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ओलिंपियन दीपक पूनिया ने सगाई की:पिता के प्रॉपर्टी डीलर दोस्त की बेटी से हुआ रिश्ता; सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही मंगेतर

ओलिंपियन दीपक पूनिया ने सगाई की:पिता के प्रॉपर्टी डीलर दोस्त की बेटी से हुआ रिश्ता; सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही मंगेतर

कृष्ण कुमार, बहादुरगढ़53 मिनट पहले
बहादुरगढ़ के छारा गांव के ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया की निलौठी गांव की शिवानी के साथ रिंग सेरेमनी हुई है।

हरियाणा में झज्जर के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय पहलवान और ओलिंपियन दीपक पूनिया जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। रविवार को बहादुरगढ़ में उनकी शिवानी के साथ रिंग सेरेमनी हुई। शिवानी निलौठी गांव की रहने वाली हैं। फिलहाल वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रही हैं। उनका सपना IAS अफसर बनने का है।

शिवानी और दीपक के पिता अच्छे दोस्त हैं। दोनों परिवारों ने दोस्ती को आगे बढ़ाते हुए दोनों बच्चों का रिश्ता तय किया है। रविवार को हुए रिंग सेरेमनी प्रोग्राम में सिर्फ दोनों परिवार और करीबी ही शामिल हुए। दीपक के पिता का कहना है कि जल्द ही दोनों परिवारों की सहमति से शादी की तारीख तय की जाएगी।

दीपक-शिवानी की रिंग सेरेमनी के PHOTOS…

शिवानी और ओलिंपियन दीपक पूनिया।
रिंग सेरेमनी के लिए फोटोशूट कराती शिवानी।

रोहतक के जाट कॉलेज से MA की शिवानी के पिता अनूप प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ खेती करते हैं। अनूप ने बताया कि मेरे 2 बच्चे हैं। शिवानी बड़ी बेटी है। छोटा बेटा 9वीं क्लास में पढ़ता है। मेरी पत्नी हाउस वाइफ हैं। शिवानी ने रोहतक के जाट कॉलेज से इंग्लिश में MA की है। इसके अलावा वह बीएड भी कर चुकी है।

शिवानी बोलीं- दोनों परिवारों की रजामंदी से हुआ रिश्ता वहीं शिवानी ने बताया कि मेरा खेलों से कोई नाता नहीं रहा है। मैं शुरू से ही पढ़ाई में ध्यान रखती आई हूं। अब मेरा लक्ष्य IAS बनने का है। इसके लिए मैं सेल्फ स्टडी कर रही हूं। मेरे पापा दीपक के पिता के साथ 6-7 साल से साथ में काम कर रहे हैं। दोनों परिवारों ने आपसी रजामंदी से यह रिश्ता हुआ है। फिलहाल शादी की कोई डेट फिक्स नहीं की गई है।

कुश्ती प्रतियोगिता में जीत हासिल करने के बाद दीपक का अपनी मां के साथ फाइल फोटो।

दीपक पूनिया का केतली पहलवान से ओलिंपियन तक का सफर जानिए…

झज्जर जिले के छारा गांव में जन्म, दंगल से शुरुआत दीपक पूनिया का जन्म 19 मई, 1999 को झज्जर जिले के छारा गांव में हुआ। बचपन से ही कुश्ती उनके खून में रही, क्योंकि उनके पिता सुभाष भी स्थानीय स्तर पर पहलवान रहे। दीपक को महज 5 साल की उम्र में अखाड़े में दाखिल कराया गया। इसी दौरान उन्हें गांव में “केतली पहलवान” का उपनाम मिला, क्योंकि उन्होंने एक बार दूध पीते-पीते पूरी केतली (बर्तन) ही खाली कर दी थी।

बचपन के दंगल मुकाबलों से लेकर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम तक दीपक का सफर यादगार रहा। पारंपरिक मिट्टी के अखाड़े से निकलकर जब उन्होंने मैट पर कदम रखा तो जल्दी ही खुद को अनुकूलित किया और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन किया।

महाकुंभ में स्नान के दौरान का पहलवान दीपक पूनिया का फाइल फोटो।

टोक्यो ओलिंपिक में मामूली अंतर से कांस्य से चूके टोक्यो ओलिंपिक 2021 में दीपक कांस्य पदक मुकाबले में मामूली अंतर से हारकर पांचवें स्थान पर रहे। यह हार उनके लिए भावनात्मक रही, क्योंकि कुछ ही महीने पहले उन्होंने अपनी मां को खो दिया था और वे पदक उन्हें समर्पित करना चाहते थे। मगर, इस हार ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। एक साल बाद 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

छत्रसाल स्टेडियम में कर रहे अभ्यास, पिता हर रोज दूध खुद भेज रहे दीपक पूनिया वर्तमान में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटे हैं। अब निजी जीवन की नई शुरुआत के साथ खेल मैदान पर भी उनके प्रदर्शन से देशवासियों को नई उम्मीदें हैं।

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