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खालिस्तानी सांसद अमृतपाल पर जेल में नशा करने के आरोप:पुलिस चालान में फौजी-बाजेके के हवाले से दावा, वकील बोले- बदनाम करने की नीयत

खालिस्तान समर्थक और पंजाब की खडूर साहिब सीट के निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह के साथियों ने पुलिस को बयान दिए हैं कि वह नशे का सेवन करते हैं। सूत्रों से पता चला है कि अजनाला अदालत में पुलिस द्वारा पेश किए गए चालान में इस बात का जिक्र हुआ है। अमृतपाल सिंह के साथी वरिंदर सिंह फौजी और भगवंत सिंह प्रधानमंत्री बाजेके ने पुलिस को बयान दिया है। अमृतपाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।

इस बीच अमृतपाल के वकील और कानूनी सलाहकार इमान सिंह खारा का कहना है कि तरनतारन विधानसभा सीट पर उपचुनाव का ऐलान हो चुका है और इस चुनाव में अमृतपाल की पार्टी-अकाली दल वारिस पंजाब दे भी चुनाव लड़ रही है। इसी वजह से अमृतपाल को बदनाम करने की नीयत से यह सबकुछ हो रहा है।

वकील ने बताया कि अमृतपाल के जिन साथियों के बयान देने का दावा किया जा रहा है, उनका कोई महत्व नहीं है। यह बयान धारा 27 के तहत है और इन्हें चुनौती देने की जरूरत भी नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि अमृतपाल सिंह पर तीसरी बार जो नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाया गया है, उसे वह सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं।

खालिस्तानी समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह।

असम की जेल में बंद है अमृतपाल

खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह को अप्रैल 2023 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। अमृतपाल को फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया है। अमृतपाल सिंह अजनाला थाने पर हमला करने समेत कई एफआईआर में भी आरोपी हैं।

जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने पंजाब के खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव जीता है। अमृतपाल सिंह ने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को करीब 2 लाख वोटों के अंतर से हराया था। खडूर साहिब से जीत के बाद अमृतपाल को शपथ ग्रहण के लिए पैरोल मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था मामला

अमृतपाल सिंह के निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंची थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि संविधान का अनुच्छेद 84 संसद की सदस्यता के लिए योग्यता से संबंधित है, और इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति संसद की सीट भरने के लिए तब तक योग्य नहीं होगा जब तक वह भारत का नागरिक न हो। सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि इसके लिए प्रक्रियाएं निर्धारित हैं और जन प्रतिनिधित्व कानून में प्रावधान हैं।

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