हरियाणा के 14 में से 12 मंत्री करोड़पति:शर्मा इकलौते नेता जिसने हुड्डा को हराया, नरबीर हरा चुके इंद्रजीत को; मंत्रियों की डिटेल्ड प्रोफाइल जानिए…
हरियाणा में गुरुवार (17 अक्टूबर) को CM नायब सैनी के साथ 13 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। खास बात ये है कि सैनी के मंत्रिमंडल में शामिल किसी मंत्री पर कोई केस नहीं यानी बेदाग मंत्रिमंडल बनाया गया है।
कैबिनेट में शामिल 14 चेहरों में से 12 करोड़पति हैं जिनमें सीएम सैनी भी शामिल हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान जमा एफिडेविट के मुताबिक सबसे ज्यादा 98 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी विपुल गोयल की है। कृष्ण कुमार बेदी और गौरव गौतम ही ऐसे मिनिस्टर हैं जो करोड़पति नहीं हैं। बेदी की कुल संपत्ति 57 लाख और गौतम की कुल प्रॉपर्टी 35.64 लाख रुपए है।
सैनी की कैबिनेट में सबसे युवा गौरव गौतम हैं, जिनकी उम्र 36 साल है। सबसे उम्रदराज मंत्री श्याम सिंह राणा हैं जो 76 साल के हैं। कैबिनेट में महिला चेहरे के तौर पर आरती राव और श्रुति चौधरी हैं।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो मंत्री बनने वालों में से अरविंद शर्मा डॉक्टर हैं। सीएम नायब सैनी और श्रुति चौधरी ने LLB कर रखी है। वहीं आरती राव और गौरव गौतम के पास कोई गाड़ी नहीं है।
कैबिनेट में शामिल अरविंद शर्मा लोकसभा चुनाव में पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को हरा चुके हैं। वहीं नरबीर ने 1987 में विधानसभा चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह को हराया था।
अब पढ़िए CM और 13 मंत्रियों की डिटेल प्रोफाइल…
1. सैनी ने चुनाव में अगुवाई की, 48 सीटों पर जीत मिली नायब सिंह सैनी लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने इस बार कुरूक्षेत्र जिले की लाडवा सीट से चुनाव लड़ा। इससे पहले वह मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफे के कारण खाली हुई करनाल विधानसभा सीट से उपचुनाव जीते थे। 54 साल के नायब सिंह सैनी का जन्म 25 जनवरी 1970 को हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ने के बाद वह मनोहर लाल खट्टर के संपर्क में आए।
सैनी ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 2009 में अंबाला जिले की नारायणगढ़ सीट से लड़ा लेकिन जीत नहीं पाए। 2014 की मोदी लहर में उन्होंने नारायणगढ़ से दोबारा चुनाव लड़ा और विधायक बने। मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली सरकार में उन्हें मंत्रीपद मिला।
सरल स्वभाव सैनी की सबसे बड़ी ताकत भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कुरूक्षेत्र से टिकट दिया जहां से वह विजयी रहे। अक्टूबर-2023 में वह हरियाणा BJP के अध्यक्ष बनाए गए और तकरीबन 6 महीने बाद, 12 मार्च 2024 को खट्टर के इस्तीफे के बाद उन्हें प्रदेश का CM नियुक्त किया गया।
इस बार भाजपा ने चुनाव से पहले ही सैनी को अपना सीएम चेहरा घोषित कर दिया था। सरल स्वभाव वाले सैनी की अगुआई में पार्टी ने रिकॉर्ड 48 सीटों पर जीत दर्ज की।
नायब सैनी की पत्नी सुमन सैनी भी राजनीति में एक्टिव हैं। उनके 2 बच्चे हैं। उनका बेटा चंडीगढ़ स्थित यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई कर रहा है जबकि बेटी अंशिका ने चंडीगढ़ में 12वीं की है।
2. अनिल विज ने बैंक की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा हरियाणा भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल अनिल विज को सैनी के बाद दूसरे नंबर पर शपथ दिलाई गई। वह अंबाला कैंट से सातवीं बार विधायक बने हैं। अनिल विज ने बैंक की नौकरी छोड़कर सियासत में कदम रखा।
अनिल विज के पिता का नाम भीमसेन है जो रेलवे में अधिकारी थे। 15 मार्च 1953 को पैदा हुए अनिल विज ने पंजाब यूनिवर्सिटी से बीएससी की है। 1970 में विज ABVP के महासचिव बने। अनिल विज 16 साल बैंक की जॉब करने के बाद पॉलिटिक्स में एक्टिव हुए।
1990 में पहली बार MLA बने, दो बार निर्दलीय जीते अनिल विज ने पहली बार 1990 में अंबाला कैंट सीट से उपचुनाव लड़ा और विधायक बने। 1991 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। एक समय में अनिल विज अंबाला कैंट में इतने मजबूत हो गए थे कि उन्होंने दो बार निर्दलीय चुनाव लड़ा और दोनों बार जीत हासिल की। अनिल विज ने 1996 और 2000 में निर्दलीय चुनाव जीता।
2009 में उन्होंने अंबाला कैंट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद 2014, 2019 और 2024 में भी उन्होंने बड़े अंतर से जीत हासिल की।
3. राज्यसभा से इस्तीफा देकर दूसरी बार मंत्री बने कृष्णलाल पंवार पानीपत जिले की इसराना विधानसभा सीट से विधायक चुने गए कृष्णलाल पंवार 2014 के बाद भाजपा-राज में दूसरी बार कैबिनेट मंत्री बने हैं। पंवार एससी बिरादरी का बड़ा चेहरा हैं और उन्होंने राजनीति में लंबी पारी खेली है। भाजपा में आने से पहले वह ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी, इनेलो में थे। वह करनाल जिले की असंध सीट से इनेलो के विधायक भी रह चुके हैं। 2014 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली थी।
2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद कृष्णलाल पंवार मनोहर लाल खट्टर की अगुआई वाली सरकार में परिवहन, आवास और जेल मंत्री रहे। 2019 में वह इसराना सीट पर ही कांग्रेस के बलबीर वाल्मीकि से हार गए।
वर्ष 2022 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया था। इस बार पार्टी ने उन्हें लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव में उतारा। विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।
4. नरबीर ने 26 साल की उम्र में हराया था राव इंद्रजीत को राव नरबीर सिंह को चौथी बार प्रदेश के मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इस बार वह बादशाहपुर विधानसभा सीट से दूसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। वर्ष 2014 की मोदी लहर के दौरान राव नरबीर ने ही बादशाहपुर सीट पर पहली बार कमल खिलाया था।
राव नरबीर सिंह के परिवार का सियासत से बहुत पुराना नाता है। खुद राव नरबीर ने वर्ष 1987 में महज 26 साल की उम्र में अपना पहला चुनाव लड़ा और जाटूसाना सीट से अहीरवाल के दिग्गज कहे जाने वाले राव इंद्रजीत सिंह को धूल चटाकर विधायक बन गए। तब ताऊ देवीलाल ने उन्हें अपनी सरकार में मंत्री बनाया।
दादा अंग्रेजी हुकूमत में MLC रहे, पिता रह चुके कैबिनेट मंत्री राव नरबीर का जन्म 2 अप्रैल 1961 को गुरुग्राम में हुआ। वह मोहर सिंह यादव के पोते हैं, जो 1942 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान देश के बंटवारे से पहले एमएलसी थे। नरबीर के पिता महावीर सिंह यादव भी हरियाणा में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
राव नरबीर 1996 में सोहना से विधायक बने तो बंसीलाल ने उन्हें अपनी सरकार में परिवहन एवं सहकारिता मंत्री बनाया। 2014 में बादशाहपुर से विधायक बनने के बाद वह मनोहर लाल सरकार में लोक निर्माण एवं वन मंत्री बने।
2019 में भाजपा ने राव नरबीर को टिकट नहीं दिया। इस बार पार्टी ने फिर मैदान में उतारा तो राव नरबीर जीतकर फिर विधानसभा पहुंचे।
5. महिपाल ढांडा भाजपा का जाट चेहरा पानीपत ग्रामीण सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बने महिपाल ढांडा को दूसरी बार मंत्री बनने का मौका मिला है। 2009 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई पानीपत ग्रामीण सीट पर भाजपा ने 2014 में पहली बार महिपाल ढांडा को टिकट दिया और वह विजयी रहे। तब उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 36,132 वोट से हराया।
BJP ने 2019 में उन्हें फिर टिकट दिया तो वह जजपा के देवेंद्र कादियान को 21,961 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचे। इस बार लगातार तीसरी बार टिकट मिलने के बाद महिपाल ढांडा को मिले कुल वोट और उनकी जीत का मार्जिन भी बढ़ गया। इस बार उन्हें 1,01,079 वोट लेकर कांग्रेस के सचिन कुंडू को 50,212 वोट से हराया।
भाजपा से ही राजनीति की शुरुआत महिपाल ढांडा ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भाजपा से ही की। उनकी गिनती पार्टी के चुनिंदा जाट चेहरों में होती है। महिपाल ढांडा 1996 से 2004 तक भाजपा के स्टूडेंट विंग- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में प्रदेश सहमंत्री रहे।
वर्ष 2004 में भाजपा ने उन्हें पानीपत जिला इकाई का उपाध्यक्ष बनाया। 2006 में उन्हें प्रमोट करके पानीपत जिला इकाई का महामंत्री बनाया गया जिस पर वह 2009 तक रहे।
वर्ष 2009 से 2012 तक ढांडा हरियाणा में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रहे। वर्ष 2012 में पार्टी ने उन्हें हरियाणा में अपने किसान मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष बना दिया। जाट बिरादरी में ढांडा की अच्छी पकड़ है।
6. अरविंद शर्मा डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद राजनीति में कूदे सैनी मंत्रिमंडल में शामिल डॉ. अरविंद कुमार ने रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी की पढ़ाई की है। 25 नवंबर 1962 को पैदा हुए अरविंद शर्मा के पिता का नाम पंडित सतगुरु दास शर्मा और मां का नाम बिमला देवी है। डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह राजनीति में आ गए। अरविंद शर्मा की पत्नी का नाम रीटा शर्मा है। दोनों की शादी 9 नवंबर 1989 को हुई। उनका एक बेटा और एक बेटी है।
दीपेंद्र हुड्डा को हराने वाले एकमात्र नेता अरविंद शर्मा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1996 में की। उन्होंने सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवार रिजक राम को हराकर सांसद बने। वह 2004 और 2009 में कांग्रेस के टिकट पर करनाल के सांसद बने। जनवरी-2014 में अरविंद शर्मा कांग्रेस छोड़कर BSP में शामिल हो गए।
BSP ने उन्हें 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपना CM चेहरा बनाया। अरविंद शर्मा ने तब दो सीटों- यमुनानगर और जुलाना- से चुनाव लड़ा लेकिन दोनों ही जगह हार गए।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अरविंद शर्मा भाजपा में शामिल हो गए। BJP ने उन्हें रोहतक लोकसभा सीट पर दीपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने उतारा। उस चुनाव में अरविंद शर्मा ने दीपेंद्र हुड्डा को 7,503 वोट से हराया। अरविंद शर्मा इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्होंने दीपेंद्र हुड्डा को चुनाव हराया है।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अरविंद शर्मा को फिर रोहतक सीट से उम्मीदवार बनाया लेकिन इस बार वह दीपेंद्र हुड्डा से हार गए। इसके बाद उन्हें विधानसभा चुनाव में सोनीपत जिले की गोहाना सीट से उतारा गया जहां से वह विजयी रहे।
7.बिजनेसमैन से राजनेता बने विपुल गोयल हरियाणा में कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले विपुल गोयल सबसे अमीर मंत्री हैं। सरकार में वह वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे। फरीदाबाद जिले के रहने वाले विपुल बिजनेसमैन के साथ-साथ पशु-पक्षी प्रेमी रहे हैं। उनके पिता बड़े बिजनेसमैन थे। पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए विपुल गोयल भी एक नामी बिजनेसमैन बन गए।
बिजनेस के साथ-साथ उनके अंदर समाज के लिए कुछ करने का जुनून था। जिसके चलते विपुल गोयल ने पर्यावरण को लेकर कई मुहिम शुरू की थी। धीरे-धीरे फरीदाबाद के आसपास लोग उन्हें पर्यावरण प्रेमी और पशु प्रेमी के तौर पर जानने लगे। जिसके बाद 2013 में उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली।
पहले चुनाव में जीते, 2019 में कटी टिकट
2013 में भाजपा से जुड़ने के बाद पार्टी ने 2014 के चुनाव में उन्हें फरीदाबाद सीट से चुनावी मैदान में उतारा। ये गोयल का पहला चुनाव था लेकिन अपने डेब्यू में ही उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और जीत हासिल की। हालांकि उस समय उन्हें मंत्रिमंडल में कोई जगह नहीं मिली। 2016 में मनोहर लाल खट्टर की कैबिनेट का विस्तार हुआ तो उन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया।
हालांकि 2019 में फरीदाबाद सांसद कृष्ण पाल गुर्जर के मतभेदों के कारण उनका टिकट काट दिया गया था। लेकिन बगावत करने और दूसरी पार्टी में जाने की बजाए विपुल गोयल पार्टी में ही रहे।
जिसके बाद 2024 में पार्टी ने उन्हें फिर से टिकट दी और चुनाव जीतने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में विपुल गोयल की अच्छी पकड़ है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी बताए जाते हैं।
8. CM नायब सैनी ने BJP में वापसी कराई, अब राणा को मंत्री बनाया श्याम सिंह राणा मूलरूप से जिला कुरुक्षेत्र के गांव चनार रेहड़ी के रहने वाले हैं। उन्हें नायब सैनी के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बनाया गया है। इस चुनाव में उन्होंने रौदार सीट से जीत हासिल की है। वह एक बड़ा राजपूत चेहरा हैं। 2014 में वह बीजेपी की टिकट पर पहली बार जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। लेकिन 2019 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वहीं 2020 में उन्होंने किसान बिल का विरोध किया और बीजेपी छोड़ दी थी। जिसके बाद इसी साल जुलाई में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने खुद उन्हें पटका पहनाकर पार्टी में शामिल कराया।
सपा से की शुरुआत, 2007 में भाजपा जॉइन की राणा के सियासी सफर की बात करें तो उन्होंने अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की थी। साल 2007 में उन्होंने भाजपा जॉइन की। पार्टी ने उन्हें दो बार जिला अध्यक्ष भी बनाया। वह प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे। 2009 में पार्टी के बैनर से उन्होंने रादौर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2014 में पार्टी ने फिर से एक बार राणा को चुनावी मैदान में उतारा, और वह करीब 38 हजार वोटों से जीत गए। खट्टर सरकार में कुछ समय के लिए वह मुख्य संसदीय सचिव भी रहे।
9. गंगवा 2 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में डिप्टी स्पीकर रह चुके
10. दो दशक से BJP के साथ, खट्टर के करीबी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कृष्ण कुमार बेदी को नायब सैनी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कृष्ण कुमार बेदी नरवाना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं, इससे पहले खट्टर सरकार में भी वो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
वह पिछले 20 वर्षों से भाजपा से जुड़े हुए हैं और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से पार्टी में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। वह पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के राजनीतिक सचिव भी रह चुके हैं। जिसकी वजह से उन्हें खट्टर का काफी करीबी माना जाता है।
2019 में हारने के बावजूद 2024 में मिला टिकट बेदी ने 2014 में शाहबाद से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्होंने जीत हासिल की थी। वह मनोहर लाल के करीबियों में से एक थे, जिसके चलते उनको हरियाणा मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया था। वो भाजपा में हरियाणा के बड़े दलित नेता के रूप में जाने जाते हैं। 2019 विधानसभा चुनाव में उन्हें शाहाबाद सीट से भाजपा के टिकट पर हार का मुंह देखना पड़ा था।
हालांकि 2024 में भी वह शाहबाद विधानसभा से भाजपा से टिकट मांग रहे थे, लेकिन इस बार भाजपा ने उनको नरवाना विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया और यहां पर उन्होंने जीत हासिल की।
11. श्रुति पहली बार की विधायक, पूर्व सीएम बंसीलाल की पोती तोशाम विधानसभा सीट से अपना पहला विधानसभा चुनाव जीतने वाली श्रुति चौधरी को भी सैनी कैबिनेट में मंत्री बनाया गया है। श्रुति चौधरी पूर्व सीएम चौधरी बंसीलाल की पोती और पूर्व मंत्री चौधरी सुरेंद्र सिंह की बेटी हैं। उनकी मां किरण चौधरी तोशाम से विधायक रह चुकी हैं।
बंसीलाल तोशाम सीट से जीतकर ही हरियाणा के सीएम बने थे। उनके बेटे चौधरी सुरेंद्र भी इसी सीट से जीत कर प्रदेश में कृषि मंत्री बने। अब सुरेंद्र सिंह और किरण चौधरी की बेटी श्रुति ने भी इसी सीट से जीत दर्जकर मंत्रिमंडल में जगह बनाई है।
12. शूटर से मंत्री बनी आरती राव हरियाणा सरकार में आरती राव भी कैबिनेट में शामिल हो गई हैं। आरती राव ने अपने पहले ही चुनाव में अटेली से कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की है। वह पिछले 10 सालों से राजनीति में एक्टिव हैं। राजनीति में आने से वह नेशनल लेवल की शूटिंग खिलाड़ी रह चुकी हैं।
आरती राव को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता राव इंद्रजीत सिंह गुरुग्राम से मौजूदा सांसद और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री हैं। उनके दादा राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें राव इंद्रजीत सिंह ने उत्तराधिकारी बनाया है।
दो बार टिकट नहीं मिली तो पिता नाराज हुए आरती राव पिछले 10 साल से राजनीति में आने की कोशिश कर रहीं थी। हालांकि उनके पिता राव इंद्रजीत के कांग्रेस में जाने की वजह से 2014 और 2019 में उन्हें टिकट नहीं मिली। राव इंद्रजीत इसको लेकर काफी नाराज भी रहे। जिसको देखते हुए इस बार भाजपा ने आरती को अटेली से टिकट दी।
पॉलिटिकल डेब्यू में ही आरती ने जीत हासिल की। भाजपा को बहुमत मिलने और अहीरवाल बेल्ट की 11 में से 10 सीटें भाजपा के खाते में आने के बाद राव सीएम पद पर भी दावा ठोकने के अलावा बड़ी भागीदारी की मांग कर रहे थे। हालांकि भाजपा ने सीधे उनकी ही बेटी को मंत्रिमंडल में शामिल कर इसका समाधान निकाल दिया।
13. केंद्रीय राज्य मंत्री गुर्जर के करीबी नागर
14. पिता आढ़त का काम करते थे, गौरव ने यूनिवर्सिटी में नौकरी की गौरव गौतम के पिता मंडी में आढ़त पर काम करते थे। जिससे उनके परिवार का लालन-पालन होता था, मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के बाद गौरव गौतम ने मानव रचना यूनिवर्सिटी में नौकरी की और वहां से भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अनिल जैन के संपर्क में आ गए। शुरुआत में गौरव ने अनिल जैन के सहायक के रूप में काम किया।
2014 में रखा राजनीति में कदम गौरव गौतम के राजनीतिक सफर की शुरुआत तब हुई जब 2014 में भाजपा ने हरियाणा में सरकार बनाई। इस दौरान वह राजनीति में सक्रिय हो गए थे। जिसके बाद उन्हें भाजयुमो में युवा मोर्चा का राष्ट्रीय सचिव व महाराष्ट्र व गुजरात का प्रभारी व सह प्रभारी नियुक्त किया गया। संगठन में उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी गई उन्होंने उसे बड़ी बखूबी से निभाया। इस चुनाव में भाजपा ने पलवल से सिटिंग विधायक की टिकट काटकर गौरव गौतम को टिकट दी और अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल को 33,605 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
