4 धाम में अब तक 44 लाख श्रद्धालु पहुंचे:केदारनाथ-यमुनोत्री के कपाट आज से बंद, बद्रीनाथ में 17 नवंबर तक दर्शन
उत्तराखंड में स्थित चारों धामों के कपाट बंद होने का सिलसिला शनिवार से शुरू हो गया है। चारों धामों में अब तक 44 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं।
उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री धाम के कपाट कल 2 नवंबर को दोपहर 12:14 बजे बंद हुए। आज सुबह 8:30 बजे सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के साथ केदारनाथ के कपाट बंद किए गए। वहीं, यमुनोत्री धाम के गेट भी आज दोपहर 12:04 बजे बंद कर दिए गए। बद्रीनाथ में 17 नवंबर तक दर्शन किए जा सकेंगे।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया इंचार्ज हरीश गौर ने कहा कि केदारनाथ के गेट बंद होने की सेरेमनी 18,000 लोगों ने देखी। वहीं, समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि 10 मई को केदारनाथ के गेट खुले थे। इस सीजन में 16 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
केदारनाथ धाम के कपाट बंद…3 तस्वीरें
CM धामी बोले- मंदिर का पुनर्निमाण और पुनर्विकास होगा कपाट बंद होने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक, द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक पावन केदारनाथ धाम के कपाट आज विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बंद हो गए हैं।
हमारी सरकार केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास के लिए पूरी तरह से समर्पित है। श्रद्धालुओं सुविधाजनक यात्रा और क्षेत्र की इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए हम निरंतर कार्य करते रहेंगे।
कपाट बंद होने से पहले केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति की मंदिर परिक्रमा हुई
शनिवार को बाबा केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति को भंडार से बाहर लाया गया। पंचमुखी उत्सव मूर्ति को पुजारी शिवशंकर ने स्नान कराया, जिसके बाद धर्माधिकारी औंकार शुक्ला वेदपाठी स्वयंबर सेमवाल ने पूजा-अर्चना की।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने पंचमुखी उत्सव मूर्ति के दर्शन किए। मंदिर की परिक्रमा के बाद भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव मूर्ति डोली को मंदिर परिसर में विराजमान कर दिया गया।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट बंद होने के बाद बाबा केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव मूर्ति विभिन्न पड़ावों में प्रवास के बाद शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। कपाट बंदी के लिए केदारनाथ मंदिर को दस क्विंटल फूलों से सजाया गया।
पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रही, केदारनाथ में रोज 15 हजार ही दर्शन कर पाए
- चारों धाम में पिछले साल रिकॉर्ड 55 लाख लोग पहुंचे थे, जिससे व्यवस्थाएं बिगड़ गई थीं। उत्तराखंड पुलिस और पर्यटन विभाग ने इस बार चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की प्रतिदिन की संख्या सीमित रखी।
- पिछले साल चारों धामों में रोजाना 60 हजार से अधिक तीर्थयात्री दर्शन के लिए पहुंचे रहे थे। पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे के मुताबिक इस बार केदारनाथ में एक दिन में 15 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की लिमिट रखी गई।
- इस साल बद्रीनाथ धाम में 16 हजार लोगों को, यमुनोत्री में 9 हजार वहीं, गंगोत्री में 11 हजार लोगों को प्रतिदिन दर्शन की अनुमति थी। यानी चारों धाम में रोजाना 51 हजार लोग दर्शन कर सके।
- पहली बार चार धाम यात्रा मार्ग पर 400 से ज्यादा डॉक्टरों को तैनता किया गया। इनमें 256 इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ डॉक्टर थे।
गंगोत्री धाम के कपाट 2 नवंबर को बंद हुए
उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री धाम के कपाट 2 नवंबर को दोपहर 12:14 बजे बंद हुए। इस मौके पर गंगोत्री धाम हर-हर गंगे, जय मां गंगा के जयकारे लगे।
सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के साथ मां गंगा की डोली यात्रा के साथ अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा (मुखीमठ) के लिए रवाना हुईं। अब 6 महीने के लिए मां गंगा के दर्शन शीतकालीन प्रवास मुखवा में होंगे।
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि मां गंगा की उत्सव डोली रात्री विश्राम के लिए मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रुकी। भजन कीर्तन किए गए।
बद्रीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को बंद होंगे
चारों धाम में ब्रदीनाथ धाम ही जो इस बार सबसे लेट बंद होंगे। इस धाम के गेट 17 नवंबर को बंद किए जाएंगे। यहां अब तक 13 लाख लोग पहुंच चुके हैं। कल यानी 4 नवंबर को तृतीय केदार, तुंगनाथ के कपाट भी बंद होंगे। जबकि द्वितीय केदार, मद्महेश्वर के कपाट 20 नवंबर को बंद होंगे।
चार धाम की विशेषता और रूट मैप
1. यमुनोत्री
उत्तराखंड के गढ़वाल का सबसे पश्चिमी मंदिर यमुनोत्री है। यमुनोत्री यमुना नदी का उद्गम स्थल है। यह देवी यमुना मंदिर और जानकी चट्टी के पवित्र तापीय झरनों के लिए जाना जाता है। यमुना मंदिर का निर्माण टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह ने करवाया था।
फेमस जगह और मंदिर: यमुनोत्री मंदिर, सप्तऋषि कुंड, सूर्य कुंड, दिव्य शिला, हनुमानचट्टी, खरसाली।
2. गंगोत्री
उत्तरकाशी में समुद्र तल से 3200 मीटर की ऊंचाई पर गंगोत्री है। यहां पवित्र नदी गंगा का मंदिर है। जहां लोग स्नान के बाद दर्शन करते हैं।
फेमस जगह और मंदिर: भोजबासा, गंगनानी, केदारताल, गौमुख, गंगोत्री मंदिर, भैरोंघाटी, जलमग्न शिवलिंग, तपोवन।
3. केदारनाथ
भगवान शिव का मंदिर केदारनाथ में है। यह समुद्र तल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां मंदाकिनी नदी है। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
फेमस जगह और मंदिर: गांधी सरोवर, फाटा, सोन प्रयाग, त्रियुगी नारायण मंदिर, चंद्रपुरी, कालीमठ, वासुकी ताल, शंकराचार्य समाधि, गौरीकुंड।
4. बद्रीनाथ
बद्रीनाथ अलकनंदा नदी के बाएं से समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भगवान विष्णु का मंदिर है।
फेमस जगह और मंदिर: पांडुकेश्वर, योगध्यान बद्री मंदिर, माणा गांव, सतोपंथ झील, तप्त कुंड, नीलकंठ शिखर, चरण पादुका, माता मूर्ति मंदिर, नारद कुंड, भीम पुल, गणेश गुफा, ब्रह्म कपाल, शेषनेत्र, व्यास
बद्रीनाथ-केदारनाथ में दीपावली की धूम: दोनों धामों में की गई विशेष पूजा; मंदिर की भव्यता को देखकर उत्साहित नजर आए श्रद्धालु
बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में दीपावली का त्यौहार 1 नवंबर शुक्रवार को मनाया गया। इस अवसर पर दोनों धामों के मंदिरों को फूलों से सजाया गया है रात में मंदिर रंग-बिरंगे लाइटों से मंदिर जगमगाते नजर आए।बदरीनाथ धाम में शाम पांच बजे के बाद प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन हुआ। पढ़ें पूरी खबर…
