जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच रविवार शाम से मुठभेड़ हो रही है। सुरक्षाबलों को संदिग्ध आतंकवादियों का इनपुट मिला था। इसके बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फिलहाल इलाके की घेराबंदी कर ली गई है।
अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 2 आतंकवादी को घेर लिया गया है। मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सोपोर पुलिस के साथ 22 राष्ट्रीय राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 179वीं बटालियन सोपोर के जालोरा गुज्जरपति में तलाशी अभियान चला रही थी।
19 दिसंबर को कुलगाम जिले के कद्देर इलाके में सेना और पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में 5 आतंकियों को ढेर कर दिया था। इनमें हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर फारूक अहमद भट्ट भी शामिल था। मुठभेड़ में 2 जवान भी घायल हुए थे।
हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर फारूक अहमद भट्ट घाटी में पिछले दिनों हुए हमलों में शामिल था।
हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर फारूक अहमद भट्ट घाटी में पिछले दिनों हुए हमलों में शामिल था।
नवंबर में 8 आतंकी मारे गए थे
जम्मू-कश्मीर में सेना और आतंकियों के एनकाउंटर की यह पहली घटना है। पिछले महीने नवंबर में 10 दिनों में 9 एनकाउंटर हुए थे। जिसमें 8 आतंकी ढेर हो गए थे।
जम्मू में जैश और लश्कर का 20 साल पुराना नेटवर्क एक्टिव
जम्मू रीजन में सेना ने 20 साल पहले पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के जिस लोकल नेटवर्क को सख्ती से निष्क्रिय कर दिया था, वो पूरी ताकत से फिर एक्टिव हो गया है। पहले ये लोग आतंकियों का सामान ढोने का काम करते थे, अब उन्हें गांवों में ही हथियार, गोला बारूद और खाना-पीना दे रहे हैं।
दिसंबर में 25 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने पूछताछ में बताया था कि लोकल नेटवर्क जम्मू के 10 में से नौ जिलों राजौरी, पुंछ, रियासी, ऊधमपुर, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, जम्मू और रामबन में जम चुका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद्य के मुताबिक, आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान आर्मी और ISI ने जम्मू को टारगेट करना शुरू कर दिया था। उसने 2 साल में इस नेटवर्क को सक्रिय किया। इन्हीं की मदद से आतंकियों ने 2020 में पुंछ और राजौरी में सेना पर बड़े हमले किए। फिर ऊधमपुर, रियासी, डोडा और कठुआ को निशाने पर लिया।
