शिवसेना (UBT) नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने शनिवार शाम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों अलग-अलग कार्यक्रम के लिए 3 घंटे मुंबई के सोफिटेल होटल में थे। इस दौरान दोनों की करीब 1 घंटे तक बातचीत हुई।
हालांकि, दोनों नेताओं ने किसी भी मीटिंग से इनकार किया है। CM ऑफिस के अनुसार मुख्यमंत्री होटल में मौजूद थे, लेकिन आदित्य ठाकरे से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई। सीएम किसी और कार्यक्रम के लिए होटल में आए थे, जबकि आदित्य डिनर के लिए अपने दोस्तों के साथ होटल में मौजूद थे।
इससे पहले 17 जुलाई को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे सीएम देवेंद्र फडणवीस से मिले थे। यह मुलाकात विधान परिषद अध्यक्ष राम शिंदे के कमरे में हुई थी। करीब आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में वर्ली विधायक आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे।
दरअसल, यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब देवेंद्र फडणवीस ने 16 जुलाई को विधान परिषद में हल्के-फुल्के अंदाज में उद्धव ठाकरे को साथ आने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे से कहा था- भाजपा उनके साथ विपक्ष में शामिल होने की संभावना नहीं रखती, लेकिन वह सत्ता पक्ष में आ सकते हैं।
महाराष्ट्र CM ने कहा था- अलग तरह से सोच सकते हैं
विधान परिषद में 16 जुलाई को विपक्ष के नेता अंबादास दानवे का विदाई समारोह था। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने व्यंग्य करते हुए उद्धव ठाकरे से कहा कि भाजपा उनके साथ विपक्ष में शामिल होने की संभावना नहीं रखती, लेकिन वह सत्ता पक्ष में आ सकते हैं।
इस बयान के 24 घंटे के अंदर यानी 17 जुलाई को मुख्यमंत्री से उद्धव की भेंट हो गई, जो करीब 20 मिनट चली। इस दौरान उद्धव ने मुख्यमंत्री फडणवीस को एक किताब भेंट की, जिसमें लिखा है- हिंदी की सख्ती क्यों, तीन भाषा जरूरी क्यों।
हालांकि उद्धव-देवेंद्र की मुलाकात पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि आज हमने उन्हें एक कम्पाइलेशन दिया है कि पहली क्लास से तीन-भाषा नीति क्यों नहीं होनी चाहिए। इसे कई पत्रकारों और संपादकों ने लिखा है।
2019 में भाजपा से अलग हुए थे उद्धव
शिवसेना और BJP ने 2019 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। दोनों मिलकर कुल 288 में से लगभग 160+ सीटें जीतकर बहुमत लाए थे। चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच 50:50 फॉर्मूला तय हुआ था। नतीजों के बाद उद्धव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री पद 2.5-2.5 साल के लिए शेयर करने का वादा BJP ने किया था।
लेकिन देवेंद्र फडणवीस और BJP ने इस दावे को खारिज कर दिया और मुख्यमंत्री पद BJP को ही देने की बात कही। इससे शिवसेना ने 2019 में BJP से नाता तोड़ लिया और दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए। BJP ने बहुमत न होने की स्थिति में सरकार बनाने से हाथ पीछे खींच लिया।
बाद में शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस के साथ मिलकर ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ नाम से सरकार बनाई। इसके साथ ही उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था कि शिवसेना ने अपने से अलग विचारधारा वाली कांग्रेस और NCP से गठबंधन किया।
