मोदी झारखंड में भ्रष्टाचार पर बोले, हेमंत का जिक्र नहीं:JMM, राजद-कांग्रेस को परिवारवादी कहा; पर भाजपा ने 18 सीटों पर नेताओं के रिश्तेदारों को उतारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को झारखंड विधानसभा के पहले फेज में होने वाली 43 सीटों पर चुनाव के लिए गढ़वा और चाईबासा में दो रैलियां की। पहली रैली गढ़वा में की। जो आजादी के बाद गढ़वा में पहली बार किसी प्रधानमंत्री की चुनावी सभा थी। PM मोदी की दूसरी सभा चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में की। यहां उन्होंने अपना पूरा भाषण आदिवासियों पर फोकस रखा।
प्रधानमंत्री ने कहा- ‘कुछ लोग जो यहां बैठे हैं वो कहते थे हमारी छाती पर झारखंड बनेगा। उनकी छाती पर झारखंड बन गया, लेकिन झारखंड के कुछ नेता उनकी गोदी में जाकर बैठ गए। पीएम का इशारा लालू प्रसाद यादव और हेमंत सोरेन पर था।’
मोदी ने हेमंत सोरेन का नाम लिए बिना उनके और उनके मंत्रियों के भ्रष्टाचार का जिक्र किया। उन्होंने कहा- मंत्री, विधायक हर कोई भ्रष्टाचार में शामिल है। एक मंत्री के घर से नोटों का पहाड़ निकला। मैंने भी पहली बार नोटों का पहाड़ टीवी पर देखा।
मोदी ने परिवारवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- JMM, राजद और कांग्रेस तीनों ही पार्टियां घोर परिवारवादी हैं। ये चाहती हैं कि सत्ता की चाबी हमारे परिवार के हाथ में ही रहे। हालांकि खुद भाजपा ने इस बार 68 में से 18 सीटों पर नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है। वहीं INDIA ब्लॉक ने 20 सीटों पर नेताओं के रिश्तेदारों को उतारा है।
प्रधानमंत्री मोदी के 70 मिनट के भाषण की 6 बातें…
1. भाजपा के संकल्प पत्र पर
मोदी बोले- झारखंड बीजेपी का संकल्प पत्र रोटी, बेटी और माटी के सम्मान और सुरक्षा और समृद्धि के लिए समर्पित है। माताओं, बहनों और बेटियों के कल्याण के लिए इसमें अनेक संकल्प लिए गए हैं। गोगो दीदी योजना- इसमें हर महीने माताओं बहनों को 2100 रुपए मिलेंगे।
गरीब परिवार की माताओं बहनों को पहले हमने उज्जवला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिए। अब झारखंड में बनने जा रही भाजपा सरकार 500 रुपए में सिलेंडर देगी। अगले साल दीपावली और रक्षाबंधन पर झारखंड की बहनों को दो मुफ्त सिलेंडर भी मिलने वाले हैं। भाजपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की बहनों से ये वादा किया और इसे पूरा भी किया।
2. JMM, राजद और कांग्रेस गठबंधन पर PM ने कहा- कुछ लोग जो यहां की सरकार में बैठे हैं, वो कहते थे कि हमारी छाती पर झारखंड बनेगा। उनकी छाती पर झारखंड बन गया, लेकिन झारखंड के कुछ नेता उनकी गोदी में जाकर बैठ गए। प्रधानमंत्री का इशारा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर था। उन्होंने कहा था कि मेरी मौत पर ही झारखंड बनेगा। JMM अलग झारखंड की मांग करती थी, आज दोनों दल साथ में सरकार चला रहे हैं।
आजादी के बाद से ही कांग्रेस का झूठे वादे करना का इतिहास रहा है। अभी ताजा ताजा झूठ हरियाणा का है जहां महिलाओं, ओबीसी सभी को कुछ न कुछ झूठ बेचने की कोशिश की। इन्होंने हिमाचल को बर्बाद कर दिया। वहां सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह के लिए आंदोलन करने पड़ रहे हैं। तेलंगाना में भी जनता पस्त पड़ गई है। कर्नाटक में भी यही हाल है।
उनके अध्यक्ष ने भी मान लिया है कि कांग्रेस झूठी गारंटी देती है। मैं तो हैरान हूं कि कैसे खड़गे जी के मुंह से सच निकल गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अनाप-शनाप घोषणाएं राज्यों को दिवालिया कर देंगी।
3. हेमंत सरकार के वादों और इरादों पर कांग्रेस, आरजेडी ने झूठे वादे किए हैं। इन्होंने 5 साल तक माताओं-बहनों के लिए कुछ नहीं किया। जब भाजपा की योजनाएं आई हैं, तो इन्होंने माताओं-बहनों की आंखों में धूल झोंकने के लिए झूठी घोषणाएं की हैं। ये घोषणाएं तो कर सकते हैं, लेकिन भाजपा के पास जो नेक नीयत है, वो कहां से लाओगे।
जेएमएम-कांग्रेस ने युवाओं के साथ धोखा ही किया है। इन लोगों ने बेरोजगारी भत्ते का वादा किया था। झूठ बोलकर वोट ले गए थे, लेकिन एक रुपया भी नहीं दिया। भर्तियों में धांधली, पेपर लीक ये तो यहां का जैसे उद्योग बन गया। सिपाही भर्ती के दौरान सरकार की लापरवाही के कारण कई नौजवानों की दुखद मृत्यु हो गई। झारखंड में भाजपा सरकार बनने के बाद 3 लाख सरकारी पदों को पारदर्शी तरीके से भरा जाएगा।
4. विपक्ष के परिवारवाद पर प्रधानमंत्री ने विपक्ष के परिवारवाद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- जेएमएम, राजद और कांग्रेस तीनों ही पार्टियां घोर परिवारवादी हैं। ये चाहती हैं कि सत्ता की चाबी हमारे परिवार के हाथ में ही रहे। अगर कोई अपनी काबिलियत से बढ़ भी गया तो उसके साथ ये कैसा बर्ताव करते हैं, ये हमने चंपाई सोरेन के बारे में देख लिया। एक आदिवासी के बेटे के साथ इन्होंने क्या किया, हम सबने देखा ही है।
जब मैं आपसे कहता हूं कि मेरा परिवार हो न हो, आप सब मेरा परिवार हैं, तो आपको सच लगता है कि नहीं। क्या आपके लिए सोचता हूं, आपके लिए जीता हूं कि नहीं। मेरे लिए देश के 140 करोड़ लोग मेरा परिवार हैं। उनके लिए उनका परिवार ही सबकुछ है। एक परिवार यहां धंधा करता है, दूसरा दिल्ली में।
5. झारखंड में भ्रष्टाचार पर मोदी झारखंड में भ्रष्टाचार पर भी बोले। उन्होंने कहा- झारखंड में 5 साल में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार हो गई हैं। मंत्री हो, विधायक हो, सांसद हो ऐसा कोई नहीं जिस पर भ्रष्टाचार का मामला न हो। जेएमएम के मंत्री के घर से नोटों का पहाड़ निकलता है। इतना पैसा कि अफसर गिनते-गिनते थक गए।
यहां के एक और मंत्री हैं, इन्होंने तो आपके हक के पानी के नल तक को नहीं छोड़ा। केंद्र सरकार ने दिल्ली से हजारों करोड़ रुपए पहुंचाए, लेकिन यहां की सरकारों ने अपनी तिजोरी में भर लिया। बालू तस्करी और ट्रांसफर-पोस्टिंग का धंधा खूब फल-फूल रहा है। जेएमएम-कांग्रेस ने जो माफिया तंत्र बनाया है, आपको हर वोट उस पर चोट करने के लिए देना है।
6. बांग्लादेशी घुसपैठियों पर PM बोले- ये तीनों दल सामाजिक तानाबाना तोड़ने पर आमादा हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट पाने के लिए ये लोग उन्हें पूरे झारखंड में बसा रहे हैं। जब स्कूलों तक में सरस्वती वंदना पर रोक लगने लगी तो पता चलता है कि खतरा कितना बड़ा है। जब तीज त्योहारों पर पत्थरबाजी होने लगे, जब माता दुर्गा को भी रोक दिया जाए, जब कर्प्यू लगने लगे तो पता चलता है कि स्थिति कितनी खतरनाक है।
जब बेटियों के साथ छल कपट होने लगे तो पता चलता है कि पानी सिर से गुजर चुका है। जब घुसपैठ का मामला कोर्ट में जाए और प्रशासन इससे इनकार करे तो पता चलता है कि सरकारी तंत्र में भी घुसपैठ हो चुकी है। ये आपकी माटी भी छीन रहे हैं, बेटी भी छीन रहे हैं। अगर जेएमएम की यही नीति जारी रही तो झारखंड में आदिवासियों का दायरा सिमट जाएगा। इस घुसपैठिए गठबंधन को उखाड़ फेंकना है।
गढ़वा के बाद चाईबासा में दूसरी रैली इन दो रैलियों के जरिए प्रधानमंत्री कुल 23 सीटों को साधने की कोशिश करेंगे। 2019 में भाजपा इन 23 में से सिर्फ 5 सीटें ही जीत पाई थी। हालांकि, वर्तमान में देखें तो 2019 में जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय जीते सरयू राय NDA प्रत्याशी हैं। साथ ही हुसैनाबाद से NCP के टिकट पर चुनाव जीते कमलेश सिंह इस बार भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मैदान में है।
पलामू प्रमंडलः NDA और ‘INDIA’ में कांटे की टक्कर पलामू प्रमंडल में तीन जिले हैं। पलामू, लातेहार और गढ़वा। विधानसभा की 9 सीटें हैं। इसमें 6 सीटें सामान्य हैं। दो सीटें एससी और एक एसटी के लिए आरक्षित हैं। ये सीटें हैं मनिका, लातेहार, पांकी, छतरपुर, डालटनगंज, विश्रामपुर, हुसैनाबाद, गढ़वा और भवनाथपुर।
सभी विधानसभा क्षेत्रों में जात-पात की राजनीति का काफी प्रभाव है। मनिका को छोड़ लगभग अन्य सीटों पर बिहार स्टाइल की जातिगत राजनीति होती है। चुनावी समीकरण की स्थिति यह है कि 9 में से 6 सीटों पर पिछले चुनाव की तरह इस बार भी मुख्य प्रतिद्वंदी NDA और INDIA का मुकाबला है। ये सीटें हैं लातेहार, पांकी, डालटनगंज, विश्रामपुर, गढ़वा और भवनाथपुर। वहीं, मनिका, छतरपुर और हुसैनाबाद में नया समीकरण बन सकता है। खास बात है कि किसी भी दल ने अपने वर्तमान विधायक का टिकट नहीं काटा है। फिलहाल, दोनों गठबंधन बराबरी पर नजर आ रहे हैं।
पलामू में पार्टियों की स्थिति समझिए…
NDA के अन्य घटक दलों की तुलना में भाजपा यहां मजबूत है। अभी 9 में से 5 विधायक भाजपा के हैं। पलामू प्रमंडल में विकास के मुद्दों के अलावा पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ पिछड़े वर्गों और आदिवासी वोटरों को भी अपनी ओर करने में लगी है। 2024 लोकसभा चुनाव के रिजल्ट को देखे तो भाजपा मजबूत स्थिति में है। यहां से भाजपा के बीडी राम ने शानदार जीत दर्ज की है।
वहीं, I.N.D.I.A गठबंधन में झामुमो का प्रभाव आदिवासी इलाकों में मजबूत है। माले, राजद और कांग्रेस साथ चुनाव लड़ रही है। इस स्थिति में कड़ी टक्कर है। गठबंधन विकास के मुद्दों के साथ-साथ आदिवासी हितों और कई अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।
जातीय समीकरण: आदिवासी-ओबीसी को साधने में जुटे दोनों गठबंधन पलामू प्रमंडल में ब्राह्मण, यादव, कुर्मी, मुस्लिम, आदिवासी और अनुसूचित जाति के वोटर प्रमुख हैं। इन समुदायों के वोटर्स को साधने के लिए राजनीतिक दलों के बीच कड़े मुकाबले की स्थिति है। मोटे तौर पर यादव और अन्य पिछड़ी जातियों का समर्थन राजद, कांग्रेस और झामुमो को मिलता रहा है। भाजपा की पैठ सवर्ण जातियों और शहरी मतदाताओं में है। पलामू प्रमंडल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटर्स का भी प्रभाव है। झामुमो और कांग्रेस का आदिवासी मतदाताओं पर प्रभाव दिखता हैं।
कोल्हान में है सबसे बड़ी लड़ाई, PM ने संभाली कमान भाजपा गठबंधन के लिए कोल्हान बड़ी चुनौती की तरह है। हवा का रुख बता रहा कि राज्य के इसी हिस्से में सबसे तीखी लड़ाई लड़ी जाएगी। ऐसा इसलिए कि कोल्हान का रुख ही तय कर देता है कि किसकी सत्ता आएगी, किसकी जाएगी। 2019 का विधानसभा चुनाव नजीर है। कोल्हान में NDA का खाता नहीं खुला तो सरकार चली गई। सत्ता के दावेदार दोनों गठबंधनों को कोल्हान की अहमियत का एहसास है।
चाईबासा में होने वाली सभा से मोदी आदिवासी वोटरों के साथ ही कुर्मी और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटरों को साधने का प्रयास करेंगे। कोल्हान की 14 सीटों पर औसतन 20 से 25 फीसदी वोटर आदिवासी हैं। इसके साथ ही ईचागढ़, जुगसलाई समेत कई सीटों पर कुर्मी वोटर्स की संख्या 15 से 18 फीसदी के करीब है। यह संख्या भी निर्णायक होती है।
भाजपा ने हर चेहरे को बांधा
भाजपा ने कोल्हान का हर कील-कांटा दुरुस्त करने की कोशिश की है। उसने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की पुत्र वधू पूर्णिमा दास साहू को जमशेदपुर पूर्वी सीट, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा को पोटका से मैदान में उतार दिया है। राज्य में कोल्हान ही इकलौता क्षेत्र है, जहां चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटा-बहू-पत्नी को भाजपा चुनाव लड़ा रही है। पार्टी नेतृत्व ने इस बहाने कोल्हान की राजनीति को साधा है। हर चेहरे को क्षेत्र विशेष से बांध आपसी खींचतान की संभावना को ही खत्म कर दिया है।
कोल्हान में गठबंधन तोड़ना भाजपा को पड़ा था महंगा
कोल्हान एरिया में 2019 में बीजेपी का आजसू से गठबंधन तोड़ने का फैसला महंगा साबित हुआ, क्योंकि बाद में उसने पांच सीटों पर जीत का अंतर से ज्यादा वोट हासिल किए। वोट शेयर के हिसाब से बीजेपी ने 29%, जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन ने 42%, आजसू ने 8%, और जेवीएम (पी) ने चार प्रतिशत वोट हासिल किया।
यदि बीजेपी, एजेएसयू, और जेवीएम (पी) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा होता, तो उन्होंने इन 14 सीटों में से सात सीटें जीती होती। इसके अलावा अब चंपाई सोरेन के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी को उम्मीद है कि वह इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ हासिल करेगी और इस चलन को उलट सकेगी।
भाजपा के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
कोल्हान क्षेत्र की हस्तियों का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन इसके सबसे बड़े नजीर होंगे। पूर्णिमा दास साहू की जमशेदपुर पूर्वी सीट से जीत-हार सीधे ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास तो पोटका से पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा की लड़ाई दोनों की जमीनी पकड़ परखेगी। सबसे दिलचस्प नजारा जमशेदपुर पश्चिमी में दिखेगा। यहां सरयू राय और मंत्री बन्ना गुप्ता मैदान में हैं।
