सुप्रीम कोर्ट की ED को फटकार:सिद्धारमैया की पत्नी को समन भेजने पर कहा- राजनीतिक लड़ाई चुनाव तक ठीक, इसके लिए एजेंसियों का इस्तेमाल क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को फटकार लगाते हुए कहा कि राजनीतिक लड़ाइयां चुनाव में लड़ी जानी चाहिए, जांच एजेंसियों के जरिए नहीं। ED का इस तरह इस्तेमाल क्यों हो रहा है?
ये टिप्पणी CJI बीआर गवई और जस्टिस के.विनोद चंद्रन की बेंच ने सोमवार को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट बोर्ड (MUDA) केस में ED की अपील की सुनवाई के दौरान की। CJI ने कहा कि हमारा मुंह मत खुलवाइए। नहीं तो हम ED के बारे में कठोर टिप्पणियां करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा,
मेरे पास महाराष्ट्र का कुछ अनुभव है। आप देशभर में इस हिंसा को मत फैलाइए।

दरअसल, ED ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को MUDA केस में समन भेजा था। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मार्च में यह समन रद्द कर दिया था। ED ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में ED की अपील खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 1 साल में ED को 5 बार और फटकार लगाई
21 जुलाईः कानूनी सलाह देने वाले सीनियर वकीलों को ED के नोटिस पर कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया टिप्पणी- इस बात से हैरान है कि ED ने सीनियर वकीलों अरविंद दातर और प्रताप वेणुगोपाल को समन भेजा, जबकि उन्होंने सिर्फ कानूनी सलाह दी थी। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की बेंच ने पूछा –वकीलों और उनके क्लाइंट के बीच की बातचीत गोपनीय होती है। ऐसे में वकीलों को समन कैसे भेजा जा सकता है? 22 मईः तमिलनाडु शराब दुकान लाइसेंस मामले में तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) की याचिका
टिप्पणी- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सारी हदें पार कर दी हैं। जब राज्य सरकार की जांच एजेंसी इस मामले में कार्रवाई कर रही है तो ED को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…
5 मईः छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई टिप्पणी- एजेंसी बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ आरोप लगा रही है। हमने ईडी की कई शिकायतें देखी हैं। यह एक पैटर्न बन गया है, केवल आरोप लगाइए, लेकिन किसी भी साक्ष्य का हवाला मत दीजिए। पूरी खबर पढ़ें…
12 फरवरीः छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में आरोपी अरुण पति त्रिपाठी की याचिका पर
टिप्पणी- ED की शिकायत पर संज्ञान लेने का आदेश हाईकोर्ट से रद्द हो चुका है, तो आरोपी को जेल में क्यों रहना चाहिए? PMLA की थ्योरी यह नहीं हो सकती कि व्यक्ति जेल में रहेगा ही। संज्ञान रद्द होने के बाद भी व्यक्ति जेल में है, इसे क्या कहा जाना चाहिए। हमने यह भी देखा कि आपने हमें खुद से यह सूचना भी नहीं दी। पूरी खबर पढ़ें…
4 अगस्त, 2024ः सरला गुप्ता बनाम ED के मामले पर
टिप्पणीः एजेंसी आरोपी को जांच के दौरान जब्त किए दस्तावेजों नहीं दे रही है। क्या ऐसा होना आरोपी के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं है। ऐसे बहुत ही गंभीर मामले हैं, जिनमें जमानत दी जाती है, लेकिन आजकल मजिस्ट्रेट के केसों में लोगों को जमानत नहीं मिल रही। पूरी खबर पढ़ें…
MUDA केस क्या है
साल 1992 में अर्बन डेवलपमेंट संस्थान मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) ने रिहायशी इलाके विकसित करने के लिए किसानों से जमीन ली थी। इसके बदले MUDA की इंसेंटिव 50:50 स्कीम के तहत जमीन मालिकों को विकसित भूमि में 50% साइट या एक वैकल्पिक साइट दी गई।
सिद्धारमैया पर क्या-क्या आरोप लगे हैं
- सिद्धारमैया की पत्नी को MUDA की ओर से मुआवजे के तौर पर मिले विजयनगर के प्लॉट की कीमत कसारे गांव की उनकी जमीन से बहुत ज्यादा है।
- स्नेहमयी कृष्णा ने सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इसमें उन्होंने सिद्धारमैया पर MUDA साइट को पारिवारिक संपत्ति का दावा करने के लिए डॉक्युमेंट्स में जालसाजी का आरोप लगाया गया।
- 1998 से लेकर 2023 तक सिद्धारमैया कर्नाटक में डिप्टी CM या CM जैसे प्रभावशाली पदों पर रहे। भले ही सीधे तौर पर वे इस घोटाले से न जुड़े हों, लेकिन उन्होंने अपने पावर का इस्तेमाल कर करीबी लोगों की मदद की।
- सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन ने साल 2004 में डिनोटिफाई 3 एकड़ जमीन अवैध रूप से खरीदी थी। 2004-05 में कर्नाटक में फिर कांग्रेस-JDS गठबंधन की सरकार में सिद्धारमैया डिप्टी CM थे।
- योजना के तहत, जिन लैंड ओनर्स की भूमि MUDA द्वारा अधिग्रहित की गई है। उन्हें मुआवजे के रूप में अधिक मूल्य की वैकल्पिक साइटें आवंटित की गई हैं। साथ ही रियल एस्टेट एजेंट्स को भी इस स्कीम में जमीन दी गई है
- भूमि आवंटन घोटाले का खुलासा एक RTI एक्टिविस्ट ने करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में 50:50 योजना के तहत 6,000 से अधिक साइटें आवंटित की गई हैं।
- भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि यह 3 हजार से 4 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। इसमें सिद्धारमैया का परिवार शामिल है। कांग्रेस इस पर चुप्पी साधे हुए है।
