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थरूर बोले-पहली वफादारी देश के लिए, पार्टी के लिए नहीं:दूसरे दलों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, इसे गद्दारी समझ लिया जाता है

थरूर बोले-पहली वफादारी देश के लिए, पार्टी के लिए नहीं:दूसरे दलों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, इसे गद्दारी समझ लिया जाता है

नई दिल्ली3 घंटे पहले
शशि थरूर कांग्रेस नेता हैं। बीते कुछ महीनों में वे मोदी सरकार की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने इमरजेंसी को काला अध्याय बताया था।

कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि किसी भी नेता की पहली वफादारी देश के प्रति होनी चाहिए, पार्टी के प्रति नहीं। थरूर शनिवार को कोच्चि में ‘शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

थरूर ने कहा कि पार्टियां सिर्फ एक रास्ता हैं, देश को बेहतर बनाने का जरिया हैं। अगर देश ही नहीं बचेगा, तो पार्टियों का क्या फायदा? इसलिए जब देश की सुरक्षा का सवाल हो, तब सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा-

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जब हम कहते हैं कि देश के लिए दूसरे दलों से मिलकर काम करना चाहिए, तो कुछ लोग इसे पार्टी से गद्दारी समझ लेते हैं। यही सबसे बड़ी दिक्कत है। राजनीति में मुकाबला चलता रहता है, लेकिन मुश्किल वक्त में सभी को एकजुट होना चाहिए।

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थरूर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की तारीफ की थी और ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार व सेना का समर्थन किया था। इसके बाद कांग्रेस पार्टी में उनके बयान को लेकर नाराजगी दिखी थी।

पहले भी कई बार अपनी पार्टी पर निशाना साध चुके हैं थरूर

10 जुलाईः थरूर ने इमरजेंसी को काला अध्याय बताया

शशि थरूर ने 10 जुलाई को मलयालम भाषा के अखबार ‘दीपिका’ में प्रकाशित आर्टिकल लिखा था कि इमरजेंसी को सिर्फ भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे सबक लेना जरूरी है। उन्होंने नसबंदी अभियान को मनमाना और क्रूर फैसला बताया।

उन्होंने लिखा था कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम कई बार ऐसी क्रूरता में बदल जाते हैं, जिन्हें किसी तरह उचित नहीं कहा जा सकता।

50 साल पहले 25 जून, 1975 को तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी। यह 21 मार्च, 1977 तक लागू रही थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने कई सख्त फैसले लिए थे।

नसबंदी अभियान मनमाना फैसला था, लोकतंत्र को हल्के में नहीं लेना चाहिए थरूर ने लिखा, ‘इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी का जबरन नसबंदी अभियान चलाने का फैसला क्रूरता का उदाहरण बन गया। गरीब ग्रामीण इलाकों में टारगेट पूरा करने के लिए हिंसा और दबाव का सहारा लिया गया। नई दिल्ली जैसे शहरों में बेरहमी से झुग्गियां तोड़ी गईं। हजारों लोग बेघर हो गए। उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।’

शशि थरूर ने अपने आर्टिकल में लिखा- लोकतंत्र को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक बहुमूल्य विरासत है, जिसे लगातार संरक्षित करना जरूरी है। सत्ता को सेंट्रलाइज करने, असहमति को दबाने और संविधान को दरकिनार करने का असंतोष कई रूपों में फिर सामने आ सकता है।

अक्सर ऐसे एक्शन को देशहित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जाता है। इस अर्थ में इमरजेंसी एक चेतावनी के रूप में खड़ा है। लोकतंत्र के संरक्षकों को हमेशा सतर्क रहना होगा।

23 जूनः थरूर ने लिखा-मोदी की ऊर्जा भारत के लिए संपत्ति

थरूर ने 23 जून को द हिंदू में पब्लिश एक आर्टिकल में लिखा था कि मोदी की ऊर्जा, गतिशीलता और जुड़ने की इच्छा वैश्विक मंच पर भारत के लिए प्रमुख संपत्ति बनी हुई है, लेकिन उन्हें और ज्यादा सपोर्ट मिलना चाहिए।

कांग्रेस ने थरूर की निजी राय बताया था

द हिंदू के आर्टिकल को थरूर का कांग्रेस पार्टी को नाराज करने और उसकी लीडरशिप के साथ उनके संबंधों में बढ़ती दरार के रूप में देखा गया। हालांकि, कांग्रेस ने थरूर के बयान से यह कहकर किनारा कर लिया कि यह उनकी निजी राय हो सकती है, पूरी पार्टी की नहीं।

खड़गे बोले- कुछ लोगों के लिए मोदी फर्स्ट

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी की तारीफ के लिए कांग्रेस नेता शशि थरूर पर 25 जून को तंज किया। उन्होंने कहा, ‘मैं अंग्रेजी नहीं पढ़ सकता, लेकिन थरूर की लैंग्वेज बहुत अच्छी है। हमने उन्हें पार्टी की वर्किंग कमेटी का मेंबर बनाया है। पूरे विपक्ष ने मिलकर कहा कि हम आर्मी के साथ हैं। हमारे लिए देश पहले है, लेकिन कुछ लोगों के लिए मोदी फर्स्ट हैं।’

थरूर ने मोदी की तारीफ पर मॉस्को में दी थी सफाई

मॉस्को में मीडिया से चर्चा करते हुए सांसद शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर और PM मोदी की तारीफ पर कहा था, “मैंने मोदी की ऊर्जा पर बयान इसलिए दिया, क्योंकि प्रधानमंत्री ने खुद दूसरे देशों के साथ बातचीत में गतिशीलता और ऊर्जा दिखाई है। उन्होंने किसी भी प्रधानमंत्री की तुलना में ज्यादा देशों की यात्रा की है और ऐसा उन्होंने भारत के संदेश को दुनिया भर में ले जाने के लिए किया है।”

थरूर ने कहा था, “मैं भी लंबे समय से मानता रहा हूं कि हमारे लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद सीमाओं पर ही रुक जाना चाहिए। हमारे लिए वास्तव में भाजपा की विदेश नीति या कांग्रेस की विदेश नीति जैसी कोई चीज नहीं है, केवल भारतीय विदेश नीति और भारतीय राष्ट्रीय हित है।”

कांग्रेस का दावा- मोदी सरकार की विदेश नीति पूरी तरह असफल

थरूर ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा ऐसे समय में की है जब कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर उसकी विदेश नीति को लेकर हमला कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय कूटनीति बिखर रही है और देश वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है।

पहलगाम हमले के बाद से थरूर भारत-पाकिस्तान संघर्ष और कूटनीतिक पहुंच पर ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं जो कांग्रेस के रुख से अलग हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि भारत यात्रा करने वालों के लिए ट्रम्प सरकार की तरफ से एडवाइजरी जारी करना, देश को बदनाम करता है।

कांग्रेस ने मांग की थी कि सरकार को इस पर विरोध दर्ज कराना चाहिए और सख्त रुख अपनाना चाहिए। कांग्रेस ने दावा किया कि मोदी सरकार की विदेश नीति पूरी तरह से असफल हो गई है।

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