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राहुल बोले-सरकार जीजाजी को 10 साल से परेशान कर रही:ED ने एक दिन पहले मनी लॉन्ड्रिंग केस में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी

राहुल बोले-सरकार जीजाजी को 10 साल से परेशान कर रही:ED ने एक दिन पहले मनी लॉन्ड्रिंग केस में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी

नई दिल्ली8 घंटे पहले

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को X पर लिखा, ‘सरकार पिछले दस साल से मेरे जीजाजी (रॉबर्ट वाड्रा) को परेशान कर रही है। यह चार्जशीट उसी षडयंत्र का हिस्सा है।’

उन्होंने लिखा, ‘मैं रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ हूं, क्योंकि उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बदनामी और उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। मुझे पता है कि वे बहादुर हैं और वे पूरी गरिमा से इसका सामना करते रहेंगे। आखिर में सच्चाई की जीत होगी।’

राहुल का यह बयान उस वक्त आया है, जब एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने गुरुवार को गुरुग्राम लैंड डील केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। यह पहली बार है कि जब किसी जांच एजेंसी ने वाड्रा के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में चार्जशीट दायर की है।

वाड्रा के अलावा इस चार्जशीट में कई अन्य लोगों के साथ कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। ED ने 16 जुलाई को 37.64 करोड़ रुपए की संपत्ति भी अटैच की थी। कांग्रेस ने गुरुवार को इसे ‘डराने की कोशिश’ बताया था।

राहुल गांधी ने अपने X अकाउंट पर शुक्रवार को पोस्ट किया।

अब पूरा मामला विस्तार से पढ़ें…

2008 में हुआ जमीन का सौदा फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी।

इस समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। जमीन खरीदने के करीब एक महीने बाद हुड्डा सरकार ने वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को 2.7 एकड़ जमीन पर आवासीय परियोजना विकसित करने की परमिशन दे दी। आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन के दाम बढ़ जाते हैं।

इसके करीब 2 महीने बाद ही जून 2008 में स्काईलाइट ने यह जमीन 58 करोड़ में DLF को बेच दी। वाड्रा की कंपनी को करीब 4 महीने में ही 700 प्रतिशत से ज्यादा का मुनाफा होता है। 2012 में हुड्डा सरकार कॉलोनी बनाने का लाइसेंस DLF को ट्रांसफर कर दिया।

IAS अधिकारी ने म्यूटेशन रद्द किया 2012 में हरियाणा सरकार के भूमि रजिस्ट्रेशन के तब के निदेशक अशोक खेमका ने इस सौदे में अनियमितताओं का हवाला देकर जमीन का म्यूटेशन (स्वामित्व हस्तांतरण) रद्द कर दिया।

खेमका ने दावा किया कि स्काईलाइट को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ। इसके बाद खेमका का तबादला कर दिया गया। इससे मामले में विवाद और बढ़ गया।

2018 में दर्ज की गई FIR साल 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र हुड्डा, DLF और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ FIR दर्ज की। इन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में IPC की धारा 420, 120, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया। बाद में IPC की धारा 423 के तहत नए आरोप जोड़े गए।

ED ने FIR के आधार पर जांच शुरू की ED ने शक जताया कि इस सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, क्योंकि जमीन की कीमत कुछ ही महीनों में असामान्य रूप से बढ़ गईं। इसके अलावा ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के फर्जी कंपनी होने का भी शक जताया गया।

जमीन की खरीद से जुड़ा चेक कभी जमा नहीं किया गया। ED ने 2018 में हरियाणा पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।

ED को संदेह, DLF को हुआ ₹5 हजार करोड़ का फायदा ED स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के वित्तीय लेनदेन, जमीन की खरीद-बिक्री और DLF के साथ सौदे की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस सौदे से हुई आय का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में किया गया।

आरोप है कि DLF को इस सौदे में फायदा पहुंचाने के लिए हुड्डा सरकार ने नियमों का उल्लंघन किया। इसमें वजीराबाद में DLF को 350 एकड़ जमीन आवंटन का भी जिक्र है। ED को शक है कि इससे DLF को 5 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ।

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