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तमिलनाडु, एमपी के बाद केरल में कोल्ड्रिफ कफ सिरप बैन:यहां 10 बच्चों की जान गई; राजस्थान में 2 की मौत के बाद ड्रग कंट्रोलर सस्पेंड

तमिलनाडु, एमपी के बाद केरल में कोल्ड्रिफ कफ सिरप बैन:यहां 10 बच्चों की जान गई; राजस्थान में 2 की मौत के बाद ड्रग कंट्रोलर सस्पेंड

नई दिल्ली1 घंटे पहले
छिंदवाड़ा जिले के बड़कुही की रहने वाली डेढ़ साल की योगिता नागपुर में एक निजी अस्पताल में भर्ती थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

तमिलनाडु के बाद शनिवार को मध्य प्रदेश और केरल ने भी कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप को बैन कर दिया। इस सिरप से मध्यप्रदेश में 27 दिन में 10 बच्चों की मौत हो गई। इन सभी की उम्र एक से 5 साल के बीच है।

उधर, राजस्थान में डेक्सट्रोमेथोरपन हाइड्रोब्रोमाइड कफ सिरप और उसे बनाने वाली कंपनी केसंस फार्मा को भी प्रतिबंधित कर दिया गया। इस कंपनी का प्लांट जयपुर में है। इस सिरप से राजस्थान में 2 बच्चों की जान गई।

कोल्ड्रिफ (Coldrif) दवा की मैन्युफैक्चरिंग तमिलनाडु के कांचीपुरम में हो रही थी। बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। राज्य में इस दवा के थोक और रिटेल स्टॉक को सीज कर दिया गया है।

एमपी में कोल्ड्रिफ से 10 मौतें छिंंदवाड़ा में

जबलपुर के कटारिया फार्मास्यूटिकल ने छिंदवाड़ा में कफ सिरप सप्लाई की थी।

एमपी के छिंदवाड़ा में कप सिरप पीने से 10 बच्चों की मौत हुई है। पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। पहली मौत 7 सितंबर को हुई थी। इसके बाद 15 दिन में किडनी फेल होने से एक-एक कर 6 बच्चों की मौत हो गई।

एमपी स्टेट फूड एंड ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने शनिवार को बताया, “कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, इसकी मात्रा तय मात्रा से ज्यादा थी। इसी कारण यह सिरप विषैला पा गया।”

सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों की जांच शुरू की

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बच्चों की मौत की खबरों के बाद छह राज्यों में कफ सिरप और एंटीबायोटिक दवाएं बनाने वाली 19 कंपनियों के प्लांट में 3 अक्टूबर से निरीक्षण शुरू किया है। इसका उद्देश्य उन खामियों की पहचान करना है जिनके कारण दवा की क्वालिटी में कमी आई है।

राजस्थान के भरतपुर और सीकर में 2 मौतें

राजस्थान में कप सिरप पीने से भरतपुर और सीकर में एक-एक मौतें सामने आई हैं। शुरुआती जांच में Dextromethorphan hydrobromide syrup ip का नाम सामने आया। यह दवाई एक निजी फार्मा कंपनी केसंस फार्मा तैयार करती है। यहां भी बच्चों की मौत की वजह किडनी फेल होने की बात बताई गई।

इसके बाद शनिवार को सरकार एक्शन में आई। राजस्थान सरकार ने केसंस फार्मा की सभी 19 प्रकार की दवाइयों पर रोक लगा दी है। राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया। इससे पहले, शर्मा ने कंपनी को जांच में क्लीन चिट दी थी।

केसंस फार्मा कंपनी का प्लांट जयपुर में है।

तमिलनाडु में एमपी के पत्र के बाद 48 घंटों में एक्शन

एमपी के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्या ने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग ने दोनों कफ सिरप (coldrif व Nextro DS) का प्रोडक्शन रुकवाने के लिए तमिलनाडु और हिमाचल को पत्र लिखा है।

तमिलनाडु सरकार ने मप्र की ओर से पत्र मिलते ही 24 घंटे के भीतर कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) का सैंपल लेकर जांच कराई। इसमें डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) 48.6% मिला, जो एक विषैला पदार्थ है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। इसके तुरंत बाद पूरे तमिलनाडु में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DGHS ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाए तो उनका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है, उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए। उसे ​​उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नहीं दिया जाए। DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है।

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