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प्रशासन की लापरवाही से खतरे में 3 साल की चेतना:40 घंटे से बोरवेल में भूखी-प्यासी मासूम; देसी जुगाड़ के भरोसे रहे, अब गड्ढा खोद रहे
कोटपूतली20 मिनट पहले
कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में गिरी 3 साल की चेतना का रेस्क्यू तीसरे दिन भी नहीं हो सका है। प्रशासन की फेल प्लानिंग के चलते मासूम 40 घंटे से बोरवेल में फंसी है।
परिवार ने भी अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। देसी जुगाड़ के भरोसे बच्ची को निकालने में रहे प्रोफेशनल्स को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
देसी जुगाड़ पर इतना भरोसा जताया कि 30 घंटे तक बोरेवेल के समानांतर गड्ढ खोदना ही शुरू नहीं किया। जबकि बोरवेल रेस्क्यू में सबसे पहले एक और गड्ढा खोदकर पीड़ित को निकालने का प्रयास किया जाता है।
मंगलवार देर रात तक चार देसी टेक्नीक फेल होने के बाद पाइलिंग मशीन का इस्तेमाल शुरू किया गया। दरअसल, कीरतपुर के बड़ीयाली की ढाणी की चेतना चौधरी सोमवार दोपहर 2 बजे खेलते समय बोरवेल में गिर गई थी।
वह करीब 150 फीट की गहराई पर अटकी थी। देसी जुगाड़ (L बैंड) से टीमें चेतना को केवल 30 फीट तक खींचने में कामयाब रहीं। मंगलवार सुबह से चेतना का मूवमेंट भी नहीं दिख रहा है।
सबसे पहले जानिए- कहां हुआ हादसा
रात करीब 10:50 बजे हरियाणा से पहुंची पाइलिंग मशीन। समानांतर गड्ढा खोद कर बच्ची का रेस्क्यू करने का दावा अधिकारी कर रहे हैं।
28 घंटे तक फैसला ही नहीं कर सके अधिकारी
मंगलवार रात करीब 12 बजे कोटपूतली उपखंड अधिकारी बृजेश कुमार ने मीडिया को बताया- बच्ची को बचाने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हमारा पहले प्लान A था कि बच्ची को अलग-अलग उपकरणों की मदद से बोरवेल से बाहर निकाल लें। उसमें सफलता नहीं मिली तो हम प्लान B पर आए हैं।
अब हम पाइलिंग मशीन के जरिए गड्ढा खोद रहे हैं। इधर, बच्ची के दादा हरसहाय चौधरी ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- प्रशासन कह रहा है कि हम मिट्टी हटा रहे हैं। फिर 28 घंटे बाद मशीन से गड्ढा खोदने का फैसला किया। लापरवाही हो रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी PHOTOS…
सोमवार रात करीब 9 बजे बच्ची की हाथ हिलाते हुए वीडियो सामने आया था। इसके बाद से बच्ची का बोरवेल के अंदर मूवमेंट नहीं देखा गया।
पिछले 40 घंटे से सैकड़ों ग्रामीण मौके पर मौजूद हैं। रात करीब 2 बजे भी हादसा स्थल पर लोगों की भीड़ रही।
घटनास्थल से 20 फीट दूर जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदा जा रहा है। वहीं, परिवार में नाराजगी और बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे चेतना के बाहर निकलने की उम्मीद थी, लेकिन कैमरे में वो दिख नहीं रही थी। इसलिए रेस्क्यू रोक दिया गया।
एक और कैमरे को बोरेवेल में डालकर उसे देखने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें भी कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद से चेतना बोरवेल में करीब 120 फीट पर अटकी है।
बच्ची चेतना की मां धोली देवी हादसे के बाद से ही लगातार टीम जब उनसे बात करने पहुंची तो उन्होंने हाथ जोड़ कर सीएम भजनलाल शर्मा से मार्मिक अपील की। वो बस बार-बार यही कहती रहीं कि सीएम भजनलाल जी मेरी बेटी को बचा लो।
