खड़गे बोले-भाजपा की वोट चोरी के बाद अब सत्ता चोरी:30 दिन में विपक्षी सरकारें गिराने की साजिश कर रही; PM-CM बर्खास्तगी बिल का विरोध
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- भाजपा ‘वोट चोरी’ के बाद अब ‘सत्ता चोरी’ में लगी है। लोकसभा में पेश PM-CM की बर्खास्तगी का बिल विपक्षी सरकारों को 30 दिन में गिराने और लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश हैं।
खड़गे ने आरोप लगाया कि यह बिल नागरिकों से अपनी चुनी हुई सरकार बनाने या हटाने का अधिकार छीन लेगा। ये लोग (केंद्र सरकार) ED-CBI जैसी एजेंसियों को अधिकार सौंप देते हैं। ऐसा होना लोकतंत्र पर बुलडोजर चलाने जैसा है।
खड़गे ने कहा- मोदी जी जिन लोगों को पहले भ्रष्ट कहते थे, आज उन्हें मंत्री बना दिया। 193 केसों में ED ने विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई की, लेकिन सिर्फ 2 में ही सजा हुई।
उन्होंने कहा कि मानसून सत्र में विपक्ष चाहता था कि SIR (Special Intensive Revision यानी बिहार में वोटर वेरिफिकेशन) और वोट चोरी जैसे मुद्दों पर चर्चा हो, लेकिन सरकार ने टाल दिया। भाजपा वोटर लिस्ट में धांधली करके कांग्रेसी वोट कटवाने की कोशिश में है।
दरअसल, खड़गे ने रविवार को दिल्ली में इंदिरा भवन में हरियाणा-मध्यप्रदेश के जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्षों की मीटिंग ली। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा- फूट डालो और राज करो की राजनीति कांग्रेस में नहीं चलनी चाहिए।
खड़गे बोले- संगठन को मजबूत बनाने की जरूरत
हरियाणा-मध्यप्रदेश के जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्षों की मीटिंग में खड़गे ने कहा- कांग्रेस ने लंबे समय तक देश पर राज इसलिए किया, क्योंकि संगठन मजबूत था। अब उसी पर वापस लौटने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि DCC अध्यक्ष बूथ और मंडल स्तर पर कमेटियां बनाते समय सिर्फ वफादार और मेहनती कार्यकर्ताओं को जगह दें। फूट डालो और राज करो की राजनीति कांग्रेस में नहीं चलनी चाहिए।
वहीं, राहुल गांधी ने भी DCC प्रेसिडेंट्स ट्रेनिंग प्रोग्राम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और जनता की आवाज उठाने की दिशा में अहम कदम है।
शाह ने 20 अगस्त को लोकसभा में बिल पेश किया था
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और लगातार 30 दिन हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले बिल पेश किया था। इस दौरान विपक्ष के भारी विरोध और हंगामा किया। कुछ सदस्यों ने बिल की कॉपियां फाड़ दीं।
21 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने शोर-शराबे के बीच इन्हें राज्यसभा में रखा था। अगले दिन गंभीर आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन बाद पद से हटाने से जुड़े इन 3 बिलों संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया।
JPC में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में सौंपी जाएगी। बिल के प्रावधानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। वहीं, संविधान के 130वें संशोधन बिल पर विशेषज्ञों की राय भी बंटी है।
एक वर्ग इसे राजनीति के शुद्धिकरण के तौर पर देख रहा है। वहीं, कानूनी बिरादरी से जुड़े वर्ग का कहना है कि राज्यों में विपक्षी सरकार को अस्थिर करने या राजनीतिक बदले की भावना से एक्ट के दुरुपयोग की आशंका रहेगी। यही वजह है कि इसे आसानी से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। पूरी खबर
