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ठाकरे को भाजपा सांसद निशिकांत की धमकी:भाषा विवाद पर कहा- महाराष्ट्र में बड़े बॉस हो, बिहार-यूपी आओ तुमको पटक-पटक कर मारेंगे

महाराष्ट्र के भाषा विवाद में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को कहा, ‘आप अपने घर महाराष्ट्र में अगर बहुत बड़े बॉस हो तो चलो बिहार, चलो यूपी, चलो तमिलनाडु, तुमको पटक-पटक कर मारेंगे।’

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, ‘अगर आपमें ज्यादा हिम्मत है, आप हिंदी भाषी को मारते हैं तो उर्दू भाषी, तमिल, तेलुगु को भी मारो। आप ये घटिया हरकत कर रहे हो।

BJP सांसद दुबे ने यह जवाब राज ठाकरे के उस बयान पर दिया, जिसमें राज ने कहा था- मराठी ना बोलने पर मारो, लेकिन वीडियो मत बनाओ।

दरगाह के पास उर्दू भाषी को पीटकर दिखाओ दुबे ने कहा- ये अराजकता नहीं चलेगी। हम मराठी का सम्मान करते हैं। हम शिवाजी महाराज, तात्या टोपे, तिलक, लाजपत राय का सम्मान करते हैं। ये उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे जो कर रहे हैं, उसका हम प्रतिकार करते हैं।

दुबे ने कहा- अगर उनमें हिम्मत है तो बगल में माहिम इलाके में चले जाएं और दरगाह के पास किसी हिंदी-उर्दू भाषी को पीटकर दिखा दें तो मैं मानूंगा कि वो सचमुच बालासाहेब ठाकरे जी के वारिस हैं और उनके सिद्धांतों पर चल रहे हैं।

राज ठाकरे ने कहा था- अगर आप किसी को पीटते हैं, तो वीडियो न बनाएं महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी एकता’ पर शनिवार यानी 5 जून को मुंबई के वर्ली सभागार में ‘मराठी विजय रैली’ की थी। दोनों ने 48 मिनट तक हिंदी-मराठी भाषा विवाद, मुंबई-महाराष्ट्र, भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

दोनों नेताओं ने कहा- तीन भाषा का फॉर्मूला केंद्र से आया। हिंदी से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे थोपा नहीं जाना चाहिए। अगर मराठी के लिए लड़ना गुंडागर्दी है तो हम गुंडे हैं।

राज ठाकरे ने कहा था, ‘चाहे गुजराती हो या कोई और, उसे मराठी आनी चाहिए, लेकिन अगर कोई मराठी नहीं बोलता तो उसे पीटने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कोई बेकार का ड्रामा करता है तो आपको उसके कान के नीचे मारना चाहिए। अगर आप किसी को पीटते हैं, तो घटना का वीडियो न बनाएं। पूरी खबर पढ़ें…

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 20 साल बाद एक मंच पर दिखे थे।

जानिए, महाराष्ट्र में भाषा विवाद क्या है

  • महाराष्ट्र में अप्रैल में 1 से 5वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य की गई थी। ये फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था।
  • नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र में इन क्लासेज के लिए तीन भाषा की पॉलिसी लागू की गई थी।
  • विवाद बढ़ने के बाद अपडेटेड गाइडलाइंस जारी की गई। मराठी और अंग्रेजी मीडियम में कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं।
  • इसके लिए शर्त बस यह होगी कि एक क्लास के कम से कम 20 स्टूडेंट्स हिंदी से इतर दूसरी भाषा को चुनें। ऐसी स्थिति में स्कूल में दूसरी भाषा की टीचर भी अपॉइंट कराई जाएगी। अगर दूसरी भाषा चुनने वाले स्टूडेंट्स का नंबर 20 से कम है तो वह भाषा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जाएगी।

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