प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्रचारी से पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जिक्र किया। उन्होंने 79वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में कहा- आज गर्व के साथ मैं इस बात का जिक्र करना चाहता हूं कि 100 साल पहले एक संगठन आरएसएस का जन्म हुआ। 100 साल की राष्ट्र सेवा गौरवपूर्ण है।
उन्होंने कहा- आरएसएस ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल मां भारती के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन जिसकी पहचान रही है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा NGO है।
इसपर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा- प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आरएसएस का जिक्र उन्हें खुश करने के लिए किया, क्योंकि मोदी अब पूरी तरह उनके भरोसे हैं। सितंबर के बाद जब वे 75 साल के हो जाएंगे, तो पद पर बने रहे के लिए मोहन भागवत की मदद पर निर्भर हैं।
वहीं RJD नेता मनोज ने कहा, ‘प्रधानमंत्री हर बार निराश करते हैं। RSS एक सांस्कृतिक संगठन है, आजादी में उसकी भूमिका का मूल्यांकन देश के प्रधानमंत्री को करना चाहिए। आज फर्क करना मुश्किल हो गया कि चुनावी भाषण है या लाल किले की प्राचीर से देश के लिए संबोधन है।’
भागवत बोले- भारत का लक्ष्य दुनिया में शांति-सुख लाना
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने ओडिशा में उत्कल बिपन्न सहायता समिति में तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा- भारत एक अनोखा देश है। इसका लक्ष्य दुनिया में शांति-सुख लाना और अपना धर्म साझा करना है। हम स्वतंत्र इसलिए हुए ताकि देश के हर व्यक्ति को सुख, साहस, सुरक्षा, शांति और सम्मान मिल सके।
भागवत ने कहा- आज दुनिया डगमगा रही है। पिछले 2000 साल में कई प्रयोग हुए, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं मिला। हमारा कर्तव्य है कि हम दुनिया को समाधान दें और धार्मिक मूल्यों पर आधारित एक नया, सुखी और शांतिपूर्ण विश्व बनाएं।
स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी 103 मिनट बोले
79वें स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी ने लालकिले पर लगातार 12वीं बार तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया। PM ने 103 मिनट के भाषण की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर से की। इस पर 13 मिनट से ज्यादा बोले।
उन्होंने आतंकवाद, सिंधु समझौता, आत्मनिर्भरता, मेड इन इंडिया, नक्सलवाद और अवैध घुसपैठियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने पहली बार लाल किले से RSS का जिक्र किया
