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मेट्रो में सवार हुए कमिश्नर…सुभाषनगर-एम्स स्टेशन देखे:पैसेंजर की सुविधा-सुरक्षा कैसी? ये जाना; भोपाल में अक्टूबर से चलेगी मेट्रो

मेट्रो में सवार हुए कमिश्नर…सुभाषनगर-एम्स स्टेशन देखे:पैसेंजर की सुविधा-सुरक्षा कैसी? ये जाना; भोपाल में अक्टूबर से चलेगी मेट्रो

भोपाल4 घंटे पहले
कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम इसी ट्रेन में सवार हुई और कई पैमानों पर निरीक्षण किया।

भोपाल में मेट्रो के कमर्शियल रन के लिए अहम कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम गुरुवार को भोपाल पहुंची। सुबह कमिश्नर जनक कुमार गर्ग सुभाषनगर स्थित मेट्रो डिपो पहुंचे। करीब तीन घंटे तक निरीक्षण के बाद वे मेट्रो में सवार हुए। प्रॉयोरिटी कॉरिडोर के 6.22 किलोमीटर रूट का उन्हें ट्रेन में सवार होकर निरीक्षण किया। इस दौरान सुभाषनगर स्टेशन पर करीब 30 मिनट और एम्स स्टेशन पर सवा घंटे रुके।

मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ‘ओके’ रिपोर्ट मिलने के बाद ही कमर्शियल रन यानी, आम लोगों के लिए मेट्रो दौड़ना शुरू होती है। मेट्रो अफसरों की माने तो ये टीमें ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल, इंट्री-एग्जिट गेट, डिपो तक देखेगी। निरीक्षण में यदि सबकुछ पैमाने और सुरक्षा के लिहाज से परफेक्ट मिलता है तो सीएमआरएस की टीम ‘ओके’ रिपोर्ट देगी। इसके बाद कमर्शियल रन की तारीख तय कर दी जाएगी। एक दिन के निरीक्षण के बाद टीम वापस लौट गईं।

भोपाल में सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो का ट्रायल रन किया जा रहा है।

मुंबई से आई है टीम सीएमआरएस की टीम मुंबई से आई है। इस टीम के जिम्मे डिपो और गाड़ी है। डिपो में मेट्रो की सभी जरूरतें जानी जा गई हैं। वहीं, मेट्रो के अंदर फंक्शन, सॉफ्टवेयर के बारे में जान रही है। यदि कहीं कोई खामी मिलती है तो उसे तुरंत सुधरवाएगी। इसके बाद दूसरी टीम ट्रैक का निरीक्षण करेगी। हर वो बात जानेगी, जो मेट्रो के संचालन के लिए जरूरी है। टीम ट्रैक के नट-बोल्ट तक देखती है, क्योंकि यह मामला आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा होता है। इसलिए हर पैमाने पर जांच होती है।

ट्रेन में ये देखा

  • मेट्रो ट्रेन के कोच में क्या-क्या सुविधाएं हैं?
  • यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन है या नहीं?
  • सीसीटीवी कैमरे, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, वातानुकूलित कोच, चार्जिंग पॉइंट और वास्तविक समय यात्री सूचना प्रणाली आदि भी देखा।

डिपो में यह देखा

  • ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC) कैसा है। बिजली की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं?
  • अनुरक्षण बे, स्टेबलिंग लाइन, रिपेयर-बे आदि।
  • फायर सेफ्टी के क्या-क्या इंतजाम है?

निरीक्षण की ये तस्वीरें…

मेट्रो कमिश्नर जनक कुमार गर्ग मेट्रो में सवार हुए और निरीक्षण किया।
मेट्रो स्टेशन के बारे में जानकारी लेते कमिश्नर जनक कुमार गर्ग।
मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण करते कमिश्नर जनक कुमार गर्ग।
कमिश्नर ने सुभाषनगर स्थित मेट्रो डिपो भी देखा।

ये अधिकारी रहे मौजूद मेट्रो एमडी एस. कृष्ण चैतन्य, सिस्टम निदेशक अरुण कुमार श्रीवास्तव समेत मेट्रो से जुड़े सभी अधिकारी मौजूद थे।

भोपाल मेट्रो को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी निरीक्षण कर चुके हैं।

अक्टूबर में कमर्शियल रन प्रस्तावित बता दें कि अक्टूबर में मेट्रो का कमर्शियल रन प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। वहीं, वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। 31 मई को इंदौर मेट्रो को भोपाल से हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद से भोपाल मेट्रो को लेकर तेजी से काम शुरू हो गया। मेट्रो के जिन 3 स्टेशन के काम बचे हैं, उन पर फोकस किया जा रहा है।

आरडीएसओ से मिल चुकी ओके रिपोर्ट भोपाल मेट्रो के लिए सबसे पहले रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम आ चुकी है। इस टीम की रिपोर्ट ओके आई। इसके निरीक्षण के बाद सीएमआरएस को डॉक्युमेंट्स सबमिट किए गए। फिर निरीक्षण की तारीख 25-26 सितंबर फाइनल हुई।

साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सुभाष नगर से आरकेएमपी स्टेशन तक काम पूरा हो चुका है। इसके आगे अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशन के कुछ काम बाकी है, जो पूरे किए जा रहे हैं। रेल ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं।

दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।

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