अहमदाबाद प्लेन क्रैश- ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग बंद हुई थी:आखिरी 10 मिनट का डेटा नहीं; सवाल-पावर सप्लाई देने वाला ‘रिप्स’ क्या पहले से बंद था
12 जून को अहमदाबाद में क्रैश हुए एअर इंडिया के विमान AI-171 (बोइंग 787-8) की जांच में ब्लैक बॉक्स की एक ‘चुप्पी’ ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
विमान की पावर सप्लाई बंद होने या फिर क्रैश होने के 10 मिनट बाद तक की हरेक बातचीत, तकनीकी समस्या ब्लैक बॉक्स में रिकॉर्ड होती है। लेकिन, AI-171 की क्रैश लैंडिंग में ऐसा नहीं हुआ। यह खुलासा एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की हादसे पर बनी प्रारंभिक रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट की पड़ताल में पता चला कि AI-171 का आखिरी मेडे कॉल भारतीय समयानुसार 13:39:05 बजे आया और विमान 13:39:11 बजे क्रैश हुआ। ठीक इसी समय ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग भी बंद हो गई।
यहीं से गड़बड़ी की आशंका सामने आ रही है, क्योंकि क्रैश के बाद रिप्स सिस्टम से ब्लैक बॉक्स में रिकॉर्डिंग होनी चाहिए थी। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन और फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के नियमानुसार यह अनिवार्य है।
रिप्स से रिकॉर्डर को पावर सप्लाई बंद हो गई थी
बोइंग-787 जैसे विमानों में आगे की तरफ इनहेंस्ड एयरबोर्ड फ्लाइट रिकॉर्डर में रिप्स सिस्टम लगे हैं, लेकिन AI-171 की क्रैश लैंडिंग के साथ ही रिप्स से रिकॉर्डर को पावर सप्लाई बंद हो गई थी। अगर रिप्स फेल हो जाए तो जांचकर्ताओं को आखिरी पलों की कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं मिलती।
ब्लैक बॉक्स में उसी वक्त तक की रिकॉर्डिंग है, जब इंजन दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश हो रही थी। रिप्स कैसे फेल हुआ? गड़बड़ी कहां से आई? इस पर अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
एक्सपर्ट बोले- विमान हादसे के बेहद अहम मिनटों के सबूत गुम हैं सिविल एविएशन कंपनी सेफ्टी मैटर्स के संस्थापक अमित सिंह ने कहा कि उस विमान हादसे के 10 बेहद अहम मिनटों के सबूत गुम हो गए हैं। इससे ब्लैक बॉक्स की विश्वसनीयता तथा ‘चेन ऑफ कस्टडी’ अब संदेह के घेरे में है।
क्या रिकॉर्डर सिर्फ विमान की पावर से चल रहा था और ‘रिप्स’ चालू ही नहीं हुआ? दुर्घटना में विमान इस कदर क्षतिग्रस्त हो गया कि रिप्स भी निष्क्रिय हो गया? यह गड़बड़ी सिर्फ तकनीकी नहीं, यह रेगुलेटरी उल्लंघन भी है, क्योंकि ‘रिप्स’ कोई विकल्प नहीं, यह अनिवार्य सुरक्षा प्रणाली है।
कैप्टन के पिता ‘मौन’, कुंदर के परिवार ने घर छोड़ा
एआई-171 विमान क्रैश में कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट फ्लाइट ऑफिसर क्लाइव कुंदर भी नहीं बचे। ऊपर से विदेशी मीडिया ने बिना किसी सबूत के हादसे की मनमानी थ्योरी गढ़ते हुए पायलट्स पर दोष मढ़ने की कोशिश की। इससे मुंबई के पवई के जलवायु विहार और गोरेगांव वेस्ट की सनटेक सिटी में रहने वाले लोग उदास हैं। दोनों पायलट यहीं रहते थे।
जब सुमीत के घर पहुंचा तो बुजुर्ग पिता पुष्पराज सभरवाल ने बात नहीं की। वहीं, कुंदर का परिवार घर नहीं मिला। पड़ोसियों ने बताया कि वो लोग कहीं चले गए हैं। भास्कर ने पड़ोसियों और दोनों पायलट्स के साथ काम कर चुके साथियों से बातचीत की।
सहयोगी बोले- सुमीत ईमानदार और प्रोफेशनल थे
सुमीत के पूर्व सहकर्मी नील पाइस ने बताया कि उन्होंने सितंबर 2024 में ही अपनी आखिरी क्लास-वन मेडिकल परीक्षा पास की थी, जो एक पायलट की मनो-शारीरिक फिटनेस की जांच करती है। सुमित शांत, विनम्र और जिम्मेदार पायलट थे, जिनके साथ उड़ान भरी जा सकती थी।
मां की मृत्यु के बाद वो मुंबई में पिता की देखभाल के लिए आ गए थे। यहीं बसने की तैयारी में थे। पत्नी से अलग होने के बाद भी कभी कोई शिकायत नहीं की। पता नहीं, विदेशी मीडिया उन पर अंगुली क्यों उठा रहा है?
एक और सहयोगी रजनीश शर्मा ने बताया कि हमें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं है, लेकिन मैं यह पूरी ईमानदारी से कह सकता हूं कि सुमीत ईमानदार और प्रोफेशनल थे। उन्होंने जीवन में कभी शराब नहीं पी। हमेशा खुश रहते थे।
बहिन बोली- कुंदर का जीवन रंगों से भरा था
फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर को जानने वाले बताते हैं कि वह गोवा मूल के थे और हाल ही में उन्होंने गोरेगांव वेस्ट की सनटेक सिटी में नया अपार्टमेंट लिया था। उनकी कोई भी मानसिक समस्या की जानकारी अब तक सामने नहीं आई है।
उनकी बहन बातचीत में केवल इतना कहा- कुंदर का जीवन रंगों से भरा था और वह मजबूत इंसान थे। बहन ने नाम न छापने की रिक्वेस्ट भी की।
प्लेन क्रैश कैसे हुआ, ग्राफिक्स से समझें
एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI-171 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही थी। इसमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक समेत कुल 230 यात्री सवार थे। इनमें 103 पुरुष, 114 महिलाएं, 11 बच्चे और 2 नवजात शामिल हैं। बाकी 12 क्रू मेंबर्स थे। हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का भी निधन हो गया।
पायलट ने मेडे कॉल किया था
फ्लाइटरडार 24 के मुताबिक, विमान का आखिरी सिग्नल 190 मीटर (625 फीट) की ऊंचाई पर मिला, जो उड़ान भरने के तुरंत बाद आया था। भारत के सिविल एविएशन रेगुलेटर DGCA ने बताया कि विमान ने 12 जून की दोपहर 1:39 बजे रनवे 23 से उड़ान भरी थी।
उड़ान भरने के बाद विमान के पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को मेडे कॉल (इमरजेंसी मैसेज) भेजा, लेकिन इसके बाद कोई जवाब नहीं मिला। DGCA के अनुसार, विमान में दो पायलट और 10 केबिन क्रू सहित कुल 242 लोग सवार थे। पायलट के पास 8,200 घंटे और को-पायलट के पास 1,100 घंटे की उड़ान का अनुभव था।
