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लेह में शहीद एमपी के हरिओम का अंतिम संस्कार:राजगढ़ में बेटे की पार्थिव देह को देख बेसुध हुए पिता; बड़े भाई ने दी मुखाग्नि

लेह में शहीद एमपी के हरिओम का अंतिम संस्कार:राजगढ़ में बेटे की पार्थिव देह को देख बेसुध हुए पिता; बड़े भाई ने दी मुखाग्नि

सारंगपुर30 मिनट पहले
शहीद हरिओम नागर को सेना के अधिकारियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

लद्दाख के लेह में हिमस्खलन की चपेट में आने से शहीद हुए मध्यप्रदेश के राजगढ़ के अग्निवीर हरिओम नागर (22) का अंतिम संस्कार मंगलवार को पैतृक गांव टूटियाहेड़ी में हुआ। शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

शहीद बेटे की पार्थिव देह को देख पिता दुर्गा प्रसाद नागर बेसुध हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें सहारा देकर बिठाया। वे रोते बिलखते रहे। शहीद हरिओम नागर की पार्थिव शरीर को उनके बड़े भाई बालचंद नागर ने मुखाग्नि दी।

सुबह करीब 9:30 बजे सेना के वाहन से बोड़ा नाका पर पार्थिव शरीर लाया गया था। 21 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा शुरू हुई। राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ यात्रा चली। 6 किलोमीटर लंबे काफिले में स्कूली बच्चों समेत हजारों लोग शामिल हुए। 4 हजार से ज्यादा गाड़ियां चलीं, इनमें करीब 3 हजार बाइक और एक हजार चार पहिया वाहन थे। यात्रा में सांसद रोडमल नागर और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल, नगर परिषद अध्यक्ष विकास करोड़िया सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

रविवार को ड्यूटी के दौरान एक बड़े पहाड़ के टूटकर गिरने से अग्निवीर हरिओम नागर की मौके पर ही जान चली गई थी। शहीद की पार्थिव देह सोमवार को फ्लाइट से भोपाल लाई गई, जहां से सेना के वाहन से सोमवार रात को ही पचोर लाया गया।

तस्वीरों में देखिए शहीद को अंतिम विदाई…

आर्मी ट्रक में शहीद हरिओम का शव रखकर अंतिम यात्रा निकाली।
अंतिम यात्रा में करीब तीन हजार बाइक से जुलूस निकाला गया।
जेसीबी के पंजे पर चढ़कर ग्रामीणों ने तिरंगा लहराया।
शहीद की पार्थिव देह जैसे ही गांव पहुंची, भीड़ उमड़ पड़ी।
शहीद हरिओम नागर की मां और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है।
बेटे की पार्थिव देह को देख पिता बेसुध हो गए। लोगों ने उन्हें संभाला।
सेना के अधिकारी, सांसद, राज्यमंत्री समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद को सम्मान दिया।
सेना के अधिकारियों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

एक दिन पहले ही मां से पूछा था- खाना खाया हरिओम के पिता दुर्गाप्रसाद नागर ने बताया कि बेटे को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। कभी किसी और करियर की बात नहीं की। वह हमेशा कहता था- मैं फौजी ही बनूंगा। गांव के स्कूल से पढ़ाई कर उज्जैन की यादव एकेडमी तक पहुंचा और एनसीसी जॉइन की। डेढ़ साल पहले अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुआ था। पढ़ें पूरी खबर…

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