चुनाव से पहले होने वाले अफसरों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने शनिवार (24 फरवरी) को राज्यों को निर्देश दिए हैं। इलेक्शन कमीशन ने कहा कि जिस जिले में अधिकारी का ट्रांसफर किया जा रहा है, वो उसी संसदीय क्षेत्र में ना आता हो, जहां अधिकारी पहले पोस्टेड था। चुनाव आयोग ने राज्यों से यह भी कहा कि इस निर्देश का पालन सही भावना के साथ हो।
ट्रांसफर को लेकर अभी क्या पॉलिसी है?
EC की नीति के मुताबिक, जो अफसर अपने होम डिस्ट्रिक्ट में पोस्टेड हैं, या फिर एक ही जगह पर 3 साल पूरे कर चुके हैं, उनका लोकसभा या विधानसभा चुनाव से पहले ट्रांसफर कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए ताकि ये अफसर किसी पार्टी या कैंडिडेट के फायदे के लिए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित ना कर सकें।
पॉलिसी में अब क्या बदलाव किया है?
इलेक्शन कमीशन ने चुनावों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपनी मौजूदा पॉलिसी को और मजबूत करने का फैसला किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त रजीव कुमार ने शनिवार को कहा कि किसी जिले से बाहर ट्रांसफर किए जा रहे अफसर का ट्रांसफर एक ही संसदीय क्षेत्र में ना किया जाए।
राज्य सिर्फ यह दिखलाने के ट्रांसफर ना करें कि उन्होंने निर्देशों का पालन किया है। सही भावना के साथ इन निर्देशों को लागू किया जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये नियम उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में लागू नहीं होगा, जहां सिर्फ 2 लोकसभा सीटें हैं।
चुनाव आयोग ने नए निर्देश क्यों दिए?
EC के मुताबिक, ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अफसरों का तबादला एक जिले से आसपास के किसी जिले में कर दिया गया, लेकिन दोनों ही जिले एक ही संसदीय क्षेत्र में आ रहे थे। आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। आयोग के मुताबिक राज्य सरकारें पॉलिसी में इन कमियों का फायदा उठा रहे थे। आयोग ने कहा कि चुनाव को प्रभावित करने के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है।
