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सबसे कम उम्र के शतरंज प्लेयर को बाल पुरस्कार:उम्र 3 साल; 17 बच्चे सम्मानित; PM बोले- बेस्ट ही हमारा स्टैंडर्ड

सबसे कम उम्र के शतरंज प्लेयर को बाल पुरस्कार:उम्र 3 साल; 17 बच्चे सम्मानित; PM बोले- बेस्ट ही हमारा स्टैंडर्ड

नई दिल्ली57 मिनट पहले

बाल पुरस्कार सात कैटेगरी में दिए गए हैं। जिसमें आर्ट एंड कल्चर, बहादुरी, इनोवेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, सोशल वर्क, स्पोर्ट्स एंड एनवॉयरमेंट शामिल है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में 17 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। इस बार 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 17 बच्चों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया था। इनमें 7 लड़के और 10 लड़कियां शामिल हैं।

बाल पुरस्कार सात कैटेगरी में दिए गए हैं। जिसमें आर्ट एंड कल्चर, बहादुरी, इनोवेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, सोशल वर्क, स्पोर्ट्स एंड एनवॉयरमेंट शामिल है। खेल कैटेगरी से चर्चित नाम 3 साल के अनीश सरकार का है। जो फिडे (वर्ल्ड चेस फेडरेशन) रैंकिंग हासिल करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के शतरंज प्लेयर हैं।

उधर PM नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित वीर बाल दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से मुलाकात की।

पीएम मोदी ने कहा- अगर हम मैन्यूफैक्चरिंग पर काम करें तो उसमें हम दुनिया में बेस्ट हों। अगर स्पेस सेक्टर में काम करें तो दुनिया में बेस्ट हों। बेस्ट ही हमारा स्टैंडर्ड होना चाहिए।

कोलकाता में रहने वाले अनीश सरकार की उम्र 3 साल, आठ महीने और 19 दिन है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अनीश को मेडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।

बिहार के नालंदा की गोल्डी कुमारी को राष्ट्रपति मुर्मू ने बाल पुरस्कार दिया। दिव्यांग गोल्डी ने थाईलैंड में विश्व पैरा ओलंपिक यूथ गेम्स में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीता है।

बिहार के शेखपुरा जिले के सौरभ कुमार को बहादुरी के लिए अवार्ड मिला। 9 साल के सौरभ ने तीन लकड़ियों को तालब में डूबने से बचाया था।
अब देखिए PM मोदी के विजेताओं से मुलाकात की 2 तस्वीरें…

पीएम मोदी ने बाल पुरस्कार विजेताओं से मुलाकात की। उन्हें ऑटोग्रॉफ दिए।

पीएम मोदी ने दिव्यांग छात्र से भी मुलाकात की। जिसे बाल पुरस्कार दिया गया है।
वीर बाल दिवस प्रोग्राम में PM की स्पीच की 4 बड़ी बातें…

वीर बाल दिवस हमें प्रेरणाओं से भरता है और नए संकल्पों के लिए प्रेरित ​करता है। मैंने लाल किले से भी कहा था कि अब बेस्ट ही हमारा स्टैंडर्ड होना चाहिए। हमारे युवा जिस सेक्टर में हों वहां बेस्ट का प्रयास करें।
इतिहास से वर्तमान तक, भारत की प्रगति में हमेशा युवा ऊर्जा की बड़ी भूमिका रही है। आजादी की लड़ाई से लेकर 21वीं सदी के जनांदोलनों तक, भारत के युवा ने हर क्रांति में अपना योगदान दिया है।
आज की तेजी से बदलती दुनिया में, नई आवश्यकताएं, नई अपेक्षाएं, अपवाद और भविष्य के लिए नए दृष्टिकोण हैं। यह युग मशीनों से आगे बढ़कर मशीन लर्निंग की ओर बढ़ रहा है।
AI का उपयोग बढ़ रहा है, जो सामान्य सॉफ्टवेयर की जगह ले रहा है। हम हर क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसलिए, हमें अपने युवाओं को यह बताना होगा कि आगे कैसा भविष्य है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के बारे में जानिए…
केंद्र सरकार की ओर से साल 1996 में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार की शुरुआत की गई थी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को सम्मानित करने के मकसद से राष्ट्रीय बाल पुरस्कार को शुरू किया गया था। साल 1996 से ही पुरस्कार पाने वाले ये बच्चे कर्तव्यपथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेते हैं।

किन बच्चों को मिलता है ये अवार्ड
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए बच्चों का चयन करती है। ऐसे बच्चे जिनकी उम्र 5 साल से ज्यादा और 18 साल से कम है। जो भारत के नागरिक हैं और देश में ही रहते हैं। उन्हें ये पुरस्कार दिया जा सकता है। साल 2018 में बहादुरी के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को भी शामिल किया गया।

7 कैटेगरी में अवार्ड दिया जाता है
पहले यह पुरस्कार छह कैटेगरी में दिया जाता था। इनमें कला और संस्कृति, बहादुरी, नवाचार (इनोवेशन), शैक्षणिक, सामाजिक सेवा और खेल शामिल था। अब इसमें साइंस और टेक्नोलॉजी भी जोड़ा गया है।

अवार्ड जीतने पर क्या मिलता है
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के हर विजेता को एक मेडल और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसके साथ पुरस्कार विजेताओं को 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी मिलता है।

2023 में 11 बच्चों को अवार्ड दिया गया था

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पुरस्कार 5 से 18 साल की उम्र के बच्चों को दिए जाते हैं।
2023 में यह पुरस्कार 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 11 बच्चों को दिया गया था। पुरस्कार विजेताओं में बहादुरी और सोशल वर्क की कैटेबरी में एक, इनोवेशन में दो, खेल में तीन और कला व संस्कृति कैटेगरी में चार बच्चे शामिल थे। इन 11 पुरस्कार विजेताओं में से 5 लड़कियां और 6 लड़के थे।

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