सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर जहां से उठाया है, वहीं वापिस छोड़ दिया जाए। हालांकि, रेबीज से संक्रमित और आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाए।
कोर्ट ने आदेश दिया कि कुत्तों को पब्लिक प्लेस में खाना न दिया जाए और नगर निगम इसके लिए अलग जगह बनाए। कोर्ट ने कहा कि ये आदेश दिल्ली समेत पूरे देश में लागू होगा। साथ ही याचिका में शामिल व्यक्ति 25 हजार और NGO 2 लाख रुपए कोर्ट में जमा कराएं।
कोर्ट ने 11 अगस्त के 2 जजों की बेंच के उस आदेश को बेहद कठोर बताया, जिसमें सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों में दिल्ली-NCR के आवासीय क्षेत्रों से हटाकर हमेशा के लिए शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।
जस्टिस विक्रम नाथ,जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने 14 अगस्त को डॉग लवर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
सुप्रीम कोर्ट बोला- नेशनल लेवल पर पॉलिसी जरूरी, अब अक्टूबर में सुनवाई
- जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा- इसके लिए नेशनल लेवल पर पॉलिसी बननी चाहिए। हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है।
- देश के बाकी हाईकोर्ट में जहां भी मामले लंबित हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद अक्टूबर के लिए लिस्ट कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिएक्शन
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। यह पशु कल्याण और जन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक कदम है।
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, पिछला आदेश न केवल अमानवीय था, बल्कि उस मानवीय उद्देश्य के भी खिलाफ था जिस पर सभी विश्वास करते हैं। मुझे यकीन है कि हर सभी इससे सहमत होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए गलत फैसले को ठीक कर दिया है।
भाजपा नेता मेनका गांधी ने कहा, मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। जहां तक बात खूंखार कुत्तों की है। अदालत ने इसकी पहचान नहीं बताई है। इसे परिभाषित करने की जरूरत है।
