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रतन टाटा पर PM मोदी का ब्लॉग:लिखा- भारत ने अमूल्य रत्न खोया, लेकिन वे उन सपनों में जिंदा, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया

रतन टाटा पर PM मोदी का ब्लॉग:लिखा- भारत ने अमूल्य रत्न खोया, लेकिन वे उन सपनों में जिंदा, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया

नई दिल्ली2 घंटे पहले
रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर 2024 को 86 साल की उम्र में हो गया था।

PM नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिवंगत बिजनेसमैन रतन टाटा के लिए एक ब्लॉग लिखा है। इसमें उन्होंने रतन टाटा के योगदान, जीवन, लीडरशिप और देशप्रेम का जिक्र किया है। PM ने लिखा- ‘रतन टाटा के हमसे दूर चले की जाने की वेदना अब भी मन में है। इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं है। रतन टाटा जी के तौर पर भारत ने अपने एक महान सपूत को खो दिया है…एक अमूल्य रत्न को खो दिया है।’

गौरतलब है कि टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन नवल टाटा का 86 साल की उम्र में 9 अक्टूबर को निधन हो गया था। भारत सरकार ने उन्हें साल 2000 में पद्मभूषण और 2008 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

पीएम के ब्लॉग की बड़ी बातें…

रतन टाटा के निधन पर : आज रतन टाटा जी के निधन को एक महीना हो रहा है। पिछले महीने आज के ही दिन जब मुझे उनके गुजरने की खबर मिली, तो मैं उस समय आसियान समिट के लिए निकलने की तैयारी में था। रतन टाटा जी के हमसे दूर चले जाने की वेदना अब भी मन में है। इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं है। उनके रूप में भारत ने एक अमूल्य रत्न को खो दिया है।

आज भी शहरों, कस्बों से लेकर गांवों तक, लोग उनकी कमी को गहराई से महसूस कर रहे हैं। हम सबका ये दु:ख साझा है। चाहे कोई उद्योगपति हो, उभरता हुआ उद्यमी हो या कोई प्रोफेशनल हो, हर किसी को उनके निधन से दु:ख हुआ है। पर्यावरण रक्षा से जुड़े लोग, समाज सेवा से जुड़े लोग भी उनके निधन से उतने ही दु:खी हैं। और ये दु:ख हम सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में महसूस कर रहे हैं।

रतन जी की क्षमताओं पर: रतन टाटा जी, भारतीय उद्यमशीलता की बेहतरीन परम्पराओं के प्रतीक थे। वो विश्वसनीयता, उत्कृष्टता और बेहतरीन सेवा जैसे मूल्यों के अडिग प्रतिनिधि थे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह दुनिया भर में सम्मान, ईमानदारी और विश्वसनीयता का प्रतीक बनकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी उपलब्धियों को पूरी विनम्रता और सहजता से स्वीकारा।

हाल के वर्षों में, वो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का मार्गदर्शन करने और भविष्य की संभावनाओं से भरे उद्यमों में निवेश करने के लिए जाने गए। उन्होंने युवा आंत्रप्रेन्योर की आशाओं और आकांक्षाओं को समझा, साथ ही भारत के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता को पहचाना।

युवाओं के लिए बनाए रास्तों पर: भारत के युवाओं के प्रयासों का समर्थन करके, उन्होंने नए सपने देखने वाली नई पीढ़ी को जोखिम लेने और सीमाओं से परे जाने का हौसला दिया। उनके इस कदम ने भारत में इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप की संस्कृति विकसित करने में बड़ी मदद की है। आने वाले दशकों में हम इसका सकारात्मक प्रभाव देखेंगे।

देश के भविष्य के निर्माण पर : रतन टाटा जी ने हमेशा बेहतरीन क्वालिटी के प्रोडक्ट, बेहतरीन क्वालिटी की सर्विस पर जोर दिया और भारतीय उद्यमों को ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने का रास्ता दिखाया। आज जब भारत 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो हम ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करते हुए ही दुनिया में परचम फहरा सकते हैं। मुझे आशा है कि उनका ये विजन हमारे देश की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और भारत वर्ल्ड क्लास क्वालिटी के लिए अपनी पहचान मजबूत करेगा।

रतन टाटा के देशप्रेम पर : रतन टाटा जी ने हमेशा नेशन फर्स्ट की भावना को सर्वोपरि रखा। 26/11 के आतंकवादी हमलों के बाद उनके द्वारा मुंबई के प्रतिष्ठित ताज होटल को पूरी तत्परता के साथ फिर से खोलना, इस राष्ट्र के एकजुट होकर उठ खड़े होने का प्रतीक था। उनके इस कदम ने बड़ा संदेश दिया कि- भारत रुकेगा नहीं, भारत निडर है और आतंकवाद के सामने झुकने से इनकार करता है।

व्यक्तिगत तौर पर, मुझे पिछले कुछ दशकों में उन्हें बेहद करीब से जानने का सौभाग्य मिला। हमने गुजरात में साथ मिलकर काम किया। वहां उनकी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। इनमें कई ऐसी परियोजनाएं भी थीं, जिसे लेकर वे बेहद भावुक थे।

स्वच्छता मिशन में योगदान पर : जब मैं केंद्र सरकार में आया, तो हमारी घनिष्ठ बातचीत जारी रही और वो हमारे राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में प्रतिबद्ध भागीदार बने रहे। स्वच्छ भारत मिशन के प्रति उनका उत्साह विशेष रूप से मेरे दिल को छू गया था। वे इस जनांदोलन के मुखर समर्थक थे। अक्टूबर की शुरुआत में स्वच्छ भारत मिशन की दसवीं वर्षगांठ के लिए उनका वीडियो संदेश मुझे याद है।

कैंसर के खिलाफ लड़ाई पर : कैंसर के खिलाफ लड़ाई एक और ऐसा लक्ष्य था, जो उनके दिल के करीब था। मुझे दो साल पहले असम का वो कार्यक्रम याद आता है, जहां हमने संयुक्त रूप से राज्य में विभिन्न कैंसर अस्पतालों का उद्घाटन किया था। उस अवसर पर उन्होंने कहा था कि वो अपने जीवन के आखिरी वर्षों को हेल्थ सेक्टर को समर्पित करना चाहते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर में योगदान पर : कुछ सप्ताह पहले, मैं स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सान्चेज के साथ वडोदरा में था और हमने संयुक्त रूप से एक विमान फैक्ट्री का उद्घाटन किया। इस फैक्ट्री में सी-295 विमान भारत में बनाए जाएंगे। रतन टाटा जी ने ही इस पर काम शुरू किया था। उस समय मुझे उनकी बहुत कमी महसूस हुई।

लीडरशिप पर : भारत को एक बेहतर, सहृदय और उम्मीदों से भरी भूमि बनाने के लिए आने वाली पीढ़ियां उनकी सदैव आभारी रहेंगी। रतन टाटा जी का जीवन इस बात की याद दिलाता है कि लीडरशिप का आकलन केवल उपलब्धियों से ही नहीं किया जाता है, बल्कि सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने की उसकी क्षमता से भी किया जाता है।

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