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संसद सुरक्षा चूक केस-दिल्ली हाईकोर्ट से 2 आरोपियों को जमानत:हफ्ते में 3 दिन थाने में हाजिरी देंगे; इंटरव्यू, सोशल मीडिया पोस्ट की मनाही

दिल्ली हाईकोर्ट ने संसद की सिक्योरिटी तोड़ने के मामले में नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दे दी। कोर्ट ने बुधवार को उन्हें 50 हजार रुपए के निजी बॉण्ड पर जमानत दे दी। मंजूर की गई। निचली अदालत ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने जमानत आदेश के तहत सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आरोपियों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, इंटरव्यू देने या घटना के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर रोक लगाई गई है।

इसके अलावा दोनों व्यक्तियों को हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुबह 10:00 बजे संबंधित पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने और दिल्ली NCR से बाहर न जाने का भी निर्देश दिया है।

सागर शर्मा और डी मनोरंजन लोकसभा में कूदे थे। इन्होंने रंगीन धुआं छोड़ा था।

पुलिस बोली- आरोपी प्रभावशाली, कोर्ट ने कड़ी जमानत शर्तें लगाईं दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत हैं। पुलिस का तर्क था कि जमानत देने से इनके भागने, गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का जोखिम है। पुलिस ने आरोपियों को शक्तिशाली और प्रभावशाली बताते हुए कहा कि इनकी रिहाई जांच में बाधा डाल सकती है।

वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने कहा- पेश किए गए सबूत नेशनल इकोनॉमिक सिक्योरिटी के लिए खतरा साबित नहीं करते हैं। वकील ने कहा कि आरोपियों पर संसद परिसर में शारीरिक हमला किया गया। यह उस दिन की घटनाओं के बारे में पुलिस के बयान पर सवाल उठाता है। पुलिस के तर्कों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ जमानत मंजूर की है।

अब जानिए क्या है पूरा मामला… मामला 13 दिसंबर 2023 का है। यह 2001 में संसद आतंकी हमले की बरसी का दिन भी था। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सागर शर्मा और मनोरंजन डी विजिटर गैलरी से नीचे लोकसभा में कूदे। उन्होंने सदन में पीली गैस छोड़ी और नारेबाजी की।

लोकसभा में मौजूद सांसदों ने उन्हें पकड़ा था। वहीं, दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद कैंपस में रंगीन गैस स्प्रे और नारेबाजी की थी। मामले की जांच में पुलिस ने दो अन्य आरोपियों ललित झा और महेश कुमावत को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस ने IPC और UAPA की तमाम धाराओं में FIR दर्ज की थी। बाद में जांच स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट को सौंप दी गई थी। दिल्ली के उपराज्यपाल ने रिव्यू करने के बाद आरोपियों पर UAPA की धारा 16 और 18 लगाने की भी मंजूरी दी थी।

संसद कैंपस से नीलम और अमोल शिंदे को गिरफ्तार किया गया था।

2001 में संसद पर हुआ था आतंकी हमला

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