव्यों के लिए लड़ा जा रहा। संघ ने 100 साल में कोई सौदेबाजी नहीं की, लेकिन कुछ लोगों ने दुनिया और भारत में सेवा को सौदेबाजी का जरिया बनाया।

इससे पहले मोहन भागवत और सीएम योगी ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मोहन भागवत और सीएम ने श्रीमद् भागवत गीता की भी पूजा की। ज्ञानानंद महाराज ने दोनों को गीता की एक-एक प्रति भेंट की। इसके बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् गाया गया।
जनेश्वर मिश्र पार्क में पहली बार यह कार्यक्रम हो रहा है। इसे संत ज्ञानानंद की संस्था ‘जीओ गीता परिवार’ की तरफ से करवाया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति न सिर्फ गीता को पढ़े, बल्कि उसे समझे और जीवन में उतारे।
मोहन भागवत की कही 3 बड़ी बातें-
1- जैसे अर्जुन मोहग्रस्त हो गए थे, वैसे ही आज दुनिया हुई मोहन भागवत ने राजा जनक की कहानी सुनाई। इसके जरिए बताया कि परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन हम बने रहते हैं। RSS प्रमुख ने कहा- जैसे महाभारत में अर्जुन मोहग्रस्त हो गए थे, वैसे ही दुनिया आज हो गई है। अगर पुरुषार्थ मजबूत है, तो भाग्य भी साथ देता है। धर्म धारण करने वाला होना चाहिए।
2- आज दुनिया असमंजस की स्थिति में जब अर्जुन ने कहा कि मैं युद्ध करूंगा तो बहुत हानि होगी, सृष्टि का नुकसान होगा। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम भाग रहे हो। सृष्टि किसने बनाई, किसको इसे समेटना है- वह कर रहा है। तुम केवल युद्ध करो। परेशानी से आंख मिलाकर रखो। कहीं दाएं-बाएं नहीं देखना है।
हमें 700 श्लोकों के माध्यम से प्रतिदिन गीता का वाचन करना चाहिए। उनके माध्यम से जीवन में सीख लेंगे तो कल्याण हो जाएगा। आज दुनिया असमंजस की स्थिति में है, गीता के माध्यम से सही दिशा दी जा सकती है। अगर जीवन में शांति और संतोष नहीं होगा, तो समस्या होगी।
3- गीता के पथ पर चलकर ही भारत विश्वगुरु बन सकता है भारत की परंपरा में धर्म के साथ शांति और सौहार्द की व्यवस्था है। ज्ञान प्राप्त करने का निचोड़ भगवद्गीता में है। अर्जुन के गंभीर प्रश्नों का उत्तर ही गीता है। हमें गीता पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और मनन करना चाहिए।
गीता हमें समस्या से भागने के बजाय उसका सामना करने की प्रेरणा देती है। धर्म के आधार पर हमें सफलता अवश्य मिलती है। दुविधाओं से बाहर निकलकर राष्ट्र की सेवा करना ही हमारा परम कर्तव्य है। इसे गीता के माध्यम से जीवन में शामिल करना चाहिए। गीता के पथ पर चलकर ही भारत विश्वगुरु बन सकता है।
अब योगी की 2 बड़ी बातें पढ़िए-
1- RSS को कोई फंड नहीं देता, बल्कि समाज के सहयोग से चल रहा धर्म की राह में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने हमेशा त्याग और समर्पण किया है। फल की चिंता किए बगैर कर्म करना चाहिए। RSS को कोई ओपेक (OPEC) देश, इंटरनेशनल चर्च फंड नहीं देता, बल्कि संघ समाज के सहयोग से चल रहा है।
2- हमने अपनी श्रेष्ठता का डंका कभी नहीं पीटा भारत ने कभी भी नहीं कहा कि हमारी ही उपासना विधि सबसे अधिक श्रेष्ठ है। हमने सब कुछ होते हुए भी कभी भी अपनी श्रेष्ठता का डंका नहीं पीटा। सनातन धर्म की यही परंपरा रही है। हमारे सामने जो भी आया, उसकी मदद की। कोई परेशानी में रहा तो उसे छांव दी। यही हमारे धर्म की श्रेष्ठता है। श्रीमद् भगवद्गीता भारत की प्रेरणा है। भारत में धर्म जीने की व्यवस्था है।
दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव के पल-पल अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग पढ़िए…
अपडेट्स
भारत में धर्मांतरण हुए, हमले हुए, लेकिन हम राम मंदिर पर झंडा फहराने वाले हैं
भागवत बोले- हमारा देश विश्व गुरु था। भारत में बाद में आक्रमण हुए, धर्मांतरण हुए, लेकिन आज भी भारत है। अब हम राम मंदिर पर झंडा फहराने वाले हैं। हमें अपनी चिंता ना करके धर्म की चिंता करनी है। लाभ, हानि यश-अपयश की चिंता छोड़कर देश और धर्म के लिए अपना कर्तव्य करते रहना है।
भगवत गीता सदैव के लिए एक दीप है। गीता के अनुसार जीकर अपने जीवन में परिवर्तन लाना है। ज्ञानानंदजी समेत उनके सभी अभिनन्दन के पात्र हैं। गीता को जीने पर हम यशस्वी भी होंगे और सार्थक भी।
जैसे अर्जुन मोहग्रस्त हुआ था, वैसे दुनिया आज हो गई है
भागवत ने कहा- जैसे अर्जुन मोहग्रस्त हुआ था, वैसे दुनिया आज हो गई है। दुनिया मोहग्रस्त, भयग्रस्त होकर बैठी है। कुछ सूझ नहीं रहा।
युगों-युगों से स्थिर हुए ज्ञान का सार है गीता
भागवत ने कहा- अर्थ, काम की कोई कमी नहीं, उसके बावजूद धर्म का पालन करने वाला हजारों साल तक जीता है। युगों-युगों से धर्म-ग्रंथों से जो ज्ञान स्थिर हुआ है, उसका सार श्रीमद्भगवद्गीता है।
मजबूत व्यक्ति जब मोहग्रस्त हुआ तब गीता का उपदेश किया गया
मोहन भागवत ने कहा- अर्जुन आसानी से मोहग्रस्त होने वाला व्यक्ति नहीं था। ऐसा मजबूत व्यक्ति जब मोहग्रस्त हो गया तब गीता का उपदेश दिया गया।
परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं, हम रहेंगे
मोहन भागवत ने राजा जनक की कहानी सुनाई। इसके जरिए बताया कि परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन हम बने रहते हैं। उन्होंने बताया- राजा जनक जंगल में भूखे-प्यासे भटक रहे होते हैं। उन्हें कहीं थोड़ा सा चावल मिलता है। उतना चावल भी एक चील आकर छुड़ा लेती है। इस पर राजा चिल्ला उठते हैं। इतने में ही राजा की नींद खुल जाती है। नौकर-चाकर भी जाग जाते हैं। वे सब पूछते हैं कि राजा साहब क्या हुआ? इस पर राजा बताते हैं कि ऐसा-ऐसा हुआ। मैंने उसे भी महसूस किया और जो अब है इसे भी महसूस कर रहा हूं। दोनों में सच क्या है?
इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा था तो महर्षि याज्ञवल्क्य ने कहा- उस समय तक वह भी सच था, इस समय यह सच है। कुछ देर में यह भी सच नहीं रह जाएगा। इसलिए परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन सच यह है कि हम हैं।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा तुम भाग रहे हो
मोहन भागवत ने बताया- जब अर्जुन ने कहा कि मैं युद्ध करूंगा तो बहुत हानि होगी। सृष्टि का नुकसान होगा। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम भाग रहे हो। सृष्टि किसने बनाई, किसको इसे समेटना है वह कर रहा है। तुम केवल युद्ध करो। परेशानी से आंख मिलाकर रखो। कहीं दाएं-बाएं नहीं देखना है।
गीता हर स्थिति में उपयोगी है : मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा- आप जितनी बार गीता पढ़ेंगे, हर बार नया अर्थ समझ में आएगा। उस समय आपकी स्थिति जैसी होगी, उसी की जरूरत के हिसाब से आपको गीता से समाधान मिल जाएगा। गीता हर स्थिति में उपयोगी है।
अपने धर्म में मरना अच्छा, लालच में दूसरा नहीं अपनाना चाहिए
सीएम योगी ने गीता के श्लोकों का अर्थ बताते हुए कहा कि अपने धर्म में मृत्यु का वरण करना श्रेयस्कर है। लालच में आकर दूसरा अपनाना महापाप है।
