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पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त बोले-राहुल के आरोपों की जांच हो:इलेक्शन कमीशन अपमान कर रहा; SIR मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने जैसा

पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने रविवार को चुनाव आयोग की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि आयोग को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों की जांच करवानी चाहिए थी, न कि उनके खिलाफ ‘आपत्तिजनक और अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए था।

कुरैशी ने PTI को दिए इंटरव्यू में कहा कि राहुल ने आरोप लगाते समय कई राजनीतिक शब्दों का इस्तेमाल किया था जैसे ‘हाइड्रोजन बम’ लेकिन यह महज ‘राजनीतिक बयानबाजी’ है। इसके बावजूद उन्होंने जो गंभीर शिकायतें उठाई हैं, उनकी विस्तार से जांच होनी चाहिए थी।

कुरैशी ने बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि इससे आयोग ने ‘भानुमती का पिटारा’ खोल दिया है और ‘मधुमक्खी के छत्ते’ में हाथ डाल दिया है, जिससे खुद संस्था की साख को नुकसान होगा। चुनाव आयोग को निष्पक्ष होने के साथ-साथ निष्पक्ष दिखना भी जरूरी है।

किस मुद्दे पर क्या कहा…

राहुल पर कार्रवाई: कुरैशी ने कहा कि राहुल विपक्ष के नेता हैं और करोड़ों लोगों की आवाज उठाते हैं। ऐसे में आयोग को उनसे ‘शपथपत्र दीजिए, वरना कार्रवाई होगी’ जैसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि सामान्य प्रक्रिया शिकायत पर जांच करवाने की होती है, डराने की नहीं।

SIR पर सवाल: उन्होंने एसआईआर को खतरनाक कदम बताया। उनके अनुसार 3 दशक में जो काम धीरे-धीरे हुआ था, उसे कुछ महीनों में बदलने की कोशिश गलत है और इससे विवाद और त्रुटियां बढ़ेंगी। उन्होंने मतदाता पहचान पत्र (एपिक) को दस्तावेजों की सूची से बाहर करने को भी गंभीर चूक बताया और कहा कि यह आयोग की अपनी ही पहचान है जिसे नकारने से लोकतंत्र पर असर पड़ेगा।

विपक्ष के साथ व्यवहार: कुरैशी विपक्ष के साथ आयोग के व्यवहार को लेकर उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना था कि विपक्ष को सुनना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है, लेकिन आज हालात यह हैं कि 23 दलों को कहना पड़ा कि उन्हें आयोग से मिलने का समय नहीं मिल रहा। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

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