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कर्नाटक में SC आरक्षण में सब कोटा लागू होगा:राज्य सरकार आज विधानसभा में बिल ला सकती; ऐसा करने वाला चौथा राज्य

कर्नाटक में SC आरक्षण में सब कोटा लागू होगा:राज्य सरकार आज विधानसभा में बिल ला सकती; ऐसा करने वाला चौथा राज्य

बेंगलुरु4 घंटे पहले
सिद्धारमैया सरकार ने नवंबर, 2024 में SC जातियों का डेटा जुटाने के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाया था।

कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के अंदर सब कोटा बनाने के लिए आज विधानसभा में बिल आ सकता है। राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को 17% SC आरक्षण तीन हिस्सों में बांटने वाले इस बिल को मंजूरी दी थी।

SC ही इसकी मांग कर रही थीं। जातियों का एक वर्ग आरोप लगाता है कि कुछ रसूखदार उपजातियों को ही रिजर्वेशन का फायदा मिलता है। कई उपजातियों तक रिजर्वेशन का फायदा पहुंचा ही नहीं। इस वजह से वे आज भी हाशिए पर हैं।

सिद्धारमैया सरकार ने नवंबर, 2024 में SC जातियों का डेटा जुटाने के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाया था। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एचएन नागमोहन दास को इसका जिम्मा सौंपा गया था। यह फैसला इसी आयोग के सुझाव पर किया गया। हालांकि, आयोग ने आरक्षण को पांच हिस्सों में बांटने की सिफारिश की थी।

सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय बेंच ने 1 अगस्त, 2024 को SC आरक्षण में सब-कोटा को संविधानिक रूप से सही ठहराया था। बिल पास होने के बाद कर्नाटक ऐसा चौथा राज्य बन जाएगा जहां SC आरक्षण में सब-कोटा लागू होगा। तेलंगाना, हरियाणा और आंध्र प्रदेश SC आरक्षण में सब-कोटा लागू कर चुकी हैं।

क्या है दलित राइट और दलित लेफ्ट समूह दलित राइट समूह में शामिल जातियां धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर जोर देता है। ये जातियां आर्थिक रूप से मजबूत मानी जाती हैं। अभी राज्य सरकार की ओर से मिलने वाले SC आरक्षण में इन जातियों का दबदबा रहता है। इनमें मैडिगा जैसी जातियां शामिल हैं।

वहीं, दलित लेफ्ट समूह में शामिल जातियां जाति व्यवस्था और भेदभाव को खत्म करने के लिए क्रांतिकारी बदलावों का समर्थन करती हैं। इनमें होलिया जैसी जातियां शामिल हैं। इनके अलावा शेष जातियां अन्य की श्रेणी में आती हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लेफ्ट और राइट हैंड जातियों की अवधारणा मध्यकाल से चली आ रही है। यह कभी दक्षिण भारत के ज्यादातर हिस्सों में थी। कर्नाटक में जिन लोगों को लेफ्ट जातियों का माना जाता है, वे राइट जातियों की तुलना में ज्यादा पीड़ित थे। राइट जातियों के पास कुछ विशेषाधिकार थे।

कुछ जातियां आयोग की सिफारिशों के खिलाफ दास आयोग ने बीते 4 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद कुछ जातियों ने आयोग की सिफारिश पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

कर्नाटक राज्य बलगाई संबंधित जातिगाला ओक्कूटा नामक संगठन ने आरोप लगाया कि अरया, आदि कर्नाटक, आदि द्रविड़, आदि आंध्र, होलार जैसी जातियां दलित राइट समूह का हिस्सा हैं लेकिन आयोग ने इन्हें इस समूह से बाहर रखा है।

वहीं, बलगाई जाति के लोगों ने आरोप लगाया कि आयोग ने उनकी जनसंख्या के गलत आंकड़े पेश किए हैं। इन्हें 50 लाख से घटाकर 20 लाख दिखाया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े कर्नाटक सरकार जातीय गणना पर आधारित हैं।

भाजपा सरकार ने भी कोटे में कोटा लागू किया था राज्य में पिछली भाजपा सरकार ने भी कोटे के अंदर कोटा देना तय किया था। इसके लिए केंद्र सरकार से दलित लेफ्ट के लिए 6%, दलित राइट के लिए 5.5%, अछूत (बंजारा, भोवी, कोरचा, कुरुमा) के लिए 4.5% और अन्य के लिए 1% रिजर्वेशन तय करने की सिफारिश की थी।

हरियाणा CM सैनी ने भी SC कोटे में कोटा लागू किया

कैबिनेट मीटिंग के बाद CM नायब सिंह सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बैठक में हुई फैसलों की जानकारी दी थी।

हरियाणा में भाजपा के तीसरी बार सरकार बनाने के बाद सीएम नायब सिंह सैनी ने 19 अक्टूबर, 2024 को पहली कैबिनेट मीटिंग में SC कोटे में कोटा देने का फैसला किया था। राज्य में SC के लिए 15% और ST के लिए 7.5% आरक्षण था। इस 22.5% आरक्षण में ही राज्य के SC व ST के उन वर्गों का कोटा तय होता है, जिनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है।

इससे अनुसूचित वर्ग की जो जातियां ज्यादा पिछड़ी रह गई हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया, सरकारी नौकरियों में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, उन्हें सब-क्लासिफिकेशन के जरिए उसी कोटे में प्राथमिकता दी जा सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट ने अपना 20 साल पुराना फैसला पलटकर मंजूरी दी थी

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 1 अगस्त को राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर सब-क्लासिफिकेशन करने का संवैधानिक अधिकार दिया था। ताकि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से ज्यादा पिछड़ी जातियों को रिजर्वेशन दिया जा सके।

सात जजों की संविधान पीठ ने 6:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था। पीठ ने साल 2004 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश मामले में पांच जजों की संविधान पीठ का फैसला खारिज किया था।

​​साल 2004 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अनुसूचित जातियां खुद में एक समूह हैं, इसमें शामिल जातियों में जाति के आधार पर और बंटवारा नहीं किया जा सकता। पूरी खबर पढ़ें…

नए फैसले में सुप्रीम कोर्ट की दो हिदायतें

  • पहली: राज्य अनुसूचित जाति के भीतर किसी एक जाति को 100% कोटा नहीं दे सकते।
  • दूसरी: राज्य अनुसूचित जाति में शामिल किसी जाति का कोटा तय करने से पहले उसकी हिस्सेदारी का पुख्ता डेटा जुटाएं।

केंद्र का फैसला- ​​​​​SC-ST रिजर्वेशन में क्रीमी लेयर लागू नहीं होगा

लोकसभा और राज्यसभा के 100 SC-ST भाजपा सांसदों ने 9 अगस्त, 2024 को संसद भवन में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी।

अनुसूचित जाति और जनजातियों (SC-ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर को लागू नहीं किया जाएगा। PM नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त को, 2024 संसद भवन में उनसे मिलने आए 100 दलित सांसदों को यह आश्वासन दिया था। देर शाम केंद्र ने इसकी घोषणा भी कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने 1 अगस्त, 2024 को टिप्पणी की थी कि SC-ST में भी क्रीमी लेयर लागू करने पर विचार करना चाहिए। इसे लेकर दलित सांसदों ने PM से मिलकर अपनी चिंता जताई थी।

9 अगस्त 2024 की शाम को कैबिनेट मीटिंग हुई थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि NDA सरकार बीआर अंबेडकर के बनाए गए संविधान से बंधी है। इस संविधान में SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

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