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नारायण-सुधा मूर्ति का जाति जनगणना में शामिल होने से इनकार:सर्वेयर से कहा- हम पिछड़े वर्ग से नहीं; कर्नाटक सरकार बोली- मजबूर नहीं कर सकते

इंफोसिस के फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति, उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति ने कर्नाटक में चल रहे सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे यानी जाति जनगणना में भाग लेने से इनकार कर दिया है। कुछ दिन सर्वे करने वाले लोग उनके घर गए थे, तो उन्होंने कहा- हम अपने घर पर सर्वेक्षण नहीं करवाना चाहते है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सुधा मूर्ति ने सर्वे फॉर्म में जानकारी भरने से इनकार करते हुए एक घोषणापत्र पर साइन किए हैं। इसमें उन्होंने लिखा- हम किसी भी पिछड़े समुदाय से नहीं हैं। इसलिए, उन समुदायों के लिए कराए जा रहे सरकार के सर्वे में भाग नहीं लेंगे।

कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सुधा मूर्ति और उनके परिवार के रुख पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- सर्वे में भाग लेना या न लेना ऑप्शनल है। अगर कोई जानकारी नहीं देना चाहता है तो हम किसी को भी इसमें भाग लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

कर्नाटक में 22 सितंबर से 18 अक्टूबर तक जाति जनगणना

कर्नाटक में 22 सितंबर को जाति जनगणना शुरू हुई थी। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (KSCBC) इस सर्वे को करवा रहा है। इसे 7 अक्टूबर को खत्म करना था, लेकिन बाद में इसे 18 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 25 सितंबर को KSCBC को एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी करके यह बताने का निर्देश दिया था कि यह सर्वे ऑप्शनल हैं और किसी को भी अपनी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

7 करोड़ लोगों का सर्वे, राज्य के स्कूलों में एक महीने छुट्टी सर्वे की अनुमानित लागत 420 करोड़ रुपए है और इसमें 60 सवाल शामिल हैं। इसमें राज्य भर के लगभग 2 करोड़ घरों के लगभग 7 करोड़ लोगों को शामिल करने की योजना है। आयोग दिसंबर तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है।

जनगणना के लिए आंकड़ा जुटाने का काम राज्य के 1.75 लाख सरकारी कर्मचारियों को सौंपा गया है। इनमें ज्यादातर सरकारी स्कूल के टीचर हैं। वे घर-घर जाकर आंकड़े जुटा रहे हैं।

जनगणना में शिक्षकों की ड्यूटी लगने के कारण कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में 18 अक्टूबर तक छुट्टी घोषित कर दी गई है। डिप्टी CM शिवकुमार ने कहा था कि बच्चों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई एक्स्ट्रा क्लासेज लगाकर की जाएंगी।

कर्नाटक जाति जनगणना में यह भी होगा

  • हर घर को उसके बिजली मीटर नंबर के जरिए जियो-टैग किया जाएगा। उसे एक विशिष्ट घरेलू पहचान पत्र (UHID) दिया जाएगा।
  • डेटा कलेक्शन प्रोसेस के दौरान, राशन कार्ड और आधार डिटेल मोबाइल नंबरों से जोड़े जाएंगे।
  • सर्वे के दौरान घर पर न मिलने वालों और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर 8050770004 जारी किया गया है।

वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत को 2015 की प्रक्रिया पर आपत्ति थी कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 12 जून को एक नए सर्वे को मंजूरी दी थी, जिससे 2015 की प्रक्रिया अपने आप रद्द हो गई। इसके लिए कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 की धारा 11(1) का हवाला दिया गया।

राज्य पिछड़ा वर्ग सूची हर 10 साल में एक बार जारी की जाती है। कई समुदायों, खासकर कर्नाटक के दो प्रमुख समूहों, वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत ने 2015 के सर्वे पर आपत्ति जताई और इसे अवैज्ञानिक बताया था। साथ ही नए सिरे से गणना की मांग की गई थी।

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