कश्मीर में सेना के वाहन पर आतंकी हमला:3 जवान शहीद, एक पोर्टर की भी मौत; 3 से ज्यादा आतंकियों के शामिल होने की आशंका
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग के नागिन इलाके में एलओसी के पास गुरुवार शाम 18 राष्ट्रीय राइफल्स के वाहन पर आतंकियों ने हमला किया। आतंकियों की गोलीबारी में 3 जवान शहीद हो गए। इसके अलावा एक पोर्टर की भी मौत हो गई।
पोर्टर सेना की मदद के लिए होते हैं, वे पहाड़ी इलाके और फ्रंट पोस्ट पर सामान पहुंचाने में मदद करते हैं। हमले में सेना के 6 जवान घायल हुए। सभी घायलों को श्रीनगर के 92 बेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 3 जवानों ने दम तोड़ दिया।
हमले में 3 से ज्यादा आतंकी शामिल सेना के सूत्रों के मुताबिक हमले में 3 से ज्यादा आतंकी शामिल हो सकते हैं। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और आतंकियों की तलाश शुरू कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि आतंकियों ने उत्तरी कश्मीर के बोटा पथरी सेक्टर में LoC से घुसपैठ की होगी।
सुबह पुलवामा में आतंकी हमला, मजदूर घायल इससे पहले आज सुबह ही दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के बटगुंड में आंतकवादियों ने एक और मजदूर पर गोलीबारी की थी, जिसमें वो घायल हो गया था। घायल शुभम कुमार यूपी का रहने वाला है। उसका अस्पताल में इलाज जारी है।
वहीं, गुरुवार सुबह ही श्रीनगर के गनबाग इलाके में एक गैर कश्मीरी युवक का शव मिला था। पुलिस के मुताबिक मृतक पश्चिम बंगाल का रहने वाला एमडी जाहुद था।
जम्मू-कश्मीर में बीते एक हफ्ते में गैर कश्मीरियों पर हुआ यह तीसरा हमला है। इससे पहले 20 अक्टूबर को गांदरबल और 18 अक्टूबर को शोपियां में आतंकियों ने टारगेट किलिंग को अंजाम दिया था, जिसमें 7 लोगों की मौत हुई थी।
लगातार हो रहे आतंकी हमलों को देखते हुए राजभवन में आज हाई लेवल मीटिंग भी हुई। इसमें नॉर्थ विंग कमांडर, जम्मू-कश्मीर DGP, कोर कमांडर और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए।
एक हफ्ते के अंदर 3 हमले, 8 लोगों की मौत
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में 20 अक्टूबर की रात हुए हमले में कश्मीर के डॉक्टर, MP के इंजीनियर और पंजाब-बिहार के 5 मजदूरों की जान गई थी। इसकी जिम्मेदारी लश्कर के संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। बुधवार को इस हमले में शामिल आतंकी की तस्वीर सामने आई। हाथ में AK-47 जैसी राइफल लिया हुआ आतंकी इमारत में घुसता नजर आ रहा है।
भास्कर को सूत्रों ने सोमवार को बताया कि TRF चीफ शेख सज्जाद गुल इस हमले का मास्टरमाइंड था। आतंकी हमले में मारे गए मजदूर केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे।
TRF चीफ शेख सज्जाद मास्टरमाइंड हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TRF ने पिछले डेढ़ साल में अपनी स्ट्रैटजी बदली है। पहले TRF कश्मीर पंडितों की टारगेट किलिंग करता था। अब यह संगठन गैर कश्मीरियों और सिखों को निशाना बना रहा है।
370 हटने के बाद TRF एक्टिव, टारगेट किलिंग की TRF को भारत में आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि TRF को पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर ने बनाया है। यह लश्कर और जैश के कैडर को मिलाकर बनाया गया है। यह संगठन कश्मीरियों, कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं की हत्या की कई घटनाओं में शामिल है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद TRF ज्यादा एक्टिव हो गया है। हमलों की जिम्मेदारी लश्कर नहीं, बल्कि TRF लेता है।
TRF का मकसद: 2020 के बाद TRF टारगेट किलिंग की ज्यादातर घटनाओं में शामिल रहा। कश्मीरी पंडितों, प्रवासी कामगारों, सरकारी अफसरों, नेताओं और सिक्योरिटी फोर्सेस को निशाना बनाता है। 370 हटने के बाद सरकारी योजनाओं, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की योजनाओं पर पानी फेरना और अस्थिरता फैलाना इसका मकसद है। इसने सरकार या पुलिस में काम करने वाले उन स्थानीय मुस्लिमों को भी निशाना बनाया है, जिन्हें वह भारत का करीबी मानता है।
केंद्र का इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट लगभग पूरा… 2 पॉइंट
1.लद्दाख से कनेक्टिविटी टनल जरूरी रिपोर्ट के मुताबिक, सोनमर्ग के इस इलाके में कभी आतंकी हमला नहीं हुआ था। यह क्षेत्र CM उमर अब्दुल्ला के विधानसभा क्षेत्र में आता है। श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे का यह टनल प्रोजेक्ट कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हर मौसम में श्रीनगर की लद्दाख से कनेक्टिविटी रहेगी। टनल प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रेक्ट APCO इंफ्राटेक कंपनी को मिला था।
2. आचार संहिता के कारण उद्घाटन नहीं हुआ अधिकारियों के अनुसार, 6.4 किलोमीटर लंबी इस टनल का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के दौरान लगी आचार संहिता के कारण इसका उद्घाटन नहीं हो सका। कंपनी के लिए डंपर ट्रक चलाने वाले शख्स ने कहा- टनल पर काम करने वाले अधिकांश मजदूर कुछ समय पहले ही चले गए थे।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा था, पाकिस्तान हमले रोके फिर बातचीत होगी इससे पहले 20 अक्टूबर के हमले में 7 लोगों की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 21 अक्टूबर को कहा था- अगर इस्लामाबाद भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखना चाहता है तो उसे यहां आतंकी घटनाएं रोकनी होंगी।
उन्होंने कहा था- दोनों देशों में बातचीत कैसे हो सकती है? आप (पाकिस्तान) हमारे निर्दोष लोगों को मारते हैं और फिर बातचीत के लिए कहते हैं। जब तक पड़ोसी देश जम्मू-कश्मीर में हत्याएं बंद नहीं करता, तब तक नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच कोई बातचीत नहीं हो सकती।
अब्दुल्ला ने कहा था- मैं पाकिस्तान के शासकों से कहना चाहता हूं कि अगर वे वाकई भारत से दोस्ती चाहते हैं, तो उन्हें यह सब बंद कर देना चाहिए। कश्मीर कभी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा।
आतंकवादी पाकिस्तान से आ रहे फारूक अब्दुल्ला ने कहा था – गांदरबल की घटना दर्दनाक है। गरीब मजदूर यहां आजीविका के लिए आते हैं ताकि वे अपने परिवार का पेट भर सकें। इन दरिंदों ने उन्हें शहीद कर दिया। उनके साथ हमारे एक डॉक्टर भी थे जो लोगों की सेवा करते थे। उन्होंने भी अपनी जान गंवा दी।
अब्दुल्ला ने कहा था कि अगर आतंकवादियों को लगता है कि वे इस तरह की हरकतों में शामिल होकर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी हुकूमत स्थापित कर सकते हैं, तो वे गलत हैं। इन दरिंदों को क्या मिलेगा? क्या वे सोचते हैं कि वे यहां पाकिस्तान स्थापित कर देंगे?
अब्दुल्ला ने कहा हम कई सालों से देख रहे हैं कि आतंकवादी वहां (पाकिस्तान) से आ रहे हैं। हम इस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हम अपनी मुश्किलों से बाहर निकल सकें।
