डेंटिस्ट को पूरी रात ऑन रखना पड़ा वीडियो कॉल:डॉक्टर को धमकाया- तुमने आतंकवादियों को पैसे भेजे, 10 दिन ‘कैद’ में महिला प्रोफेसर
मैं 20 सितंबर का दिन कभी नहीं भूल सकती। फर्जी पुलिसवालों ने मुझे 22 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। यहां तक कि सोते हुए वीडियो कॉल ऑन रखना था। अपने ही घर में कैदी की तरह महसूस कर रही थी। आज भी उस रात को याद करती हूं तो सहम जाती हूं।

ये आपबीती है जोधपुर की एक महिला डॉक्टर की। ‘डिजिटल अरेस्ट’ का ये इकलौता किस्सा नहीं है। पिछले कुछ महीनों में आम लोगों से लेकर अधिकारी और बिजनेसमैन तक, दर्जनों केस सामने आए हैं। किसी को 24 घंटे तो किसी को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। पुलिस की वर्दी में ऑनलाइन लुटेरों ने टॉर्चर किया।
पढ़िए 3 पीड़ितों की आपबीती…
केस-1: मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखा महिला प्रोफेसर को 10 दिन तक निगरानी में रखा मेरा नाम अमृता पुरी (35) है। मैं IIT जोधपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर हूं। 1 अगस्त की बात है। अलग-अलग नंबर से कई कॉल आए। शुरुआत में मैंने कॉल रिसीव नहीं किया। फिर लगा हाे सकता है किसी को कोई जरूरी काम हो तो मैंने कॉल रिसीव कर लिया।
कॉल रिसीव करते ही सामने वाले ने खुद को पुलिसकर्मी बताया। कहा- आपके नाम से एक पार्सल मुंबई से आया हुआ है। इस पार्सल में एमडी ड्रग्स है। इसके साथ कई पासपोर्ट और क्रेडिट कार्ड हैं। आप इसकी रिपोर्ट मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच में करवा दें। इसके बाद बदमाश ने खुद ही कॉल साइबर ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया।
मनी लॉन्ड्रिंग के केस से डराया दूसरे कॉल पर एक ठग ने अपने आप को साइबर क्राइम ब्रांच का DCP बताया। कहा- आप नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंस गई हैं। आपको सहयोग करना होगा। वरना अरेस्ट कर जेल भेज दिया जाएगा। यह सुनकर मैं डर गई थी। इसके बाद वे लोग जैसा कहते गए, मैं वैसा ही करती गई।
बदमाशों ने मुझे लगातार सर्विसलांस पर रखा हुआ था। मेरे पूरे मोबाइल फोन का कंट्रोल ठगों ने अपने हाथ में ले लिया। मुझे कैमरा ऑन रखने और स्क्रीन शेयर करने को कहा। अरेस्ट होने के डर से मैंने सारा कंट्रोल ठगों को दे दिया था।
पैसे ट्रांसफर करवाते ही सभी एक्सेस हटा दिए 10 दिन बाद यानी 11 अगस्त को फाइनेंशियल वैरिफिकेशन की बात की गई। इसके बाद उनके सभी खातों और फंड्स की डिटेल ली। 12 अगस्त को यस बैंक के उनके एक अकाउंट में चेक से रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के जरिए 11 लाख 97 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए। पैसा ट्रांसफर होते ही उन लोगों ने सभी कम्युनिकेशन डिवाइस से एक्सेस हटा लिए। तब मुझे पता चला कि ठगों ने मुझे डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। इसके बाद मैंने साइबर थाने में सूचना देकर अपना अकाउंट होल्ड करवाया और करवड़ थाने में रिपोर्ट दी।
केस-2: एमडी ड्रग्स और पाकिस्तान फंडिंग का दिया हवाला मैं डॉ. मोहम्मद शाकिर गौरी (49) जोधपुर के नागौरी गेट स्थित महावतों की मस्जिद के पास रहता हूं। बालेसर में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पोस्टेड हूं। 6 अक्टूबर को मेरे पास अज्ञात नंबरों से फोन आया।
पहले बताया गया कि आपके नाम का एक पार्सल है, जो आपने बुक किया है। मैंने बताया कि मैंने कोई पार्सल बुक नहीं करवाया। ठग ने कहा- दिल्ली से थाईलैंड के लिए कोई पार्सल आपके नाम से बुक है। यह दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया है। इसमें 5 पासपोर्ट, 3 क्रेडिट कार्ड, 4.2 किलो कपड़े, 1 लैपटॉप और 1.4 ग्राम एमडी ड्रग्स मिला है।
वीडियो कॉल में वर्दी में था ठग जब मैं बार-बार मना करता रहा तो उन्होंने मुझे डराना और धमकाना शुरू किया। गिरफ्तारी का डर बताते हुए दो घंटे में दिल्ली क्राइम ब्रांच पहुंचने को कहा। जब मैंने कहा- इतना जल्दी दिल्ली नहीं आ सकता तो ठगों ने वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल किया। सामने पुलिस की वर्दी में एक ठग था। उसने अपने आप को IPS समाधान पंवार बताया। मुझसे कहा- लोकल बैंक, लोकल पॉलिटिकल और पुलिस की मिलीभगत से यह खाता खोला गया है, जो ऑपरेट हो रहा है। इस खाते से पाकिस्तान में टेरर फंडिंग भी हुई है। इन 5 पासपोर्ट में 3 पाकिस्तान के हैं। जब मैंने ऐसा सब कुछ होने से इनकार किया तो उन्होंने कहा कि यह मामला ह्यूमन ट्रैफिकिंग का है।
पाकिस्तानी पासपोर्ट और फंडिंग का जब मैंने सुना तो घबरा गया। मैं जब बार-बार कहता रहा कि इसमें मेरा कोई रोल नहीं है तो उन्होंने मुझे तसल्ली दी। कहा- हमें पता है इसमें आपका लेना-देना नहीं है, लेकिन हम 17-18 दिन से काम कर रहे हैं। आप हमें 24 घंटे कोऑपरेट करेंगे तो इस केस से बाहर निकाल देंगे नहीं तो आपको अरेस्ट करना होगा। ठगों ने कहा- जब तक आरोपी पकड़ में नहीं आएंगे, तब तक हमारे पास रहना होगा यानी डिजिटल अरेस्ट।
मुझे कहा- ये वित्तीय सेवाओं से जुड़ा मामला है इसलिए आप इस संबंध में किसी से बात नहीं करेंगे और फोन बंद नहीं रखेंगे। आपका मोबाइल भी सर्विसलांस पर देना होगा और ये बात भी आपको किसी को नहीं बतानी है। मैं भी ठगोां की बात में आ गया था।
ड्यूटी पर गए तो वापस बुलाया ठगों ने मुझे कहा- 24 घंटे का सहयोग करोगे तो बच जाओगे। अगले दिन 7 अक्टूबर को मैं ड्यूटी पर चला गया था। मुझे वॉट्सऐप पर कॉल आया और पूछा आप कहा हो। मैंने बताया ड्यूटी पर आया हूं।
मुझसे कहा- ड्यूटी पर जाने से पहले हम लोगों से पूछना था। छुट्टी लेकर घर आ जाओ। जैसा सर ने आपको बताया था उस हिसाब से आपको आज हमारे बताए निर्देश पर चलना होगा। सब ठीक रहा तो आज या कल फ्री हो जाओगे। डर के मारे मैं भी छुट्टी लेकर घर आ गया।
9 लाख रुपए लूट लिए पूरे दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर ठगों ने RTGS के जरिए HDFC बैंक के खाते में यह कहकर रुपए डलवाए कि 6 घंटे बाद यह रुपए वापस अपने आप खाते में आ जाएंगे। मैंने उनसे उनका चेहरा दिखाने को कहा तो वीडियो कॉल पर उन्होंने अपना चेहरा दिखाया और फिर मैंने उनके खाते में 9 लाख 5 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए।
केस-3 : 22 घंटे महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट रखा मैं डेंटल कॉलेज में डॉक्टर हूं। 20 सितंबर की शाम को 4 बजे एक वीडियो कॉल आया। कॉल रिसीव किया तो सामने पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति था। उसने अपने आप को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी विजय कुलकर्णी बताया था।
मुझे बताया कि मेरे आधार कार्ड से लिंक एक खाता मुंबई की केनरा बैंक में चल रहा है। उस खाते में अवैध गतिविधियों के लिए रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ है। मेरे सभी डॉक्युमेंट और बैंक खातों की ऑनलाइन जांच की जाएगी।
बैंक खातों की जानकारी ली इसके बाद ठगों ने मुझे एक PDF भेजी, जिसमें मुझे डिजिटल अरेस्ट बताया गया। ठगों ने मेरे बैंक अकाउंट और फिक्स डिपॉजिट की जानकारी ली। पूछताछ के बाद चार लेटर भेजे। इसमें सीबीआई के साथ एग्रीमेंट, एसेट सीजर, अरेस्ट वारंट और केस रिपोर्ट पेपर भी थे। मुझे खाते को सुप्रीम कोर्ट के सीक्रेट सुपरविजन खाते से जोड़ने का कहा। यह सब सरकारी कागज देखकर मैं घबरा गई थी। डर के मारे सारी जानकारी ठगों के साथ शेयर कर दी।
ठगों ने मुझे नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस के डॉक्युमेंट की कॉपी भेजी। इसमें लिखा था कि 247 एटीएम कार्ड बरामद हुए है, जिन पर अलग-अलग कार्ड होल्डर के नाम हैं। CBI जांच कर रही है।
पूरी रात वीडियो कॉल ऑन रखा इसके बाद मुझे वीडियो कॉल ऑन करके बात करने को कहा। मुझे कहा-आप पूरी रात वीडियो कॉल ऑन रखना। सोते हुए भी वीडियो कॉल डिस्कनेक्ट नहीं होना चाहिए। इस दौरान पूरी रात वीडियो कॉल चलता रहा। इसके बाद मुझे वॉट्सऐप पर डिजिटल कस्टडी का PDF भेजा। मुझे एक एप्लिकेशन लिखने को कहा। तब मैंने उनके कहे अनुसार एप्लिकेशन लिख दी।
इसके बाद मुझे अलग-अलग बैंक अकाउंट दिए और 6 लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा। जो अकाउंट नंबर आ रहा था वह न्यू समा रोडवेज के नाम से था। मैंने 6 लाख रुपए जैसे ही उस अकाउंट में डाले तो मुझे कहा गया कि आपका एक और अकाउंट किसी बैंक में है। तब मैंने उन्हें बैंक का नाम बताया तो बोले- 6 लाख रुपए और ट्रांसफर करने होंगे।
